All posts by Rajeev Singh

I love writing shayari. My shayaris are inspired mostly by day to day bad experiences of my own life. My first love experience changed my life. I dedicate my feelings to all lovers. Thank you for visiting my website and come again. Share with me your feelings, send email to rajeev@jazbat.com

शायरी – जहां दुश्मन रहते हों खुद अपने ही मकान में

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दिल से निकली आह खो गई आसमान में
कोई सुनता नहीं दास्तां दुनिया जहान में

हर तरफ यहां सबको इश्क की तलाश है
मगर दिल ही नहीं उनके जिस्मो जान में

चलिए अब क्या करना ऐसे बस्ती में रहकर
जहां दुश्मन रहते हों अपने ही मकान में

मैं भटकूं तो मुझे दुनिया में न लाना जिंदगी
लौटके आना नहीं है इस जिंदा श्मशान में

©राजीव सिंह शायरी

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