शायरी – मुहब्बत के असर को जबसे जाना हमने

मुहब्बत के असर को जबसे जाना हमने

जिस्म की सोहबत को तबसे भुलाया हमने

रूह के दर्द में एक उम्मीद नजर आई खास

तब इस जिंदगी को करीब से पहचाना हमने

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