शायरी – एक नजर देखकर सबकी नजर पढ़ लेते हो

ना गीत गाता अगर तो दर्द फिर किधर जाता

किसी पत्थर की तरह रहगुजर पे मर जाता

एक नजर देखकर सबकी नजर पढ़ लेते हो

काश मैं भी कभी तेरी नजर पढ़ पाता

कोरे कागज़ से कलम का कोई रिश्ता है

वरना शायद मैं ये गजल नहीं लिख पाता

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