Category Archives: महबूबा शायरी

जिंदगी की तलाश तुम और मेरी मंजिल है क्या

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जिंदगी की तलाश तुम, और मेरी मंजिल है क्या
दिल की हो प्यास तुम, और मेरी मंजिल है क्या

तन्हाई ही तन्हाई है अब दूर तलक अफसाने में
होगी कहानी पूरी तुमसे , और मेरी मंजिल है क्या

दुनिया में इस जिंदगी का कोई भी ठिकाना नहीं
तेरी बाहों में बस जाऊं, और मेरी मंजिल है क्या

किन लफ्जों में तुमसे कह दूं अपनी ये ख्वाहिशें
बिन कहे तुम समझ लो, हां मेरी मंजिल है क्या

©rajeevsingh              शायरी

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जानता हूं तुमको किसी आशिक की तलाश है – शायरी इमेज

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इश्क का इमेज शायरी
लाख कोशिश करे दुनिया, टूट नहीं सकता ये
तुमसे बांधा इश्क का धागा इतना कच्चा नहीं

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शायरी – वो सामने बैठी है चाय की दुकान में

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हम इधर खड़े हैं किराए के मकान में
वो सामने बैठी है चाय की दुकान में

सोचता हूं कभी उनकी राह रोक लूं
डर है कि पहुंच न जाऊं श्मशान में

इशारा तो करता हूं मगर देखती नहीं
कैसे कहूं कि मिलो बगल के बगान में

कोई नहीं आई है अब तक जिंदगी में
यही दर्द रहता है दिल ए परेशान में

(अपने मुहल्ले में बगान यानि पार्क के बगल में चाय की दुकान से प्रेरित गजल)

©rajeevsingh

शायरी – जबसे तुम मेरी जिंदगी में चली आई हो

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न जाने कबसे तेरी तलाश में भटक रहा हूं मैं
अब जो मिली हो तो दिल में मटक रहा हूं मैं

मेरी हर बात पर तुम इस तरह हंसती हो
देखो दुनियावालों की नजर में खटक रहा हूं मैं

मुझे उतारकर मेरी जान तुम कब पहनोगी
तेरी खूंटी पर जाने कबसे लटक रहा हूं मैं

जबसे तुम मेरी जिंदगी में चली आई हो
तबसे महफिल भूल कमरे में अटक रहा हूं मैं

©RajeevSingh

शायरी – कभी गली में वो दिखती नहीं

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इश्क का ये उदास मंजर है
दर्द सीने में गड़ा खंजर है

वो हुस्न पिंजरे में बंद पंछी है
इधर दिल रोता घर के अंदर है

आंखें झरने की तरह गिरती हैं
जिस्म में भर गया समंदर है

कभी गली में वो दिखती नहीं
ये उम्मीद भी कितनी बंजर है

©RajeevSingh

शायरी – फिर भी तुम पास हो, ये कैसी जुदाई है

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मेरी बर्बादी किस हद पे उतर आई है
बेरहम याद है और रात ये हरजाई है

आग इक हमने इस सीने में सुलगाई है
दूसरी आग भी जमाने ने अब लगाई है

कई बरसों से हम तुमसे मिले ही नहीं
फिर भी तुम पास हो, ये कैसी जुदाई है

हमने उसको ही नजाकत से अपनाया है
वो कली जो किसी गुलशन में मुरझाई है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari