how to write shayari

शायरी – कोई तू राह बता कैसे मैं बेवफाई करूँ

एक प्रेमिका अपने घर के लोगों के अहसानों तले दबकर जब उनकी मर्जी से किसी और का दामन थामने के लिए मजबूर होती है तो वो आशिक के सामने अपना दर्द बयां नहीं कर सकती कि उसके हालात कितने बुरे हैं और वो बेवफाई आखिर कैसे करे?

प्रेमिका ये महसूस करती है कि उसकी बेवफाई से उसके आशिक की जिंदगी बर्बाद हो सकती है जिसकी उसने आज तक इबादत की। वो कहती है कि मेरे लिए जो तू इतना रोता है, उन आंसुओं को देखने की सजा कैसे सहूं?

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वो कहती है कि उसकी राह में पत्थर की दरो-दीवारें हैं जिसमें वो कैद है और उसकी जंजीरों को वो तोड़ नहीं सकी इसलिए उसे जाना पड़ेगा। वो सारा इल्जाम अपने सर लेते हुए कह रही है कि मुझ पर जो अभी बीत रही है, उसे मैं किन लफ्जों में बताऊं?

ये गजल उन्हीं महबूबाओं के दर्द को आवाज देने के लिए लिखी गई है। इसमें एक प्रेमिका के दिल का वो दर्द है जिसको लेकर वो आशिक से जुदा होती है और दुनिया में उसे बेवफा कहा जाता है लेकिन क्या सच में बेवफा होती है…

इस मुहब्बत में तुमको मैं खुशी दे न सकी
कोई तू राह बता कैसे मैं बेवफाई करूँ
दर्द के शोलों को हवा दी हमने तेरे दिल में
इन गुनाहों से तोबा अब मैं कैसे करूँ

खता-ए-इश्क से बस तेरी इबादत की है
ऐसा लगता है तेरी ही शहादत दी है
तू जो रोता है इतना मेरे ख़यालों में
तेरे आँसू को देखने की सज़ा मैं कैसे सहूँ

तेरे हर जख़्म का इल्ज़ाम मेरे सर पे है
तेरे हर दाग का अहसास जिगर पे है
तेरे दामन में चुभे दर्द-ए-नश्तर की कसम
मुझपे जो बीत रही है, उसे मैं कैसे कहूँ

ऐ मेरे इश्क, मेरे हुस्न पे मरनेवाले
ओ दीवाने मेरी याद में जलनेवाले
मेरी राहों में पत्थर की दीवारें हैं
इन दीवारों के अहसानों को मैं कैसे तोड़ूँ

©RajeevSingh

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