गुलजार खान का प्यार के नाम पैगाम – love letter by gulzar khan

तुमको नहीं भुला पा रहा हूं यार। तुम कभी समझ ही नहीं पाई कि कितना प्यार करता हूं तुमसे। आखिर क्यूं तुमने छोड़ दिया मुझे। क्या गलती थी मेरी।

gulzar love letter

सब सच कहते हैं कि हद में रहकर प्यार करना चाहिए। जो हद से ज्यादा प्यार करता है, उसको उसका प्यार नहीं मिलता।

तुम ये तो सोच ही सकती हो कि तुम्हारे बिना मेरा क्या हाल होगा या मैंने अपना क्या हाल बना लिया होगा। याद आती है वो तुम्हारी शुरू शुरू की बातें। कितना प्यार जताती थी तुम मुझ पर।

हर समय बात करते रहना। वो तुम्हारा नाराज होना और फिर खुद फोन करके सॉरी बोलके कहना कि गुस्से में मैं किसी से बात नहीं करती।

कुछ भी नहीं भुला पा रहा हूं मैं। तुम पास थी तो हर काम समय पर होता था। अब सोना जगना कुछ भी टाइम पर नहीं होता। तुम कसम देकर खाना खिला देती थी और अब तो खाना खाने का भी मन नहीं करता।

क्यूं छोड़ कर गई तुम मुझे। पता है ना कि तुझसे जान से ज्यादा प्यार करता हूं। क्या तुमने एक बार भी नहीं सोचा मेरे बारे में, जो खुद को मुझसे छीन लिया। तेरे बिना पल पल मर रहा हूं लेकिन तुझे जबर्दस्ती पाना नहीं चाहता।

तू जिसके साथ भी है, खुश रह, मेरा प्यार जिसे चाहता है, वो उसे मिले। जा तुझे खुद से अलग कर दिया। तेरी खुशी के लिए ही तुझे छोड़ दिया।

—– तुम्हारा Gulźar Khan

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