शायरी – प्यार की तरस जाने कबसे मेरे दिल में है

प्यार की तरस जाने कबसे मेरे दिल में है

उनके पहलू में सिमटकर मुझे ये कहना है

उनके होठों को अपने लबों से छूकर

हर खामोश दर्द मुझे उनसे बयां करना है

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