शायरी – किसी के दर्द पे अक्सर लोगों को हंसते देखा है

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किसी के दर्द पे अक्सर लोगों को हंसते देखा है
जब अपने पे आती है तो उसी को रोते देखा है

अपनों की मुसीबत में अपने भी भाग जाते हैं
अपनों को अपनों से ही दामन छुड़ाते देखा है

दौलत के सिवा दुनिया का रहनुमा कोई नहीं
फरिश्तों को भी राहों पर भीख मांगते देखा है

जिस बदकिस्मत को सब पत्थर मारा करते थे
किस्मत पलटी तो उसी पे फूल फेंकते देखा है

©राजीव सिंह शायरी

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