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प्रेम विवाह के दो साल बाद पति का प्यार कम हो गया है, मैं अलग होना चाहती हूं

मैं सिमरन हूं। मेरी दो साल पहले लव मैरिज हुई थी तब मेरे हसबैंड मुझसे बहुत प्यार करते थे लेकिन अब उनके पास मेरे लिए टाइम ही नहीं होता। अब मुझे लगता ही नहीं कि वो मुझसे प्यार करते हैं और मैं उनसे अलग होना चाहती हूं लेकिन वो मुझे डाइवोर्स भी नहीं देना चाहते।

मैं सोचती हूं कि जब रिश्ते में न प्यार रहा और न ही रिस्पेक्ट तो अलग होना ही सही होगा। मैंने हम दोनों के रिश्ते को बचाने की बहुत कोशिश की। जब मैं अपनी बात को लेकर उनसे लड़ाई कर लेती हूं तो कुछ दिन तक वो ठीक रहते हैं लेकिन फिर कुछ दिन बाद उनका बिहेव पहले जैसा हो जाता है।

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मेरे हसबैंड प्राइवेट जॉब करते हैं। मैं अब उनसे अलग होकर जॉब करना चाहती हूं। हमारा एक बेटा भी है और मुझे हर हालत में बेटे को साथ रखना है। मैं अपने बेटे के बिना नहीं रह सकती। मैं बेटे के साथ लाइफ को शांति के साथ जीना चाहती हूं।

हलांकि मैं ये भी चाहती हूं कि अगर ये रिश्ता बच जाए तो बचाने की और कोशिश करूं, लेकिन ऐसा क्या करूं कि वो मुझसे प्यार करें, मेरे लिए वक्त निकालें। फिर तलाक लेने का भी मन करता है लेकिन वो तैयार ही नहीं हैं। मेरी सारी बातों को ध्यान में रखते हुए अच्छा सजेशन दीजिए।

पेज एडमिन राजीव की सलाह

सिमरन, कई लव मैरिज टूटने के पीछे यही मनोविज्ञान होता है जो आपके साथ हो रहा है। शादी से पहले के प्यार और शादी के बाद के प्यार में जब तुलना करने लगते हैं तो परेशानी खड़ी हो जाती है। नेचर की हर चीज में उतार-चढ़ाव है, इसे स्वीकार करना होगा। जो जॉब आप तलाक के बाद करना चाहती हैं, वही जॉब अगर आप अभी कर लें तो आपकी समस्या दूर हो जाएगी क्योंकि तब आप भी पति के लिए समय नहीं निकाल पाएंगी और उतना प्यार भी उनको नहीं दे पाएंगी जो शादी से पहले आप उनको देती थीं।

प्राइवेट जॉब करनेवाले की अपनी परेशानियां होती हैं। आप हो सके तो उनकी परेशानियों में उनका सपोर्ट करें। आपके झगड़ों की वजह से हो सकता है कि वो दूर चले गए हों या जो भी वजह हो, आप उनसे पूछिए। आप दोनों पति-पत्नी ही नहीं, लव कपल भी रहे हैं तो खुलकर तो बात कर ही सकती हैं।

अभी हमारे आसपास एक परिवार में ऐसी ही परेशानी आई थी। पत्नी हमेशा पति से समय और प्यार की शिकायत करती रहती थी। वहां पति को मेरे दोस्त ने सलाह दिया कि पत्नी की जॉब लगवा दे, सब ठीक हो जाएगा और हुआ भी यही। पति ने कोशिश करके पत्नी की जॉब लगवा दी, उसके बाद दोनों को वीकेंड पर ही प्यार करने का समय मिल पाता था। शादी बच गई और समस्या भी खत्म हो गई। हमारी कई समस्याओं की जड़ हमारा खालीपन है, उसे दूर कीजिए, समस्या दूर हो जाएगी।

पेज रीडर्स की बात

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सिर्फ जमीन देखकर मेरी शादी एक नशेड़ी लड़के से मां-बाप कर रहे हैं, काजल की स्टोरी

मैं काजल, उत्तर प्रदेश से एक राजपूत परिवार से हूं। अभी 22 साल की हूं। मेरे पिता पुलिस डिपार्टमेंट में हैं। मां और पापा ने पिछले साल मेरी सगाई ऐसे परिवार में कर दी जिनके पास बहुत सारी जमीन है। लेकिन मेरा होने वाला पति कोई काम नहीं करता।

मुझे पता चला कि वो नशा करता है और काफी बद्दिमाग भी है। वो लड़कियों के बारे में ठीक विचार नहीं रखता और न ही उसके मन में मेरे लिए कोई रिस्पेक्ट है। मैं यह शादी नहीं करना चाहती लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझ रहा।

लड़के की मां और दीदी से मेरी बात होती है लेकिन फोन मेरी मां के मोबाइल पर आता है और जब भी बात होती है तब मां मेरे पास खड़ी रहती है कि मैं उनको शादी तोड़नेवाली बात न कह दूं।

मैं यह शादी नहीं करना चाहती लेकिन मां और पापा मेरी एक नहीं सुनते। मेरे मां-बाप ने कहा है कि अगर मैं यह शादी नहीं करूंगी तो वे सुसाइड कर लेंगे। मेरे सारे रिश्तेदार भी मुझे ही दोष दे रहे हैं और कह रहे हैं कि बेटियों को शादी मां-बाप की मर्जी से ही करनी पड़ती है। वो कह रहे हैं कि बेटियों की शादी ऐसे ही होती है।

मैं लड़के को मना भी करूंगी तो वो यह बात मेरे मां-बाप से बता देगा जिसके बाद वे मेरे साथ कुछ भी कर सकते हैं। मैं बहुत मजबूर हूं और मुझे कोई रास्ता नहीं सूझ रहा। अगर यह शादी हो गई तो मैं जीते-जी तबाह हो जाऊंगी लेकिन मेरे मां-बाप यह समझ ही नहीं रहे। क्या इस शादी को रोकने का कोई और रास्ता है?

पेज रीडर्स की सलाह

पेज एडमिन राजीव की सलाह

राजपूत परिवारों में आज भी बेटियों की शादी बिना उसकी मर्जी जाने कर दी जा रही है। यह खराब रवायत जाने कब बदलेगी। घर में अपना विरोध जारी रखिए। जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद ले सकती हैं। किसी भी हाल में यह शादी मत होने दीजिए। हलांकि यह आसान नहीं लेकिन फिर भी, कोशिश करते रहिए।

शादी तय हो गई लेकिन लड़कीवाले दोनों को बात ही नहीं करने दे रहे

बड़े सरकारी अफसर बने मेरे एक मित्र की शादी हाल में तय हुई है। उनके लिए रिश्ते तो कई आए। कई लड़कियां सरकारी जॉब करती थीं लेकिन मित्र ने सोचा कि मैं तो कमाता ही हूं इसलिए पढ़ी-लिखी लड़की से ही शादी कर लूं तो उन्होंने एमएससी बीएड कर चुकी लड़की की फोटो देखकर घरवालों को हां कह दिया।

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व्यावहारिक लेन-देन यानी दहेज की रुपए देने के बाद लड़के-लड़की की शादी की डेट फिक्स कर दी गई। अब जब सबकुछ तय हो गया तब जाकर लड़के के मन में लड़की से बात करने की इच्छा जागी। लड़की के भाई से कहा, मुझे बात करनी है। लड़की के भाई ने साफ मना कर दिया, कहा कि हमारे यहां ऐसे खराब संस्कार नहीं हैं कि बेटी शादी से पहले होने वाले पति से बात करे।

अब जब मित्र ने यह बात सुनी तो उनको बुरी लगी कि जमाना कहां से कहां आ गया और इनको संस्कार की पड़ी है। शादी फिक्स होने के बाद भी बात नहीं करने दी जा रही। इसके बाद दोस्तों और रिश्तेदारों ने भी पूछना शुरू किया कि लड़की से बात हो रही कि नहीं। जब उनको पता चला तो कहने लगे कि कैसे पिछड़े घर में शादी तय कर ली, जहां अभी तक ये हाल है।

मित्र ने मुझसे पूछा कि मैं क्या करूं, लड़की से कैसे बात हो तो मैंने भी हाथ खड़े कर दिए क्योंकि मुझे भी कुछ सूझा नहीं। अब सोचिए आज भी इतने पढ़े-लिखे लोग अपनी शादी का फैसला खुद नहीं कर पा रहे हैं और शादी से पहले न ही इनको एक-दूसरे से बात करने दिया जा रहा है जबकि लड़का बड़ा अफसर है और लड़की उच्च शिक्षा प्राप्त…

शादी के लिए लड़की ने ये सोचकर हां किया होगा कि चलो, लड़का अफसर है तो काबिल है। लड़के ने फोटो और पढ़ाई देखकर हां की होगी। लेकिन समाज के इतने एंपावर्ड यानी सशक्त हुए लड़के-लड़की में इतनी ताकत नहीं कि वो शादी फिक्स होने के बाद दो बात कर लें…क्योंकि घरवालों को डर है कि बात के दौरान कहीं किसी बात को लेकर शादी टूट न जाए।

हमारे मित्र के लिए आपके पास कोई सुझाव हो या कोई रास्ता हो तो प्लीज शेयर करें।

पेज रीडर्स का जवाब

फौजी पति के जुल्मों की शिकार एक पढ़ी लिखी संवेदनशील लड़की की लव-मैरिज स्टोरी

मैं रंजना उत्तराखंड से हूं। मैंने एमए बीएड तक पढ़ाई की है। 2009 में मैंने लव मैरिज की थी जिसके बाद पढ़ाई छूट गई। शादी से पहले मेरे हसबैंड बहुत अच्छे इंसान थे लेकिन शादी के पहले दिन से ही उनकी सारी बातें बदल गईं क्योंकि मैं दहेज में उनके मम्मी पापा की अपेक्षा के मुताबिक सामान नहीं ला पायी थी। उनके मम्मी पापा ने उनको मेरे खिलाफ भड़काया और शादी के दूसरे तीसरे दिन से ही मेरे साथ पति ने बात करनी बंद कर दी और मारपीट भी करने लगे। मैं उनसे बहुत प्यार करती थी इसलिए मैंने उनका साथ नहीं छोड़ा।

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मेरे पति भारतीय सेना में हैं। फौज में होने की वजह से हम दोनों साल में तीन या चार बार ही मिल पाते हैं मगर मुलाकात के दिनों में एक दिन भी चैन से नहीं गुजरता है। कुछ महीने पहले जब वो घर आए तो मेरे बनाए ब्रेकफास्ट को खराब बताकर उन्होंने मुझे इतना मारा-पीटा कि हॉस्पिटल में एडमिट होना पड़ा। मेरे ससुराल वाले कहने लगे कि पुलिस में कंप्लेन करोगी तो परिवार बर्बाद हो जाएगा, पति कहने लगे कि आगे से वो मेरे ऊपर हाथ नहीं उठाएंगे। मेरी दो बेटियां हैं, उनके बारे में कहने लगे कि उनकी जिंदगी खराब हो जाएगी। मैं यह सब सोचकर शांत रह गई और माफ कर दिया।

मगर इसके बाद भी मेरे ऊपर जुल्म नहीं रुके। कुछ दिनों बाद फिर मेरे पति मुझे मेंटली टॉर्चर करने लगे। बिना गाली के वे बात ही नहीं करते। मुझे लगता है कि इस बार घर आएंगे तो फिर वो मुझे मारेंगे। मैं उत्तराखंड में ऐसी जगह से हूं जहां तलाक के बारे में सोचना भी पाप है। मेरे अपने घर में मेरी मम्मी नहीं है। पापा ने दूसरी शादी की थी। सौतेली मां और पापा मेरा साथ नहीं देते। दो बेटियों के फ्यूचर के बारे में सोचकर दस साल से मैं ये सब बर्दाश्त किए जा रही हूं। सोचा कि शायद मेरे पति कभी सुधर जाएंगे लेकिन मुझे नहीं लगता कि वो कभी बदलेंगे।

मेरे पति चार भाई हैं। मैं घर की सबसे बड़ी बहू हूं लेकिन मेरी कोई इज्जत नहीं। बाकी सभी भाई अपनी बीवी के साथ खुश हैं। मेरे पति घर में सबके सामने मेरी इंसल्ट करते हैं। मेरा साथ कोई नहीं देगा। मैं अपनी बेटियों को लेकर कहां जाऊं। मेरे सास ससुर भी यही चाहते हैं कि मैं घर छोड़कर चली जाऊं। मुझसे अब ये सब बर्दाश्त नहीं होता। पापा से एक बार कहा तो उन्होंने कहा कि अब तेरा घर वही है, पति ही सबकुछ होता है। मेरा सुसाइड करने का मन करता है मगर बेटियों को किसके भरोसे छोड़कर जाऊं, इसलिए मर भी नहीं पाती।

मेरे लिए अब पति के साथ रिश्ता निभाना बहुत मुश्किल हो रहा है। मैं किसी से भी अब अपना दर्द कह नहीं सकती। पापा से कहकर भी देख चुकी। अब कहीं से कोई उम्मीद नजर नहीं आती। मैं ये सब बातें बहुत रो-रोकर लिख रही हूं। क्या सचमुच मेरे लिए दुनिया के सारे रास्ते बंद हो चुके हैं? क्या इस टॉर्चर से निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है? मेरी बेटियां नहीं होती तो शायद में सुसाइड कर चुकी होती लेकिन उनका ख्याल आते ही चुप हो जाती हूं। मैं क्या करूं?

सास कहती है कि ससुर का इंजेक्शन लगवाकर हमें बेटा दो…हरियाणा के बहू की स्टोरी

मैं हरियाणा से प्रीति हूं। मेरी शादी 2013 में हुई थी। उस समय मैं बीस साल की थी। मैं राजपूत परिवार से हूं और हमारे यहां शादी से पहले लड़की को लड़का से नहीं मिलने देते। मैंने सिर्फ उनकी फोटो देखी थी। शादी के बाद पता चला कि मेरे पति को कैंसर था। मेरी सास को भी ब्रेस्ट कैंसर था और ससुर को बोन कैंसर। जब मुझे पता चला तो मैं बहुत रोई लेकिन सब एक्सेप्ट कर लिया क्योंकि शादी के बाद बेटी को मां-बाप घर में रखना नहीं चाहते।

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मैंने अपने पति से ये भी कभी नहीं पूछा कि आपने शादी से पहले ये बात क्यों नहीं बताई? मैंने सब एक्सेप्ट किया और लाइफ आगे बढ़ने लगी। पति ने काफी प्यार दिया। इस बीच मेरी एक बेटी हुई। एक दिन पति की छाती में दर्द होने लगा। चंडीगढ़ में डॉक्टर ने बताया कि छाती में ट्यूमर है जिसका ऑपरेशन करना होगा। ट्यूमर की जांच में पता चला कि उसमें कैंसर था। मैं बहुत रोई।

दो साल तक पति की कीमोथेरेपी चली। मैं दिन-रात पति की सेवा करती रही ताकि उनकी जिंदगी बचा सकूं। मेरे सास, ससुर और पति को कैंसर मेरी शादी से पहले से था फिर भी वेे मुझे दोष देने लगे कि मेरी वजह से उनके घर में सभी बीमार हुए हैं। मैंने कभी उनको उलटकर जवाब नहीं दिया कि आप सब क्यों ऐसा बोल रहे हो क्योंकि मैं मानती हूं कि रब सब देखता है कि कौन सच्चा और कौन झूठा। मेरी सफाई देने से कुछ होने वाला नहीं था।

घर में एक समय ऐसा भी आया कि सास, ससुर और पति, तीनों की कीमोथेरेपी चल रही थी और ऊपर से मेरी परीक्षा थी, छोटा बच्चा था। मैंने बहुत परेशानी झेली। पिछले साल सितंबर में मेरे पति की मौत हो गई। उस दिन के बाद से मेरी जिंदगी बहुत बुरी हो गई। मेरे खाते में हरियाणा सरकार से मिले करीब 30,000 रुपए थे क्योंकि मैं पोस्ट ग्रेजुएट हूं। मेरे सास-ससुर ने बैंक से मेरा सारा पैसा निकाल लिया। मैंने बेटी के लिए सेविंग की थी।

मेरी एक ननद है जिसकी शादी नहीं हुई है और प्रॉपर्टी पर उसकी नजर है। सास ससुर मुझे कहते हैं कि तेरा यहां कुछ नहीं है। वो मुझे घर से निकालने की और मेरी बेटी को भी छीनने की धमकी देते हैं। सास-ससुर कहते हैं कि तुझे घर से जाना है तो जा लेकिन तेरी बेटी को नहीं देंगे। मैं अपनी बेटी के बिना नहीं रह सकती। सास-ससुर ने कहा कि अगर तू बेटी को ले जाएगी तो खून की नदी बहा देंगे।

मैं अभी बीएड कर रही हूं और 25 साल की हूं। मेरी सास मुझसे कह रही है कि तू अपने ससुर का इंजेक्शन लगवा ले, एक बेटा पैदा करके हमें दे। मैंने हिम्मत करके बोल दिया कि मैं ये नहीं कर सकती, सबलोग क्या कहेंगे, कुछ तो शरम करो। मेरी सास दूसरों से फोन पर कहती है कि मैं जबर्दस्ती इसे इंजेक्शन लगवा दूंगी, कौन है जो रोक लेगा।

मुझे बताइए कि मैं क्या करूं? ये लोग न मुझे मां-बाप के पास जाने देते हैं। अब तो कोई ऐसा भी नहीं है कि मैं जिसके सामने रो लूं, अपने मन की बात किसी से कह लूं। मैं अपनी बर्बाद जिंदगी के बारे में मां-बाप को भी नहीं बता पा रही, वो तो पहले से मेरी वजह से दुखी हैं, उनको और दुखी नहीं करना चाहती। क्या सास-ससुर मेरी बेटी को मुझसे छीन सकते हैं, मैं ऐसी परिस्थिति में क्या करूं?

मेरी शादी छोटी उम्र में हुई, मैंने एक बर्बाद जिंदगी को मेहनत से संवारा- शर्मीला की मैरिज स्टोरी

मैं गुजरात से शर्मीला हूं। मेरी सगाई छोटी उम्र में 2002 में कर दी गई थी। उस समय मैं बस सोलह साल की थी। ससुराल में हर कोई ये सोचता था कि मैं छोटी हूं, बहू हूं इसलिए पूरे घर का काम मुझे ही करना पड़ता था। सुबह पांच बजे से लेकर रात को दस बजे तक। कोई ऐसा नहीं था जो मुझे समझे।

मैं भी नादान थी, अकेले में रो लेती थी। मेरी तीन ननद और दो देवर थे। छोटा देवर नीयत का खराब था। वो रात को मेरे कमरे में आता था और जबर्दस्ती छूता था। मैं पति को जगाती थी तो वो भाग जाता था।
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वॉशरूम का रास्ता हमारे कमरे से होकर जाता था। बेडरूम सिस्टम वाला घर नहीं था। पहले हॉल था जिसमें घर के बाकी लोग सोते थे, उससे जुड़ा एक कमरा था जिसमें मैं सोती थी, उसके बाद वॉशरूम था। मेरे ससुर को शुगर की बीमारी थी इसलिए वो बार-बार पेशाब के लिए वॉशरूम जाते थे तो सास ने कमरा बंद करने से मना किया था इसलिए देवर रात में मौका पाकर घुस जाता था। मेरे ऊपर बहुत बंदिशें थी, मर्यादा और घूंघट में रहती थी। मैंने अपने पति को बोला कि छोटा देवर रात को आता है मगर वो डरपोक थे, कुछ नहीं बोले।

मेरा देवर मुझको धमकी भी देता था कि तुम किसी से कहोगी तो तुम्हारा यकीन कोई नहीं करेगा। मैंने फिर पति से कहा कि आप कुछ क्यों नहीं कहते मगर उन्होंने कुछ नहीं कहा। फिर मैंने अपनी सास को बोला कि छोटा देवर कमरे में आता है, मुझे अलग रहना है नहीं तो मुझे मायके भेज दो।

तब मेरी सास बोली कि तू ही गंदी है, मेरा लड़का गलत नहीं। मैंने कहा कि ठीक है तो मैं ही ऐसी हूं तो मुझे अलग रहना है। मेरा पति कुछ नहीं बोला। जो अपनी पत्नी की इज्जत की परवाह नहीं करता वो लाइफ में क्या करेगा। मैं बहुत रोती थी। पूरी रात रोती रहती थी। मेरा पति मुझे नहीं समझता तो कौन समझेगा।

उसी समय मेरे देवर का किसी के साथ अफेयर था तो बवाल हुआ। बहुत सारे लोग देवर को पीटने के लिए आए थे तब मैंने सास से कहा था कि देख लो अपने लड़के की अच्छाई, तभी तो पिटाई हुई। मैं पति के साथ किसी तरह से अलग हो गई। मैंने पति से अलग होने को कहा था तो उन्होंने कहा कि मकान नहीं है, कहां से खोजूं तुम खोज लो तो मैंने किराए का मकान खोजा। अब मेरा परिवार है, जिसमें मेरे पति और दो बच्चे हैं। जब मैं अलग हुई तो मेरा पति कुछ भी कमाता नहीं था, पहले भी नहीं कमाता था और आज भी नहीं कमाता। मेरा पति कभी मेरा अपना हुआ ही नहीं। मैंने बहुत मेहनत की और जीरो से शुरू कर आज मैं बिजनेस करती हूं।

जब अलग हुई थी तब ससुराल से ज्यादा कुछ नहीं मिला था। चार पांच बर्तन बस। जिस घर में गई वहां मैंने घर का खर्चा उठाया, बच्चों की फीस, घर का राशनपानी से लेकर सबकुछ। कहते हैं कि पेड़ मजबूत होता है तो डाली को कभी कुछ नहीं होता, यहां तो मेरा पति ही खोखला था।

मैंने पहले कामवाली बाई का काम दो घरों से शुरू किया। सुबह को 8 से 11 बजे तक दूसरे घरों में काम करती फिर अपने घर का काम करने आ जाती थी। वहां से फुरसत मिलती तो सिलाई-कढाई सीखती थी और शाम में चार बजे से सात बजे तक सब्जी बेचती थी। इसके बाद पुरानी साड़ी बेचने लगी। फिर पैसे बचाकर 5000 रुपए में शादी के नए माल लाकर काम शुरू किया। फिर धीरे-धीरे मैंने कपड़ों और सिलाई की दुकान खोली। फिर शादियों के ड्रेस सिलने लगीं, लैगिंग, कुर्ती और भी कपड़े सिलने लगी तो मेरा काम चल पड़ा। आज मेरे पास अच्छी आमदनी है और परिवार चलाती हूं। अब मैंने अपना मकान भी ले लिया है।

मैंने खूब मेहनत की और घर का खर्चा-पानी निकला ताकि मेरी लाइफ खराब हुई तो हुई, मेरे बच्चों की लाइफ खराब न हो। मेरे पति ने एक पैसा भी नहीं कमाया। मेरे बच्चे मेरे जीने का सहारा हैं। बाकी मेरी जिंदगी में कुछ और है भी नहीं। मैं ये कहना चाहती हूं कि हम लड़कियां कमजोर नहीं हैं, हर मोड़ पर चलना जानते हैं, चाहे कोई भी बड़ी मुसीबत आए, हम हिम्मत नहीं हारते क्योंकि अच्छे लोगों के साथ कोई नहीं तो भगवान खड़ा होता है।