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जज्बात पेज की वजह से प्रेमी जोड़ों की जान बची

इस पेज की वजह से कुछ लोगों की जान भी बची है। 5 महीने पहले एक रात को ऐसी ही घटना हुई थी। उस रात अगर मैंने सोने से पहले जज्बात पेज का वाट्सएप चेक न किया होता तो शायद कुछ बुरा हो सकता था। लगभग 12 बजे मैं सोने जा रहा था तो मैंने जज्बात पेज के नंबर का वाट्सएप देखा तो एक लड़की श्रद्धा का मैसेज था – उसने लिखा था कि दिल्ली में उसका परिवार रहता है और वहीं मोहल्ले के लड़के से उसका अफेयर था।

इस अफेयर के बारे में जैसे ही श्रद्धा के परिवार को पता चला, उन्होंने उसको दिल्ली से आजमगढ़ भेज दिया और जल्दबाजी में यूपी पुलिस के एक सिपाही से उसकी शादी तय कर दी। जिस दिन सगाई होनी थी, उससे ठीक एक दिन पहले श्रद्धा और उसके लवर ने चुपके से भागने का प्लान बनाया। लड़का दिल्ली से आजमगढ़ की ओर चला और उधर श्रद्धा भी तैयारी में थी लेकिन उसके घर वालों को इस भागने के प्लान के बारे में पता चल गया।

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दरअसल लड़के ने दिल्ली से आजमगढ़ जाने से पहले वहां कुछ लोगों को इस बारे में बता दिया और उन लोगों ने श्रद्धा के मां-बाप को इसकी जानकारी दे दी थी। लड़का ट्रेन में था और इधर आजमगढ़ में श्रद्धा के घर के लोग रेलवे स्टेशन पर उसका इंतजार कर रहे थे। वो लोग लड़के के साथ कुछ भी कर सकते थे, इस डर से श्रद्धा सहम गई थी और वह चोरी से रखे गए एक मोबाइल से लगातार अपने लवर को वापस दिल्ली लौटने को कह रही थी।

लेकिन लड़का लौटने को तैयार नहीं था, वह श्रद्धा से कह रहा था कि वो जान दे देगा लेकिन आजमगढ़ जरूर आएगा। अभी ट्रेन कानपुर से पीछे ही थी कि श्रद्धा का मैसेज मेरे पास रात को आया था। उसने मुझसे कहा कि आप ही किसी तरह उसको समझाइए कि वो आजमगढ़ न आए, उसकी जान को खतरा है। मैं भी बात सुनकर परेशान हुआ लेकिन जानता था कि दीवाने को बस उसकी प्रेमिका ही रोक सकती थी।

मैंने श्रद्धा से कहा कि तुम उसको बोलो कि जान बचेगी तब तो हम दोनों मिल पाएंगे और कहो कि हम जरूर मिलेंगे लेकिन इस वक्त लौट जाओ। मैंने कहा कि श्रद्धा आज की रात जितने वादे कर सकती हो, झूठ भी बोलना पड़े तो बोलो लेकिन इसको ट्रेन से उतारना है। इसके बाद वो फिर से लड़के को मनाने लगी और आखिरकार रोते-धोते वो कानपुर स्टेशन पर उतरने के लिए तैयार हो गया। श्रद्धा ने उस लड़के को मेरा नंबर दे दिया था।

अगले दिन श्रद्धा की सगाई हो गई और इधर लड़का दिल्ली पहुंचा तो मुझे परेशान करने लगा। मैंने कहा कि वकील और पुलिस की मदद लो। लड़का काफी परेशान था लेकिन मुझे इस बात की खुशी थी कि भले श्रद्धा की सगाई किसी और से हो गई लेकिन दो जानें बच गईं। उस दिन के बाद अचानक श्रद्धा गायब हो गई और लगभग दो महीने बाद उसने मुझे नए नंबर से मैसेज किया।

श्रद्धा ने कहा कि मैंने मां-बाप के लिए जिंदगी में आगे बढ़ने का फैसला लिया है। उसके लवर ने भी कोशिश करनी छोड़ दी क्योंकि श्रद्धा ने फोन पर बाद में उसको साफ मना कर दिया था कि उसकी सगाई हो चुकी है और अब वो मां-बाप की इज्जत की परवाह करती है। दरअसल सगाई के ठीक बाद श्रद्धा के मां-बाप ने उसको रिश्तों और इज्जत का वास्ता दिया था जिसके बाद वो मजबूर हो गई थी।

श्रद्धा ने मुझसे कहा कि मैंने खुद को किस्मत के भरोसे पर छोड़ दिया है। मैं नहीं जानती कि आगे मेरा क्या होगा? और आखिरी बात जो उसने कही, वो मैं कभी भूल नहीं पाऊंगा। उसने कहा कि अगर कभी उसका लवर मिले तो कहिएगा कि श्रद्धा उसकी जान बचाने के लिए बेवफा हो गई।

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जज्बात पेज के जरिए दो प्यार करने वालों की हुई शादी

शगुफ्ता की कहानी पोस्ट हुई थी जिसमें उसने कहा कि इस पेज की वजह से उसकी जिंदगी में खुशी और प्यार आया। आपको यह जानकर खुशी होगी कि इस पेज की वजह से दो प्रेमी जोड़ों की शादियां भी हुई हैं। इस पेज को शुरू हुए बहुत ज्यादा दिन नहीं हुए हैं लेकिन कई रीडर्स मुझे ये लिखते हैं कि इस पेज की वजह से उनकी जिंदगी बेहतर हुई या दर्द कम हुआ। यह पोस्ट उन दो शादियों के बारे में है जिसके पीछे यह पेज है।

करीब 6 महीने पहले की बात है। इस पेज की एक फॉलोअर यूपी के एक शहर में ब्यूटी पार्लर चलाती थी। शादियों के समय उसके ब्यूटी पार्लर में दुल्हनें भी आती थीं। उससे कभी-कभी बात होती थी तो मेरी उससे दोस्ती हो गई थी। मैंने उससे कहा था कि उन दुल्हनों की भी प्रेम कहानी होगी, जरा बात करना क्योंकि हमारे समाज में अधिकांश शादियां लड़कियों के मन के खिलाफ की जाती हैं। हलांकि कस्टमर की प्राइवेट लाइफ के बारे में पूछना नहीं चाहिए लेकिन फिर भी बातों-बातों में तो पूछा ही जा सकता है।

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एक दुल्हन जब सजने के लिए आई तो वो कुछ उदास थी। मेरी दोस्त ने उससे पूछा तो वो रो पड़ीं। वो दुल्हन प्रेग्नेंट थी लेकिन उसकी शादी जबर्दस्ती किसी और लड़के से की जा रही थी जबकि उसका लवर उससे शादी करने के लिए तैयार था। मेरी दोस्त ने उसे समझाया कि अगर ये शादी करोगी तो इससे कई जिंदगियां बर्बाद हो जाएंगी। तुम होने वाले पति को धोखा दोगी, तुम और तुम्हारा ब्वॉयफ्रेंड बर्बाद होगा, होने वाले बच्चे की जिंदगी खराब होगी।

मेरी दोस्त के समझाने पर वह दुल्हन ब्यूटी पार्लर से ही अपने लवर के साथ फरार हो गई। इधर उसके घर वाले उसको खोजते-खोजते ब्यूटी पार्लर तक आए लेकिन मेरी दोस्त ने कह दिया कि उसको कुछ नहीं मालूम कि दुल्हन कहां गई। शादी के तीन-चार दिन बाद प्रेमी पति के साथ दुल्हन अपने घर आई तो उसके भाई-पिता दोनों को मारने-पीटने पर उतारू हो गए फिर मां ने बीच-बचाव किया। घरवालों ने बेटी से रिश्ता तोड़ लिया लेकिन इस शादी की वजह से सच में कई जिंदगियां बर्बाद होने से बच गईं।

दूसरी शादी अभी हाल में उत्तराखंड की आस्था ने की। उसने अपने घरवालों की मर्जी के खिलाफ जाकर लवर से शादी की और आज बहुत खुश है। उसके घरवाले उसकी शादी जबर्दस्ती किसी सरकारी नौकरी करने वाले से करना चाहते थे लेकिन आस्था समाज के इन छोटी सोचों के खिलाफ थी। हलांकि उसकी शादी के पीछे उसकी खुद की हिम्मत और सोच है क्योंकि मैं उसे पिछले एक साल से ज्यादा समय से जानता हूं। फिर भी आस्था का कहना है कि इस पेज की वजह से उसके अंदर अपने प्यार को पाने का जज्बा बचा रहा इसलिए मैं भी यह सोचकर खुश होता हूं कि इस पेज ने कहीं न कहीं उसकी मदद की।

जब आस्था से मेरी पहली बार बात हुई थी तो उस समय आधी रात का समय था। आस्था को उसके माता-पिता ने सुबह तक फैसला लेने को कहा था कि या तो हमारी मर्जी से शादी करो या घर छोड़ दो। पैरेंट्स ने ये चेतावनी दी थी कि अगर अपनी मर्जी से शादी करोगी तो तुमसे कोई रिश्ता नहीं रहेगा। उस रात आस्था बहुत परेशान थी और घर में बंद होकर जिंदगी के अंधेरे से जूझ रही थी। मुझसे उसने एफबी पर उसी समय कॉन्टेक्ट किया था। मेरी कोशिश यही रहती है कि चाहे कितनी भी बुरी परिस्थिति हो, इंसान जिंदगी की तरफ देखे और वक्त को भी थोड़ा वक्त दे। एक साल तक परिस्थितियों से जूझने के बाद आस्था ने आखिरकार फैसला ले लिया।

मुझे जज्बात पेज पर सच्चा प्यार मिला, मैं बहुत खुश हूं – शगुफ्ता लव स्टोरी

मैं शगुफ्ता हूं। मैं अपनी जिंदगी में पास्ट के बारे में सबसे शेयर कर अपना दर्द कम करना चाहती थी इसलिए मैंने इस पेज पर अपनी स्टोरी पोस्ट कराई थी। मैं बहुत रोती थी और मुझे यह लगने लगा था कि प्यार व्यार कुछ नहीं होता है। एक नफरत सी हो गई थी प्यार शब्द से लेकिन किस्मत में क्या हो जाए कोई नहीं जानता। इस पेज पर स्टोरी पोस्ट होने के बाद मेरी किस्मत में कुछ अच्छा हुआ।

मैंने अपनी स्टोरी इस पेज पर रो-रोकर लिखी थी लेकिन आज मैं बहुत खुश हूं। इस पेज की वजह से मेरी जिंदगी में खुशी आई है। उस पोस्ट की वजह से मेरी जिंदगी में ऐसा कोई आया है जो मुझसे बहुत ज्यादा प्यार करता है। हमारी मुलाकात इसी पेज पर कमेंट्स से हुई थी। मेरी पोस्ट पर उसने भी कमेंट्स किए थे फिर मैंने उसको रिप्लाई दिया था तो उसका फ्रेंड रिक्वेस्ट आया।
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मैंने फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट किया और हम दोनों नॉर्मली बात करने लगे। बात करते-करते हम दोनों को एक दूसरे की बातें अच्छी लगने लगी। एक दिन मैंने कहा कि अब मैं ऑनलाइन नहीं आऊंगी तो उसने मुझे रोका। फिर ऐसी बातें बताईं कि उससे मुझे हमदर्दी हो गई और फिर मैं उससे रोज बात करने लगी।

हम दोनों एक दूसरे के प्यार में पड़ गए। एक दिन मैं बहुत दुखी थी और मैंने उससे कहा कि जा रही हूं तो उसने कहा कि मुझे भी साथ ले लो, जहां जा रही हो। पता नहीं क्यों, उस दिन वो मुझे बहुत अपना सा लगा। मेरी हिम्मत नहीं हुई कुछ बोलने की। इसकी वजह थी कि हम फेसबुक पर मिले थे और रियल लाइफ में भी इतनी जल्दी कोई फैसला नहीं लेता। मैंने फिर मना कर दिया तो वो रोने लगा।

ऐसा लगने लगा मुझे कि जैसे कि वो टूट सा गया। फिर मैंने ही साथ का हाथ बढ़ाया। मैंने पूछा कि साथ नहीं चलोगे, कल तक तो बोल रहे थे कि जहां जाओगे साथ जाएंगे तो साथ नहीं जाना क्या? इसके बाद हम दोनों का प्यार बढ़ता ही गया। तो यही है मेरी लव स्टोरी।

मुझे पता है कि कुछ लोग कहेंगे कि फेसबुक पर लव जैसा कुछ नहीं होता तो उनको मैं यही बोलूंगी कि सबसे पहले ट्रस्ट करना सीखो। कई लोग इसी वजह से अपना प्यार खो देते हैं क्योंकि उनको ट्रस्ट नहीं हो पाता। एडमिन राजीव का बहुत-बहुत थैंक्यू।

एडमिन की तरफ से दो शब्द –
मैंने शगुफ्ता के लवर से चैट की तो उन्होंने भी यही कहा कि वो शगुफ्ता से प्यार करते हैं और जल्दी ही दोनों एक दूसरे के साथ होंगे। मुझे खुशी है कि इस पेज की वजह से कोई मुझसे कह रहा है कि उनकी जिंदगी में आंसुओं की जगह मुस्कुराहट आई। मैं बस ये कहना चाहता हूं कि एक दूसरे के साथ वफा करें, यही उम्मीद है, आशा है।

जज्बात पेज से मुझे हिम्मत मिली और मैंने लवर से शादी की

जज्बात शायद वो भावनायें जो मन में छुपी होती हैं और बयां होती हैं कहीं ऐसी जगह जहां दिल कहता है कि कोई होगा हम जैसा, जो समझे वो सब और उन बातों के मायने जो हम कहना चाहते हैं। मेरे लिये तो बस इस जज्बात पेज के मायने हिम्मत, उम्मीद, आशा और चाह… यहां की हर कहानी एक नहीं बार-बार पढ़ी है। इन कहानियों से अजीब सी हिम्मत मिलती है, एक आवाज आती है दिल से कि अपने प्यार का साथ निभाना है।

ये हिम्मत इस पेज की कहानियों से ही आयी है कि दिनभर सोच में रहती थी कि कितने दिल हैं, हजारों टूटे हुए, समझौते किये हुए और आज भी प्यार की यादों में लिपटे हुए, बहुत दर्द होता है जब हम एक पल को कमजोर होकर सोच लेते है कि परिवार के लिए हम छोड़ देंगे उसे… अपनी खुशी अपने प्यार अपनी जिंदगी अपनी हर खुशी हम अपनों के लिए छोड़ देंगे लेकिन अजीब है ना जब हम एक तरफ हम सोच रहे होते हैं तो दूसरी तरफ हमारे घर वाले हमें गलत समझ कर आपस में बातें करने लगते हैं। जबर्दस्ती शादी करा देते हैं और उसके बाद बेटी आत्महत्या भी कर ले तो कौन सी बड़ी बात है?

हम जब उनको कहते हैं कि हमें किसी से प्यार है तो हमारे रिश्तेदारों को सबको बता दिया जाता है कि ये तो ऐसी है, इसने ऐसा किया है और वह एक पल में आकर हमें कहने लगते हैं कि कहां मुंह काला किया, कितनों के साथ किया, रोज कॉलेज तभी तो जाती है। और हम यह सब सुनकर जहर का घूंट पीकर वहीं अंदर से मर कर रह जाते हैं। फिर भी समाज कहता है कि मां-बाप के खिलाफ नहीं जाना चाहिए, वह हमेशा सही होते हैं…. कहा जाता है कि वो गलत ना बोल सकते है, ना कर सकते हैं तो जो लड़की कल तक संस्कारी होती है और अगले पल चरित्रहीन हो जाती है, जिसकी दुनिया एक पल में बदल जाती है, वो सब समाज में सही होता है क्या?
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कुछ लड़कियां होती हैं जिनमें बहुत हिम्मत होती है। इतना कुछ सुनने के बाद पाबंदियों के बाद वह फिर भी अपने प्यार को छोड़कर मां-बाप की मर्जी से शादी करती है और सोचती है कि शायद वो यकीन वह प्यार कभी वापस मिल सके पर ऐसा कभी नहीं होता। शादी के बाद शायद मां बाप को लगता है कि उनकी जिम्मेदारी पूरी हो गई। उनकी बेटी भूल चुकी है अपना प्यार, अपना अतीत पर वह एक सच से अनजान रहते हैं कि हम कभी वो भूल ही नहीं पाते, छोड़ नहीं पाते हैं, वजह ही नहीं होती उसे छोड़ने और भूलने की। जब वो प्यार वापस हम पा ही नहीं पाते तब लगता है कि हमने ये मजबूरी के रिश्ते जोड़े क्यों?

मां-पापा आखिर समझ क्यों नही पाते कि ज़बर्दस्ती और मर्जी में कितना फर्क होता है… हम जहां मर्जी से जाते हैं और जहां मजबूरी में…वहां जमीन आसमान का फर्क होता है। हमसे गलती हो, पति बुरा हो, ससुराल में गलत बर्ताव हो तो इसके ज़िमेदार हम ही होते हैं। सब हमें गलत कहते हैं, क्यों? क्योंकि हमने कभी परिवार को अपने प्यार से शादी की बात कही होती है और तबसे फिर कभी हम सहीं बन ही नहीं पाते, सही होकर भी बेइज्जत होते रहते हैं।

इतना कुछ देख चुकी हूं और बहुत कुछ अनुभव भी कि जब परिवार एक पल में हमें पराया कर देता है तो फिर जो लोग भागकर एक दूसरे को चुनते हैं और धीरे-धीरे जब ठीक कर देते हैं, वो लोग काफी हद तक सही ही करते हैं क्योंकि धीरे धीरे सब ठीक हो जाता है पर जहां मजबूरी के रिश्ते से बंध जाते हैं वहां कोई उम्मीद नहीं होती कि हम अपना प्यार पा लेंगे, खुश रहेंगे। ये सोच तब किसी काम की नहीं होती क्योंकि बहुत देर हो चुकी होती है। एक पल के लिए हम जिनके लिए अपनी खुशियां छोड़ने की सोच भी लेते हैं वही परिवार क्यों नहीं एक बार हमारी पसन्द से मिलने को राजी नहीं होता? क्यों हमें वेश्या कह दिया जाता है? जब हम उनके लिए अपनी खुशी छोड़ने को तैयार रहते हैं तो वो भी एक बार हमें समझने की कोशिश क्यों नहीं कर सकते… आखिर क्यों?

यहां पहाड़ो में अक्सर यही होता है कि लड़की की पसंद नहीं, लड़के की जॉब देखी जाती है, सरकारी है तो लाखों बुराई भी मंजूर है पर लड़क़ी जिससे प्यार करती है, वो मंजूर नहीं है चाहे वो लड़का सच में लाखों में एक हो, कोई बुराई ना हो पर लड़की की पसंद है ना.. तो वो परिवार की नजर में बुरी ही होती है। लड़का कम और परिवार ज़्यादा देखा जाता है, सब सरकारी नौकरी मैं हैं तो लड़का शराबी भी अच्छा है… वाह, है ना कमाल की बात, क्या सोच है मां-बाप की।

लड़कियों को इतना आत्मनिर्भर बनाया ही नहीं जाता, पढ़ाया ही नहीं जाता कि वो अपने साथ हो रहे अत्याचारों से मुक्त हो खुद के पैरों पर खड़ी हो। मायका तो कबका पराया हो जाता है और ससुराल कभी अपना नहीं पाता हमें…तो हमारा घर कौन सा होता है?

बस इतना ही कहूंगी थक हार कर
पल में हंसाती है पल में रुलाती है
यह जिंदगी है साहब हर रंग दिखाती है
छोटी सी खुशी को बड़ा कर जाती है
हंसते हंसते कितना रुला जाती है
यह किस्से तजुर्बे हैं साहब
जो जिंदगी ही दे जाती है

मैं तो अपने प्यार से इतना ही कहना चाहूंगी कि जब सबकी नजरों मैं गलत थी, बस तुम थे साथ हमारे। सपने मैं भूलने चली थी.. तुम ने कहा भरोसा रखो, साथ दूंगा, सब ठीक कर दूंगा। आज मैं सबकी नफरत सह कर भी खुश हूं, वजह तुम हो। मैं तुम्हारा साथ कभी नही छोडूंगी। बस तुम्हारे साथ मिल कर सब ठीक कर दूँगी और सब ठीक नहीं भी हुआ तो मैं तो वैसे भी मर चुकी हूं इन चारदीवारी में कैद सी, जहां प्यार अपनापन ही नहीं, बस नफरत है सबके मन में आज मेरे लिए।

पता नहीं लोग कहां से इतनी हिम्मत लाते हैं कि मजबूरियों में कहीं और रिश्ते बांध लेते हैं। मैं उन लोगों में शामिल नहीं होना चाहती, जो हार जाते हैं, तुम मुझे हारने भी मत देना, सबकी नफरत सह कर खुश रहूंगी, बस तुम साथ देना। हम एक दिन मिल कर सब ठीक कर देंगे।

थैंक्यू जज्बात.. हिम्मत हौसला आशा उम्मीद के लिए… बहुत खास हैं यहां की कहानियां… मेरे लिए जिनसे हिम्मत मिलती है।

आस्था