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love story of manjot singh from ludhiyana, punjab – लुधियाना से मंजोत सिंह की लव स्टोरी

मैं मंजोत सिंह हूं। पंजाब के लुधियाना सिटी का रहनेवाला हूं। मैं 21 साल का हूं। 12th क्लास पास करने के बाद मैं सोच रहा था कि क्या करूं?

इसलिए टाइम पास करने के लिए मैंने एक कंप्यूटर इंस्टीट्यूट में एडमिशन ले ली। मुझे अभी वहां एक वीक ही हुआ था कि वहां एक लड़की आई।

पंजाब की लव स्टोरीतhx

पहली ही नजर में वो मुझे अच्छी लगी। धीरे-धीरे हम दोस्त बन गए। वो एक बहोत अच्छी इंसान थी और मैं उसे दिल ही दिल में चाहने लगा था।

लेकिन वो मुझसे 2-3 साल बड़ी थी इसलिए मैंने उसे प्रपोज करने का कभी नहीं सोचा।

धीरे-धीरे हम बेस्ट फ्रेंड बन गए। हम एक दूसरे के साथ सारी बातें शेयर करते थे। सब ठीक चल रहा था। एक दिन वो थोड़ी उदास लगी।

मैंने उससे पूछा कि क्या प्रॉब्लम है तो उसने बताया कि वो किसी से प्यार करती थी लेकिन वो लड़का फेक (fake) निकला।

इस बात ने मुझे पूरा तोड़ दिया। उस दिन मुझसे रहा नहीं गया। मैं उसे उदास नहीं देख सकता था इसलिए मैंने उससे कहा कि मैं तुमसे प्यार करता हूं और तुम्हें सारी लाइफ खुश रखूंगा।

लेकिन उस लड़की को तो प्यार वर्ड से भी नफरत हो चुकी थी।

उसके बाद हमारा मिलना कम हो गया। फिर उसने इंस्टीट्यूट छोड़ दिया। मेरा भी दिल वहां नहीं लगा और मैं विदेश में आ गया।

मैंने सोचा था कि इंडिया से बाहर जाके मैं थोड़ा खुश रहने लगूंगा लेकिन इंडिया और कनाडा क्या, मैं यहां भी उसकी याद में पल-पल तड़पा।

हर रोज उसके फेस को मिरर में देखा। आज मुझे उससे दूर हुए 4 साल हो गए लेकिन आज भी हमेशा मेरी दुआ में उसका ही नाम आता है।

1-2 बार उससे बात भी की फोन पर, मुझे दुख है कि मैंने उसका दिल तोड़ा, मुझे दुख है कि मैं एक अच्छा दोस्त नहीं बन पाया।

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मध्य प्रदेश से कपिल की लव स्टोरी – love story of Kapil from Madhya Pradesh

दोस्तों, मेरा नाम कपिल है , मैंने आज से 4 साल पहले मेरे शहर के पास पोहरी से आईटीआई की थी। कॉलेज में मेरा पहला दिन था, सारे स्टूडेंट्स अलग-अलग जगहों से अए थे। मेरे कॉलेज में कई लडकियां थीं लेकिन एक-एक करके सब लड़कियों ने कॉलेज आना बन्द कर दिया।

love story by kapil

अब पूरे कॉलेज में एक लड़की पढती थी जिसका नाम था रिज़ा खान। धीरे-धीरे हम दोनों काफी क्लोज फ्रेंड बने, एक दूजे की हर बात शेयर करते थे।

रिज़ा के शहर से कॉलेज 5 km दूर था, इस वजह से वो अपनी स्कूटी साथ में लाती थी। चूंकि मेरा शहर उसके शहर से 20 km की दूरी पर था तो वो रोज मुझे रोज बस स्टैंड ड्रॉप करती थी।

कॉलेज की छुट्टी होने के बावजूद मैं घर से कॉलेज जाने की बात कह कर आता था और रिज़ा के घर पर उसके साथ बैठकर घंटों पढ़ाई करता था। रिज़ा अपने मां-बाप के साथ रहती थी।

मैं उसे दिलोजान से चाहने लगा था और मुझे उसके पास्ट के बारे में भी पता था क्योंकि जैसा कि मैं आपको बता चुका हूं कि हम दोनों काफी क्लोज थे और सारी बातें शेयर करते थे। हम एक साथ कॉलेज में लंच करते थे।

हमारा 2 साल का कोर्स था सो समय का पता भी नहीं चला और लास्ट दिन उसने मुझे अकेले में, जब क्लास के सब लोग चले गए, तब रुकने के लिए बोला। सब दोस्त जैसे ही बाहर निकले, उसने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और मुझे जोर से Hug करते हुए बोली – कपिल, बहुत बुरा लग रहा है जाने क्यूं। पता नहीं आज के बाद हम कब और कैसे मिलेंगे?

और उसने मुझे दर्द भरी आवाज में Bye बोला। मैं भी अपने आप को उस वक़्त रोक न पाया और मैंने उसे अपने दिल का हाल सुनाया।

मैंने उससे कहा – मैं तुम्हें प्यार करता हूं और जिंदगीभर करता रहूंगा। तुम भले चली जाओ आज, मगर मैं हमेशा इंतजार करुंगा तेरा। ये सब सुनकर उसने कोई जवाब नहीं दिया।

कुछ दिनों बाद उसने मुझे कॉल किया और बोली – कपिल! ऐसा नहीं है कि तुम मुझसे प्यार नहीं करते हो। तुम करते हो, ये तो पक्का है। लेकिन मैंने जैसा तुम्हें अपनी लाइफ के बारे में बताया है कि मैं जिस लड़के से प्यार करती हूं, उसे मैंने छोड़ दिया था।

वो फिर बोली – कपिल, मैंने जितना उसे दुख दिया है, तुम्हें नहीं देना चाहती। वो गलत था उस वक़्त पर आज तुम सही हो। मैं तुम्हारी बात को मान भी लेती हूं तो इसका एक असर हमारी फैमिली पर भी पड़ेगा।

वो बोलती रही – मेरी मां को विश्वास है तुम पर। वो समझती है कि तुम मेरे गाइड हो, एक अच्छे दोस्त हो। जब उन्हें पता लगेगा तो सब ख़त्म हो जायगा।

वो बोलती रही। मैं सुनता रहा क्योंकि उस वक़्त हाथ-पैर तो दूर की बात है, जुबान भी साथ नहीं दे पा रही थी।

जब उसने मुझे बोलने को कहा, मैं तब चंद शब्द ही बोल पाया। मैं बोला – पगली मेरा मकसद किसी का दिल दुखाना नहीं है। हम अच्छे दोस्त थे, हैं और हमेशा रहेंगे। बस एक वादा करो।

वो बोली – क्या ?

मैं रोते हुए बोला – इस नाचीज को कभी भूल न जाना।

वो बोली रोते-हंसते हुए- पागल है क्या।

दोस्तों यहां पर आकर हमारी स्टोरी समाप्त हुई। आज वो अकेली नहीं, उसके पास कई दोस्त हैं। याद करती है, कॉल करती है। मन करता है जब उससे मिल आता हूं।

पर दिल है न बहुत बुरा है। आज 4-5 साल बाद भी उसकी याद 1 second भी पीछा नहीं छोड़ती। बस जब भी उसे मेरी याद आती है। मैं उससे मिलने जाता हूं। आज खुश हूं और दुखी भी हूं।

खुश इसलिए क्योंकि वो आज खुश है और दुख इस बात का है वो हाथ की लकीरों तक सीमित रह गई।

काश, वो मेरी माथे की लकीरों में शामिल हो जाती।


Story by Kapil Nam Dev, Shivpuri, Madhya Pradesh.

संध्या की प्रेम कहानी – real love story of sandhya

मेरा नाम संध्या है। मेरी लव स्टोरी 2014 से स्टार्ट हुई। 2014 में एमसीए पास करने के बाद मैं जॉब सर्च करने लगी। मुझे एक कॉलेज फ्रेंड की मदद से पहली नौकरी मिली।

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जॉब पाकर मैं बहुत खुश हुई। ऑफिस जाने लगी। मैं जिस टीम में थी, उसमें कोई और लड़की नहीं थी। रिसेप्शन पर बैठने वाली रचना रावत की ज्वाइनिंग मेरे साथ ही हुई थी। हम दोनों ही ऑफिस में नए थे इसलिए जल्दी दोस्ती भी हो गई। हम दोनों रोज साथ लंच करने लगे।

रचना रोज किसी न किसी बहाने से हमारी टीम के पास आती थी। एक दूसरी टीम को लीड करने वाले मुकेश ने मुझे अपनी बहन बना लिया था और उसका व्यवहार भी भाई जैसा था। मुझे बाद में पता चला कि रचना और मुकेश के बीच कुछ-कुछ चल रहा है और मैं यह जानकर खुश थी कि मेरी दोस्त मेरी भाभी बनेगी।

ऑफिस में मुकेश ने अपनी सीनियर मैम से कह रखा था कि मेट्रो तक वो मेरे साथ जाया करे। उस सीनियर मैम के साथ मुकेश का दोस्त दीपक भी जाता था। वह भी टीम लीडर था। दीपक और मेरे घर का रास्त एक ही थी, इसलिए हम दोनों के बीच जान-पहचान हो गई।

दीपक को मैं सीनियर मानती थी। कुछ दिनों बाद मैंने जॉब छोड़ने का मन बनाया तो मैंने यह बात दीपक को बताई तो वह मुझे समझाने लगा। फिर बाद में मुकेश मुझसे कहने लगा कि दीपक बहुत अच्छा लड़का है, तुमको चाहता है, अब तुम भी हां कर दो। मुझे भी दीपक अच्छा लगता था इसलिए मैंने यह रिश्ता एक्सेप्ट कर लिया।

शुरू में दीपक बहुत अच्छा रहा। दीपक का एक दोस्त अमित अपनी गर्लफ्रेंड को बहुत मारता था तो मुझे डर लगता कि कहीं दीपक भी तो ऐसा नहीं करेगा। मैं दीपक से पूछती तो वह कहता कि बाबू मैं कभी नहीं करूंगा ऐसा। दो महीने तक सब ठीक चलता रहा।

दो महीने बाद मेरी टीम को दूसरे ऑफिस में शिफ्ट किया जाना था। यह जानते ही दीपक बहुत रोया और कहने लगा कि बाबू इस ऑफिस से मत जाओ। दीपक ने अपने मैनेजर से बात करके मुझे अमित की टीम में शिफ्ट में करवा दिया। मैं अमित की गर्लफ्रेंड को देखकर डरती रहती थी जिससे वह मारपीट करता था।

मुझे खुद पता नहीं था कि मेरा डर सही साबित होगा। दीपक ने भी मुझ पर हाथ उठाना शुरू कर दिया। मैं रोज दीपक के लिए खाना लेकर जाती थी लेकिन पता नहीं उसको क्या हो गया था। वह घरवालों का गुस्सा मुझ पर उतारने लगा था। मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और हम दोनों का रिश्ता टूट गया।

इस बात को आठ महीने बीत चुके हैं। एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब उसको याद करके मैं रोई नहीं। अब मैं किसी पर कैसे ट्रस्ट कर सकती हूं। मुझे पीटने के बाद वह भी रोता था। मैं उससे बहुत प्यार करती थी।

मैं अपनी स्टोरी बताकर यह आपसे कहना चाहती हूं कि प्यार करो लेकिन इतने पागल मत बनो कि सामने वाला आप पर हाथ उठाए, गाली दे और आप कुछ ना बोलो।

बरेली से पूर्वी की प्रेम कहानी – love story of poorvi from Barailey, UP

मैं पूर्वी हूं। बरेली में रहती हूं। मैं अभी 21 साल की हूं। 2 साल पहले मैं रिलेशनशिप में थी। हम लोग रियल लाइफ में बहुत पहले से एक दूसरे को जानते थे। लेकिन पहली बार उससे मेरी बात फेसबुक पर हुई थी।

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इसके बाद बातों का सिलसिला चलता रहा और एक दिन उसने मुझे प्रपोज कर दिया। मैंने भी यस कह दिया क्योंकि मैं भी उसके लिए सेम फीलिंग रखती थी।

उसने अपने पास्ट के बारे में बताया और वह जैसा भी था, मैंने उसके पास्ट के साथ उसे एक्सेप्ट कर लिया। इसके बाद सबकुछ अच्छा चल रहा था। कहता था कि मैं मर जाऊंगा बाबू तुम्हारे बिना। हम दोनों का प्यार शादी तक पहुंच गया था।

मैं जिंदगी में फर्स्ट टाइम किसी के साथ थी और उससे बार-बार मिला करती थी। फिर कुछ दिन बाद वह मुझे इग्नोर करने लगा। छोटी छोटी बात पर झूठ बोलने लगा। मैसेज करने के बाद भी रिप्लाई नहीं देता था। कॉल करने के बाद उठाता नहीं था और कॉल बैक भी नहीं करता था। हद तो तब हो गई जब एक दिन उसने गाली दी।

बस वो दिन बहुत ही बुरा था मेरी जिंदगी का। वह सबकुछ भूल गया। मेरा प्यार, मेरा केयर, मेरा सपोर्ट। यहां तक कि मैं उसे पैसों से भी मदद किया करती थी। उसके लिए मैंने वह सबकुछ किया जो मैं कर सकती थी।

डियर गर्ल्स, मेरी गुजारिश है कि किसी की गाली मत सुनना। जो इंसान रिस्पेक्ट नहीं दे सकता, वो कभी सच्चा प्यार नहीं कर सकता।

मैं हर तरह से उसके लिए लॉयल (वफादार) थी। उसने मुझे जितने सपने दिखाए थे, सब टूट गए। उसकी लाइफ में बहुत सारी लड़कियां थीं और शायद अब भी होंगी। समझ नहीं आ रहा, अपनी कहानी कैसे बयां करूं।

उसका हर छोटी छोटी बात पर झूठ बोलना आज भी रुलाता है मुझे। अब रोते हुए हर शाम होती है, उसका झूठा प्यार कभी भूल नहीं सकती।

इंसान अपनी लाइफ में बस दो लोगों से बहुत प्यार करता है। एक पैरेंट्स और दूसरा पार्टनर। लेकिन मेरे दिल में जो उसके लिए था, वह उसके दिल में नहीं था। मैं बस इतना कहना चाहूंगी कि किसी से प्यार करो तो सच्चा प्यार करो, टाइम पास करके दूसरों की फीलिंग्स के साथ मत खेलो।

और एक बात…कभी उस इंसान के लिए अपने पैरेंट्स से झूठ मत बोलना जो आपसे झूठ बोलता हो। प्यार करो लेकिन उससे जो आपके प्यार के काबिल हो, आपके प्यार को समझे।

love story of Khushi from Delhi – दिल्ली से खुशी की लव स्टोरी

मेरा नाम खुशी है। मैं अपनी प्रॉब्लम किसी से शेयर नहीं करती क्योंकि किसी पर ट्रस्ट नहीं है मुझे। सब धोखा देते हैं। पर यहां मुझे कोई नहीं जानता तो शायद मैं अपनी कहानी कह सकती हूं, लेकिन कैसे कहूं यह समझ में नहीं आ रहा है। फिर भी मैं अपनी बात रख रही हूं, उम्मीद है आप समझेंगे।

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हम हमेशा से अपनी फैमिली को बहुत महत्व देते आए हैं। उनके लिए हम कुछ भी कर सकते हैं। हमें कितने भी दुख हों लेकिन हम उनको नहीं बताते क्योंकि हम अपनों को खुश और हंसते देखना चाहते हैं। इसी वजह से मैं आज प्रॉब्लम में फंस गई हूं।

मेरी एक बहन है, उसकी शादी को 17 साल हो चुके हैं। उसको दो बच्चे भी हैं। वह अपनी मैरीड लाइफ में बहुत खुश है लेकिन वह अपने हसबैंड की सच्चाई नहीं जानती। वह बहुत बुरा इंसान है। पिछले 8 सालों से वो मुझे बहुत परेशान कर रहा है। पहले तो वो जीजा वाले मजाक करता था लेकिन धीरे-धीरे वह ज्यादा बोलने लगा। उस समय मैं बहुत छोटी थी और कुछ समझ नहीं पाती थी।

पर जैसे-जैसे मैं बड़ी होती गई, उसकी बदतमीजी भी बढ़ती गई। मुझे कहता है कि अगर किसी से कुछ कहोगी तो तुम्हारी बहन को छोड़ दूंगा। और भी बहुत कुछ वह बोलता है जिसे मैं यहां नहीं बता सकती। मैं चुप रही क्योंकि हम अपनी फैमिली को खुश देखना चाहते थे। फिर कुछ दिन बाद हमारे बहुत रोने पे, बहुत रिक्वेस्ट करने पर उसने यह सब बंद कर दिया। एक दिन वह मेरे घर आया। उस समय मैं घर में अकेली थी। उस दिन उसने मेरे साथ जबरदस्ती की।

मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब मैं क्या करूं। हम घर में सबको बताना चाहते थे पर हम अपनी सिस्टर और अपनी फैमिली की खुशियों के लिए चुप रह गए और उसने जबरदस्ती उस दिन हमारी कुछ पिक्स भी ले ली। फिर वह हमें रोज धमकी देता था कि किसी से कुछ कहा तो पिक्स का मिसयूज करेगा।

मैं पूरी तरह परेशान हो गई और डिप्रेशन में चली गई। मैंने खुदकुशी करनी चाही लेकिन मेरे एक दोस्त ने मुझे बचा लिया। वह दोस्त बाद में मेरा ब्वायफ्रैंड बन गया। मैंने उसको सबकुछ बता दिया। यह जानते ही वह मुझे रोज कॉल, मैसेज करके ब्लैकमेल करने लगा। मुझे वह अपनी हर बात मानने के लिए कहता और धमकी देता कि अगर मैंने इनकार किया तो वह सारी कहानी मेरे घरवालों को बता देगा।

मैंने भी कह दिया कि जो करना हो कर लो, तुम्हारी एक भी बात नहीं मानूंगी। फिर भी वह मुझे धमकी देता रहा। कुछ टाइम बाद वह हमारे बहुत रिक्वेस्ट करने पर खुद ही शांत हो गया लेकिन अब फिर से वह मुझे परेशान करने लगा है।

हमें कुछ भी समझ नहीं आता कि अब हम क्या करें। हमें पता है कि हर कोई हमें गलत ही समझेगा। हमारी गलती बताएगा क्योंकि हम इस बारे में घरवालों को नहीं बताते हैं। पर कोई ये नहीं समझता कि हम अपने घरवालों को एक सेकेंड भी दुखी नहीं देख सकते। बस उन्हीं के लिए तो हम जी रहे हैं। उनको कुछ बताने से अच्छा तो मर जाना है। वो लोग इस दुख को कभी भी बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे।

कुछ दिन बाद ब्वॉयफ्रेंड ने भी यह कहते हुए मुझे छोड़ दिया कि उसको मुझपर ट्रस्ट नहीं है। उसे लगता था कि मैं अपनी फैमिली के लिए कुछ भी कर सकती हूं तो उसकी हर बात भी मान लूंगी। उसने यह भी कह दिया कि जिस लड़की के साथ यह सब हो चुका है, उसके साथ वह शादी नहीं कर सकता। लेकिन वह तो यह सब जानने के बाद मेरा ब्वॉयफ्रेंड बना था।

मैं पूरी तरह से टूट गई हूं। पहले ही सिस्टर के हसबैंड की वजह से इतनी टेंशन में थी और वह ब्वॉयफ्रेंड जिससे मैंने इतना प्यार किया, ट्रस्ट किया, उसने भी मेरा साथ छोड़ दिया। किसी पे अब मुझे भरोसा नहीं। किसी से बात करने का मन नहीं करता। क्या सच में बस मैं गलत हूं….मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा, आप बताइए।

हर समय खुद को कोसती रहती हूं। मरना चाहती हूं लेकिन फैमिली के बारे सोचकर वो भी नहीं कर पा रही। आखिर करें तो क्या करें?

इंदौर से प्रीति की रियल लव स्टोरी – love story of priti fro indore

मेरा नाम प्रीति है। मैं 24 साल की हूं। मेरी प्रेम कहानी आज से चार साल पहले शुरू हुई थी। तब मैं अपने शहर के एक कॉलेज में पढ़ती थी। मेरे भाई, पापा या चाचा मुझे कॉलेज छोड़ने जाते थे। कॉलेज की पार्किंग एरिया में मैं रोज एक चेहरे को देखती थी जो मुझे अक्सर देखकर स्माइल करता रहता और जब मुझसे नजरें मिलती तो दूसरे तरफ देखने लगता था। वह हैंडसम था और मुझे वह पहली नजर में अच्छा लगा था। उसकी स्माइल बहुत प्यारी थी। यह उसका रोज का काम था और मैं उसको रोज इग्नोर कर देती।real love story

मेरे घर वाले मेरी दीदी और मेरे लिए रिश्ता खोज रहे थे। दीदी मुझसे थोड़ी सी बड़ी है। अचानक एक दिन मुझे पता चला कि दीदी से पहले मेरे लिए रिश्ता आया है तो मैं सोच में पड़ गई कि ऐसा कैसे हो गया। लड़के वाले हमारे घर आए तो मैं चौंक गई। वही पार्किंग एरिया में मुझे देखनेवाला लड़का अपनी फैमिली के साथ आया था। हम दोनों को कुछ देर के लिए अकेले में मिलने का समय दिया गया। हम दोनों छत पर गए। मैं थोड़ी डरी हुई थी और वह बोलता ही जा रहा था। उसने बताया कि उसकी बहन मेरे कॉलेज में मेरी सीनियर है और वह उसको छोड़ने रोज कॉलेज जाता था तभी उसने मुझे देखा था। एक ही कास्ट होने की वजह से वह रिश्ता लेकर आ गया। उस लड़के का नाम मनीष था।

मनीष ने शादी के बारे में मेरी राय पूछी तो मैं सोचने लगी। मैं उसको पसंद करने लगी थी लेकिन इतनी जल्दी मैंने हां कहना ठीक नहीं समझा। मैंने कह दिया कि घरवालों को रिश्ता मंजूर होगा तभी बात आगे बढ़ेगी। हम दोनों नीचे गए तो हमारी सगाई की बात चल रही थी। बाद में मेरी मनीष से सगाई हो गई और मुझे उससे प्यार भी हो गया। वह भी मुझसे बहुत प्यार करता था। लेकिन कुछ दिन बाद निजी कारणों से मैंने सगाई तोड़ दी। मनीष एटीट्यूड दिखाने लगा था। ब्रेकअप पर मैं बहुत टूट सी गई। मैं उसके लिए बहुत रोई और वह भी मेरे लिए बहुत रोया।

इसके बाद मनीष मेरा पीछा करने लगा। मैं जहां जाती, वह पीछे लग जाता। मैं अकेले कहीं नहीं जा सकती थी। मैंने उसका कॉल उठाना बंद कर दिया। मेरे घरवालों ने मेरा कॉलेज छुड़वा दिया। मैं मनीष का एटीट्यूड तोड़ना चाहती थी, उसे दिखाना चाहती थी कि मुझे उससे ज्यादा अच्छा लड़का मिल सकता है। मैं उसे भूलना चाहती थी। पर ना चाहते हुए भी वह याद आ ही जाता था। इस बात के छह महीने के बाद मैं पहले की तरह खुश रहने लगी थी।

इस बीच मेरी दीदी का रिश्ता भी आया और उनको देखने लड़केवाले आए। मैं अपने कजिन के साथ दूसरे कमरे में मस्ती कर रही थी। मेरे भाई ने उस दिन काली शर्ट पहन रखी थी। वह दिख नहीं रहा था तो मैं उसे खोजने लगी। खोजते-खोजते छत पर गई तो वहां काली शर्ट पहने एक लड़का दिखा जिसकी पीठ मेरी तरफ था। मैंने समझा मेरा भाई है और मैंने उसे धक्का दे दिया। वह गिरा तो मैंने देखा कि वह मेरा भाई नहीं, कोई और था जो लड़केवालों की तरफ से आया था। मेरी वजह से उसे चोट लगी थी। बाद में मुझे पता चला कि वह मेरी दीदी का होनेवाला देवर किशोर था।

दीदी का शादी हो गई। मैं किशोर की तरफ आकर्षित थी और शायद वह भी मुझे लाइक करता था। कुछ दिनों बाद दीदी ने अपनी ससुराल में मुझे कुछ दिन साथ रहने के लिए बुलाया। मैं चली गई। वहां एक दिन किशोर ने मुझे प्रपोज कर दिया और मैंने भी एक्सेप्ट कर लिया। लेकिन मैं अभी भी मनीष को भुला नहीं पाई थी इसलिए यह बात बताने के लिए मैंने उसको फोन किया। मनीष ने जवाब में कहा कि मुझे जलाना पूरा हो जाए तो बताना, तुम बस मेरी हो और तुम्हारी शादी बस मुझसे होगी। वह थोड़ा पागल है लेकिन बहुत अच्छा है।

इधर मेरे और किशोर के रिश्ते के बारे में घरवालों को पता चल गया। हमारी सगाई कर दी गई। अब मैं हर रोज किशोर से भी बात करती हूं और मनीष से भी। मैं बहुत कंफ्यूज्ड हूं कि आगे क्या करूं? किधर जाऊं?