शायरी – इश्क करते हैं हम एक खुदगर्ज से

दिल टूट रहा है तेरे दर्द से
हम मरते रहे हर पल इस मर्ज से
तेरे इश्क में ये समझ न सका
इश्क करते हैं हम एक खुदगर्ज से
हम अंधरे में अब क्यूं न रहें
उजाले ही लगते जब बेदर्द से

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