All posts by Rajeev Singh

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शायरी – जिंदगी भर के लिए आ जाओ

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जिंदगीभर के लिए आ जाओ
मेरे हमसफर तुम आ जाओ

एक आसमान हूं मैं अंधेरी सी
ऐ मेरी रातों के चांद आ जाओ

देखो तो कितनी खामोश हूं मैं
मेरी आवाज लेकर आ जाओ

आज हो तुम एक ख्वाब सही
कल हकीकत बनके आ जाओ

©rajeevsingh   शायरी

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शायरी – जब गुजरा मुझे छूकर तेरी चाहत का सावन

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जब गुजरा मुझे छूकर तेरी चाहत का सावन
प्यासी आंखों से टूटे ख्वाबों की बरसात हुई

देखता है वो मुझको तन्हाई में जागता हुआ
चांद कहता है कि सो जाओ बहुत रात हुई

उनके सवालों का आखिर हम क्या जवाब दें
लोग पूछते हैं कि उदास हो, क्या बात हुई

कोई मेरे दर्द को समझता नहीं है ऐ खुदा
तेरी दुनिया में ऐसे बेदर्दों से मुलाकात हुई

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©rajeevsingh       शायरी

शायरी – तनहा सफर में दर्द की आग जो भड़की

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चिरागों को जलाने से रात रंगीन होती है
दिल को जलाने से ये गमगीन होती है

मेरी आंखों की उदासी बढ़ती है जितनी
एक हुस्न की सूरत और भी हसीन होती है

टूटकर भी बार बार वो ज़हन पे छा गई
रातभर ख्वाबों में एक नाजनीन होती है

तनहा सफर में दर्द की आग जो भड़की
वो चुभने वाली शोलों की संगीन होती है

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – अब मुझे रोने का तरीका आया है

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तेरे गम में अब मुस्कुराते हैं लब
अब मुझे जीने का सलीका आया है
दर्द उठने पै सूख जाती हैं आंखें
अब मुझे रोने का तरीका आया है

Tere Gham Me Ab Muskurate Hain Lab
Ab Mujhe Jeene Ka Tarika Aaya Hai
Dard Uthne Pe Sukhh Jati Hain Aankhen
Ab Mujhe Rone Ka Tarika Aaya Hai

©rajeev singh shayari

शायरी – अचानक तुम आ गई मेरी खुशियों की राह में

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दर्द के फूलों को तेरे कदमों पे निसार चुका मैं
तेरी इबादत की खातिर गुलशन उजाड़ चुका मैं

अचानक तुम आ गई मेरी खुशियों की राह में
उदासी को फिर अपनी सूरत पे संवार चुका मैं

तेरी मोहब्बत का आखिरी कतरा जब सूख गया
अपनी आंखों में एक समंदर को उतार चुका मैं

आशिकी में न जाने कहां से ये फितरत आ गई
जहां में हर शख्स से रिश्ते को बिगाड़ चुका मैं

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – ये कैसा प्यार है जो तोड़कर खुश होता है

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तूने उसी नाजुक बेजुबां को तोड़ लिया
जिस गुलाब से कभी जरा भी प्यार किया

किसी से अपने दिल को जोड़ने के लिए
टूटा गुलाब देकर प्यार का इकरार किया

ये कैसा प्यार है जो तोड़कर खुश होता है
दुनिया में तूने क्यों ऐसा कारोबार किया

मुरझा गया जब तेरे किसी काम का न रहा
फेक देने का सितम तूने कितनी बार किया

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – तेरी हर अदा पे ये इल्ज़ाम है

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तेरी हर अदा पे ये इल्ज़ाम है
लबो-ज़ुल्फ-आँखों पे इल्ज़ाम है
क्यूँ लायी थी तुम सूरत में अपने
मेरी बर्बादियों के जो सामान हैं

Teri Har Adaa Pe Ye Ilzam Hai
Labo-Julf-Aankhon Pe Ilzam Hai
Kyon Layi Thi Tum Surat Me Apne
Meri Barbadiyon Ke Jo Saman Hain

©rajeev singh shayari

शायरी – भले ही उठ जाए तुमपर से भरोसा

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भले ही उठ जाए तुमपर से भरोसा
ऐतबारे-इश्क उठना नामुमकिन है
कभी दामन न भींगे आँसू से मगर
दिल का रोना रुकना नामुमकिन है

Bhale Hi Uth Jaye Tumpar Se Bharosa
Aitbar E Ishq Uthna Namumkin Hai
Kabhi Daman Na Bhinge Aansu Se Magar
Dil Ka Rona Rukna Namumkin Hai

शायरी – बस यही गिला है हमें अपनी नाकाम जिंदगी से

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बस यही गिला है हमें अपनी नाकाम जिंदगी से
एक ख्वाहिश थी आखिरी, तू हमें मिल न सकी

कहां सात जनम तक साथ निभाने का वादा था
कहां सात कदम भी तू मेरे साथ चल न सकी

अब किसी से दिल लगाने का जी नहीं करता
मोहब्बत एक बार जो गिरी फिर संभल न सकी

खुद अपना ही भरोसा था कि जिंदा रहा वरना
तू तो अपने आशिक की जिंदगी बदल न सकी

 

©rajeev singh shayari

शायरी – जिंदगी भर मैं उनके लिए तमाशा ही रहा

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कुछ बेकदरों का जमघट था शहर में
उम्रभर मैं उनके लिए तमाशा ही रहा

मेरे गमों पर करता रहा वो छींटाकशी
हर कोई मेरे दर्द को ठुकराता ही रहा

मैं बहुत परेशां हुआ खुद को बनाने में
जब देखो जमाना मुझे मिटाता ही रहा

अपने वजूद की सच्चाई पाने के लिए
मैं जिंदगी को भीड़ से हटाता ही रहा

 

©rajeev singh shayari

शायरी – ये सफ़र शुरू हुआ था मेरे रोने के साथ

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ये सफर शुरू हुआ था मेरे रोने के साथ
मरते वक्त याद न आया कि हंसे कब थे

जिंदगी गुजर गई उदासियों के जाल में
पता न चला कि इस जाल में फंसे कब थे

तेरी खुशी के लिए समझौता किया वरना
अपनी मजबूरियों के आगे झुके कब थे

देखा तो आखिर में मेरे पास कुछ न मिला
कैसे बताएं कि अपनों से हम लुटे कब थे

 

©rajeev singh shayari

शायरी – अपने इश्क की दर्द भरी कहानी

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उठी जो सर्द हवा, रोज बरस गया पानी
आह भरके सावन की गुजर गई है जवानी

सुनाता रहता है मौसम का ये रोना मुझे
रोज अपने इश्क की दर्द भरी कहानी

Uthi jo Sard Hawa, Roj Baras Gaya Paani
AAh Bharke Saawan ki Guzar Gayi hai Jawani

Sunata Rahta Hai Mausam Ka Ye Rona Mujhe
Roj Apne Ishq Ki Ek Dard Bhari Kahani

©rajeev singh shayari

शायरी – अभी तुम पास थी तो सबकुछ कितना अच्छा था

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अभी तुम पास थी तो सबकुछ कितना अच्छा था
अभी जो तुम पास नहीं, तो कुछ भी अच्छा नहीं

एक बार मेरे प्यार पर यकीन करके तो देख लो
बिना आजमाए कहती हो, मेरा प्यार सच्चा नहीं

लाख कोशिश करे दुनिया,  टूट नहीं सकता ये
तुमसे बांधा इश्क का धागा इतना कच्चा नहीं

जानता हूं तुमको किसी आशिक की तलाश है
मुझसे तेरा दूर रहना है तेरे लिए भी अच्छा नहीं

©rajeev singh shayari

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