Category Archives: सच्चा प्यार शायरी

शायरी – मैं तो जिंदा हूं, तेरा ख्वाब जो सलामत है

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तेरी यादों के जज्बात इस कदर छलके
मेरी आंखों के पैकर से अब जहर छलके

मैं तो जिंदा हूं, तेरा ख्वाब जो सलामत है
रात दिन तेरा ही चेहरा हर पहर झलके

अब किसी राह की ख्वाहिश नहीं दिल में
हमने जब देख लिया तेरी रहगुजर चलके

चांद के नूर की तलाश में भटकता हुआ
बुझ गया है वो गर्दिश का सितारा जलके

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – बहुत मुसीबतें थी इश्क की राह में

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न तेरे ख्वाब होते, न हम खाक होते
न ही दिल में दर्द भरे जज्बात होते

बहुत मुसीबतें थी इश्क की राह में
आखिर कब तक तुम मेरे साथ होते

तेरी खुशियों की बड़ी ख्वाहिश थी
वरना क्यों हम सूरत से उदास होते

जीने की जद्दोजहद आसान हो जाती
सोचता हूं, काश तुम मेरे पास होते

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – गम से घिरे इंसान को यूं छोड़ देता है जहान

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वो जानेवाला चला गया, मुड़ के कभी देखा नहीं
एक भीड़ देखती रही, किसी ने उसे रोका नहीं

गम से घिरे इंसान को यूं छोड़ देता है जहान
तन्हा ही वो मरता रहा और तूने भी टोका नहीं

राज ए दिल छुपा के जो खामोशी से जीता रहा
कहने को तो मिला उसे हसीन सा मौका नहीं

सुकून से है सो रहा जो कब्र में पड़ा हुआ
जिस ख्वाब ने जगाया था, वो देगी अब धोखा नहीं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – अजनबी तू क्यों दिल के करीब लगता है

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जबसे देखा है तुमको, तू ही हबीब लगता है
अजनबी तू क्यों दिल के करीब लगता है

तेरे उदास चेहरे पे ये लबों की मुस्कुराहट
देखती हूं तो ये अहसास अजीब लगता है

मेरे पास आकर तुम दामन जो थाम लो
अब जिंदगी में यही अच्छा नसीब लगता है

तूने मेरी दुआ न सुनी तो मर जाऊंगी
तेरे बिन जीवन अब तो सलीब लगता है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मेरे आंसुओं को वो कभी भुला न सकी

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गुनाह ए इश्क का ऐसा गम पीया उसने
खुद खाक में मिलकर ही दम लिया उसने

पलट-पलट के मुझे देख जाने कितनी बार
हंस-हंस के आंखों को नम किया उसने

अपने ही हाथों से अपना दिल तोड़कर
घर के लोगों का दुख कम किया उसने

मेरे आंसुओं को वो कभी भुला न सकी
जिंदगीभर इस कदर ये गम लिया उसने

गुनाह ए इश्क- इश्क का गुनाह

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – ढ़ाई अक्षर प्रेम का पढ़के

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बादल के टुकड़े हैं इतने
धरती पे प्यासे हैं कितने

जिस्म तो बस एक मिला है
पाया अंदर रूप हैं कितने

ढ़ाई अक्षर प्रेम का पढ़के
रह गए तन्हा ही कितने

हैरां हूं मैं गिनते-गिनते
आईने में तस्वीर हैं कितने

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मत कहिए जमाने से कि लगा है दिल का रोग

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सनम की आंखों में हम अपना दीदार कर बैठे
उनके रूबरू हम नजरों से यूं तकरार कर बैठे

मत कहिए जमाने से कि लगा है दिल का रोग
वो कहेंगे न था कोई काम तो ये रोजगार कर बैठे

दर्द की आदत से अब यूं मजबूर हो चुके हैं हम
अश्कों के खातिर तेरी यादों का जुगाड़ कर बैठे

हुस्न से इश्क का सदियों से ये राबता है कैसा
खाक होने के लिए वे एक-दूजे से प्यार कर बैठे

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – तुम अपने कदमों को इस रेत पे नुमाया करो

चुराके शोख निगाहें कभी न आया करो

पलक उठाके ये जन्नत मुझे दिखाया करो

 

घेर लेते हैं जब चांद को काले बादल

इन उंगलियों से अपनी जुल्फें हटाया करो

 

जिगर पे कोई निशानी नहीं तेरे आने तक

तुम अपने कदमों को इस रेत पे नुमाया करो

 

तुमसे पहले कोई शमा मेरे करीब न थी

कभी मुझे भी अपने नूर में जलाया करो

शायरी – मैं मुसाफिर हूं, आया हूं, चला जाऊंगा

मैं मुसाफिर हूं, आया हूं, चला जाऊंगा

एक दिन लौटके तेरे दर पे कभी आऊंगा

 

जिंदगी ने मुझे गम देकर उदास किया

पर तुझे देखकर फिर से मैं मुस्कुराऊंगा

 

मेरे खातिर तू न दरवाजे पे खड़े रहना

क्या खबर कि मैं जाने कब आ पाऊंगा

 

साथ जीने की कसम मैं नहीं खाता हूं कभी

मैं तो तन्हा हूं, तन्हा ही जीए जाऊंगा

शायरी – तुमसे जब सामना होगा अंजाने में

हमने रखे हैं हर गम को सिरहाने में

रात बीते हैं तेरी याद को रूलाने में

 

बोतलें हो गई खाली, प्यास है बाकी

कितनी गहराई है सीने के पैमाने में

 

फिर कभी सर न उठाऊंगा, खाता हूं कसम

तुमसे जब सामना होगा अंजाने में

 

मेरे शानो पे कई बोझ हैं इस जीवन के

बड़ा दम है कमजोर से दीवाने में

शायरी – बेखुद मेरी तन्हाइयां किस राह पर हाय चल पड़ी

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आवाज न कोई दूर तक, आहट न कोई दूर तक
इंसां न कोई हमसफर, चाहत न कोई दूर तक

बेखुद मेरी तन्हाइयां किस राह पर हाय चल पड़ी
मकां न कोई दूर तक, मंजिल न कोई दूर तक

मुसाफिरों की भीड़ में कुछ लोग जो मितवा हुए
वो रह गए रुककर कहीं, मैं चल पड़ा कहीं दूर तक

दरिया ही एक महबूब है, वो चांद ही एक यार है
मेरी आंख भी बहती रही, जलता गया दिल दूर तक

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – अकेले में मिलता है वो आशिक की तरह

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इस मुहब्बत में ऐसा भी कभी होता है
खता मैं करती हूं और वो रो देता है

अकेले में मिलता है वो आशिक की तरह
महफिलों में मगर अजनबी सा बन जाता है

अदा तो देखिए जनाब के रूठ जाने की
पास बैठा है मगर बात नहीं करता है

उसके चेहरे पे उदासी का नूर बाकी है
वो मुझे कोई फरिश्ता सा नजर आता है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – कब से नहीं आया चांद उससे मिलने

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कल भी बड़ी दूर तक खाली शाम थी
कुछ गमगीन थी, कुछ गुमनाम थी

आंचल में आंसू लिए बहती थी दरिया
वो जिस गली में बहुत बदनाम थी

दरिया के उस पार जाने कौन था बैठा
जिसके लिए इस पार वो परेशान थी

कब से नहीं आया चांद उससे मिलने
उसकी परछाई रोशनी के बिना बेजान थी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari