शायरी – तेरी नजर पड़ी, दरिया हुई शराब

उगने लगा है चाँद, आया चिरागे-रात

पीने लगी है रूह, ये नूर की शराब

 

दरिया को देख लो पानी थी अब तलक

तेरी नजर पड़ी, दरिया हुई शराब

 

शीशा-ए-जिस्म में है सुर्ख सी नमी

बाहों में भर लिया हमने हसीं शराब

 

तुमपे गजल लिखी, रिंदो ने जब पढ़ी

कहने लगे कि अब हम क्या पीएँ शराब

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