शायरी – तुम बरसों बाद रू ब रू आई हो

हमने तुमको अपना समझा जबसे

माथे के शिकन में बसाया तबसे

तुम बरसों बाद रू ब रू आई हो

क्या मालूम तुझे, मैं राह देख रहा कबसे

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