Category Archives: इश्क क्या है

शायरी – तेरी नजरों में जब समाया तो

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क्या हुआ होश में न आया तो
तेरी नजरों में जब समाया तो
नहीं आ सकता मैं तेरे घर में
तूने छत पे मुझे बुलाया तो
लो उठा दर्द भी मेरे सीने में
अभी सीने से तुझे लगाया तो
मैं भटकता जा रहा था कहीं
तूने मंजिल मुझे दिखाया तो

©RajeevSingh

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शायरी – तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई

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तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई
जो निभाना था घर से, वो वचन भूल गई

सात जनमों की भला कौन खबर रखे
तेरी दहलीज पे जब मैं ये जनम भूल गई

क्या जमाना भी करेगा हमसे शिकवा
जब जमाने के कीए सारे सितम भूल गई

दीवानी होकर तेरे पास चली आई हूं
तुमको देखा तो दिल की लगन भूल गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तेरी जुल्फ में लगा सकूं, वो कली न मैं खिला सकूं

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तेरी जुल्फ में लगा सकूं, वो कली न मैं खिला सकूं
बेबस खिजां में बैठा हूं, वो बहार भी न मैं ला सकूं

सावन की एक फुहार से मैंने मांग ली कुछ बूंद भी
जिसे आंख में तो भर लिया, उसे अब न मैं गिरा सकूं

कहा भी क्या समझा नहीं, देखा भी क्या सोचा नहीं
यूं खो गया मैं खुद में ही कि कहीं भी न मैं जा सकूं

सर पे जब सदियां गिरी, मैं फलक में जाके धंस गया
अब चांद के मानिंद मैं जमीं पे भी न आ सकूं

फलक- आसमान

खिजां- पतझड़

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – दो जान एक हथेली पे, रखके ही दो दिल चल पड़े

हम तुम यहां पे आ मिले, ये किस सदी की बात है

हम इश्क में कब थे मरे, ये किस सदी की बात है

 

दो जान एक हथेली पे, रखके ही दो दिल चल पड़े

वो इस जनम में साथ हैं, ये किस सदी की बात है

 

गम बांट लें एक दूजे का, दुख काट लें हम संग-संग

ना रह सके कभी हम जुदा, ये किस सदी की बात है

 

जन्नत में थे हम कभी,जब इश्क दिल में समा गया

तब आ गए इस जमीं पे, ये किस सदी की बात है

शायरी – मेरी उल्फत को बेवफाई का ही नाम दे दो

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और कुछ न सही, मुझको ये इल्जाम दे दो
मेरी उल्फत को बेवफाई का ही नाम दे दो

जख्म और दर्द तुझे पाकर मिट सा गया
जानेवाले मुझे रोने का सामान दे दो

हम गुजरे हैं तेरी आरजू की गलियों से
मेरे ख्वाबों को टूट जाने का अरमान दे दो

बेखबर तू है तो मैं होश में क्यूं रहता हूं
ऐ मेरे दिल, मुझे मौत का फरमान दे दो

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – इन चांद-सितारों में समा के मैं रह गया

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इन चांद-सितारों में समा के मैं रह गया
यादों के दीये रोज जला के मैं रह गया

तू दो कदम भी साथ मेरे चल नहीं सकी
खुद को मुसाफिर ही बना के मैं रह गया

ये चंद बरस की है जो जिंदगी मेरी
सदियों की तरह इसको बिता के मैं रह गया

मुझको जुनूने-इश्क में कुछ भी खबर नहीं
दुनिया को इस कदर भुला के मैं रह गया

©RajeevSingh #love shayari