Category Archives: सच्ची मोहब्बत शायरी

shayari – न जाने कब इश्क में इम्तहान आ जाए

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उसकी मोहब्बत शायरी इमेज

न जाने कब इश्क में इम्तहान आ जाए
न जाने कब जिंदगी में तूफान आ  जाए

जल रहा है ये दीया उस रोशनी के लिए
जिसे पाकर बुझने का अरमान आ जाए

हम तो गुजार दें उस गली में ये जिंदगी
जिस रास्ते पर उसका मकान आ जाए

उससे इश्क में इसलिए हारता ही रहा
कि जीतकर उसे चैनो-आराम आ जाए

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शायरी – फिर उस जख्म को जीने का बहाना याद आया

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भूल गया था जो मंजर, वो जमाना याद आया
मुद्दतों बाद दिखी तुम, वो फसाना याद आया

नए शहर की गलियों में खुशी खोज ली तुमने
पुराने शहर की गलियों का वो रोना याद आया

आबाद हो गई किसी की जिंदगी तेरे आ जाने से
किसी को अपनी बर्बादी का तराना याद आया

एक नया दर्द फिर आगोश में ले रहा है मुझे
फिर उस जख्म को जीने का बहाना याद आया

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – दुनिया में तेरा हुस्न मेरी जां सलामत रहे

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दुनिया में तेरा हुस्न मेरी जां सलामत रहे
सदियों तलक जमीं पे तेरी कयामत रहे

और भी दुनिया में आएंगे आशिक कितने
उनकी आंखों में तुमको देखने की चाहत रहे

इश्क के तमाशे में हमेशा तेरे किरदार से
दर्द और खामोशी के अश्कों की शिकायत रहे

खुमारियों के चंद लम्हों का है तेरा सुरूर
उसमें डूबकर मरने से दिल को राहत रहे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – दिल वो फूल है जो टूटकर ही खिलता है

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दिल वो फूल है जो टूटकर ही खिलता है
इसकी खुशबू से फिर आंसू भी मिलता है

जख्म के कांटे हैं जहां जिस्म के पर्दे तले
वहीं रूह को जीने का माहौल भी मिलता है

कभी हुस्न से फासला बनाकर देखो
कुछ तजरबा जुदाई के पलों में भी मिलता है

शबे-तन्हाई में ऐ दिल बेबस ना हो
सब्र कर, मंजिल जरा देर से भी मिलता है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – वो आबरू के लिए आशिक को ठुकराएंगे

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हाले दिल जानकर भी वो नहीं आएंगे
इश्क उनको भी है फिर भी नहीं मानेंगे

रस्मे दुनिया है और वालिद का आशियां है
वो आबरू के लिए आशिक को ठुकराएंगे

हम तो सहकर जीए जाते हैं उनके सितम
जाने कब तक वो मेरे दिल को आजमाएंगे

रात तन्हा ही सही, दिन बेसहारा ही सही
बस उनके दर्द में हम हर लम्हा बिताएंगे

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – कब से नहीं आया चांद उससे मिलने

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कल भी बड़ी दूर तक खाली शाम थी
कुछ गमगीन थी, कुछ गुमनाम थी

आंचल में आंसू लिए बहती थी दरिया
वो जिस गली में बहुत बदनाम थी

दरिया के उस पार जाने कौन था बैठा
जिसके लिए इस पार वो परेशान थी

कब से नहीं आया चांद उससे मिलने
उसकी परछाई रोशनी के बिना बेजान थी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – वफा का आईना जब तेरी नजर से गुजरा

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इश्क की आबरू हमने बचा लिया अक्सर
चिरागे-दिल से मुकद्दर जला लिया अक्सर

कौन चाहेगा कि खुद मौत को पीते जाएं
दर्द ने सबको शराबी बना दिया अक्सर

वफा का आईना जब तेरी नजर से गुजरा
तूने अपना हसीं चेहरा छुपा लिया अक्सर

करीब रहते हैं जो रातभर इस कलेजे में
चांद वो दिन में हमने बुझा दिया अक्सर

फूल जितने भी मायूस होके टूट चुके थे
उनसे अपना गुलशन सजा लिया अक्सर

गुनाह मैं पूरी तसल्ली से किया करता हूं
तेरा खंजर इस सीने पे चला लिया अक्सर


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – जिसमें दर्द होता है, वो सच्चा प्यार करते हैं

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तन्हाइयों के गम आँखो से बहे जाते हैं
कुछ बात है दर्द में जो यूँ जीए जाते हैं
बहुत है तमन्ना कि एक मुस्कान चेहरे पे खिले
मगर तेरी उम्मीद में हम उदास हुए जाते हैं

सबको ऐतराज है दुनिया में मेरी फितरत पे
कि क्यूँ मैं तुमपे ये जाँनिसार करता हूँ
लोग कहते हैं कि सैकड़ों परियाँ हैं यहाँ
फिर जुदा होके क्यूँ तेरा इंतजार करता हूँ

दुनिया ये नहीं जानती कि जिनको दर्द होता है
वो जिस्म से नहीं, दिल से प्यार करते हैँ
और ऐसा दिल लाखों में किसी एक में रहता है
जिसमें दर्द होता है, वो सच्चा प्यार करते हैं

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – मैं तो प्यासा हूं आखिर में वहीं जाऊंगा

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बुझ रहे हैं अब आस्मां के सारे तारे
चांद जीता है अकेला जिनके सहारे

मैं तो प्यासा हूं आखिर में वहीं जाऊंगा
जहां खो जाते हैं पानी के सारे किनारे

कोई बतला दे कि मेरा गम जो खंजर है
क्यों लगते हैं मेरे दिल को इतने प्यारे

हर किसी आंख में बस मैं इतना खोजूं
कहीं दिख जा रे ओ दर्द के आंसू खारे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मेरे ख्वाबों के उजड़े हुए से मंजर में

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रू-ब-रू आते हैं वो माजी के आईने की तरह
हुस्न पर्दे से निकलकर निगाहों पे छा जाती है
उसके जलवों के आगोश में सांसें तो क्या
धड़कनों की रफ्तार भी बढ़ सी जाती है

मेरे ख्वाबों के उजड़े हुए से मंजर में
अश्कों से लिखे गए कुछ नगमें हैं
जिन लम्हों ने दिए हैं ये जख्म के टुकड़े
उन टुकड़ों में बस तेरी ही परछाई है

मरहले शब के गुजरते हैं सजदे में तेरे
हर पहर तेरी इबादत में कट जाती है
ये जवानी के सितम हैं ओ मेरे सनम
तेरे इस दर्द को संजोने की कसम खाई है

मुझपे ऐतबार किया था तुमने एक दिन
तुम भले तोड़ दो, हम कभी न तोड़ेंगे
तेरे वादे, तेरे कसमों को चुन-चुनकर
अपने यादों की ये कलियां सजाई है

हमने सोचा न था कि एक दिन ये आएगा
तेरी यादों में बस अपनी बसर होनी है
ये हकीकत जब हमको नजर आई है
तेरी तस्वीर अपनी रूह पे बनाई है

©RajeevSingh