शायरी – तेरी आंखों की उदासी समझती हूं मैं

जख्म पे जख्म दिल पे लिए जाते हो

ये कैसी दवा तुम खुद से पीए जाते हो

 

बुझती जा रही शमा तेरे महफिल में

और तुम जलने की फितरत ठुकराते हो

 

मैंने दुनिया में सबको जीते हुए देखा है

एक तुम ही हो जो जीवन से घबराते हो

 

तेरी आंखों की उदासी समझती हूं मैं

यूं नजरें चुराके क्यूं हमसे कतराते हो

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.