झूठ की बुनियाद पर मेरी शादी हुई, तलाक तक कैसे पहुंची – दिव्या की रियल मैरिज स्टोरी

मेरा नाम दिव्या है। मैं मध्य प्रदेश की रहने वाली हूं। मेरी शादी मेरे घर वालों ने एक साल पहले कराई। जब उन्होंने मेरी शादी तय की तो उन्हें लड़के वालों ने ये बताया कि लड़का बिजनेस करता है। उनकी जो रेंटल प्रॉपर्टी है उसका रेंट चालीस पचास हजार रुपया हर महीने आता है। लड़के की तीन शॉप बताई गई थी।

divya marriage story
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लेकिन जब मैं वहां शादी के बाद पहुंची तो मुझे पता चला कि ये सब झूठ है। वो लड़का केवल रिचार्ज की दुकान करता है और उसके घर का रेंट केवल दस बारह हजार रुपये आता है। ये सब जानने के बाद मुझे बहुत बुरा लगा तो मैं बहुत उदास हो गई। मेरा मेरे पति से रिश्ता ठीक नहीं रहा। लेकिन फिर मैंने ये सब सोचकर एक्सेप्ट कर लिया कि आगे सब ठीक हो जायेगा। मैं भी जॉब कर लूंगी। इसी बीच मुझे अपने पति से भी प्यार हो गया।
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मैने उनके लिए सब स्वीकार कर लिया। लेकिन फिर मेरे पति मेरे घर वालों के बारे में हर वक्त कुछ न कुछ बुरा बोलते रहते थे। मेरे पापा के बारे में और मेरे भैया के बारे में। लास्ट टाइम जब मेरे भय्या मुझे लेने गये तो उन्होंने मुझसे कहा कि तुम्हारे भैया ने मेरे भाई और मेरी बहन के पैर नहीं छुए, तुम्हारे भैया आते ही नहीं तो अच्छा रहता। तो मैंने कहा कि ऐसा नहीं होता है। तो उन्होंने मुझसे कहा कि अगर पैर नहीं छुएंगे तो फिर तुम अकेले ही चली जाना और अकेले ही आ जाना। अगर वो पैर नहीं छुएंगे तो फिर यहां तुम्हारे घर वालों का सम्मान भी नहीं होगा। उनसे कोई बात भी नहीं करेगा।
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मैं भैया के साथ मायके आ गई। फिर मैंने सबकुछ अपने घर वालों को बताया तो मेरे भैया ने मेरे पति के भैया को बोला कि आप आ जाओ मुझे आपसे बात करनी है। लेकिन उनके भैया ने मना कर दिया और मैं वापस नहीं गई। फिर एक महीने बाद मेरे पति का फोन आया तो उन्होने कहा कि मैं तुम्हें लेने आ रहा हूं, तुम मेरे साथ आओगी या नहीं तो मैंने बोला कि आप भैया से बात कर लो तो मैं आपके साथ चलूंगी। लेकिन उन्होंने मेरे भैया को फोन करके कहा कि आखिरी बार दिव्या को लेने आ रहा हूं। अगर अपको भेजना है तो भेज देना। फिर जब ये बात मेरे घर वालों ने मुझे बताई तो मैंने जाने से मना कर दिया। दूसरे दिन जब वो आये तो उन्होंने मेरे घर का पानी भी नहीं पिया और चले गये।
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फिर तीन महीने तक हमारी कोई बात नही हुई। तीन महीने बाद उन्होने मुझे कॉल किया। हमारी बात फिर शुरू हो गई। फिर हमने दो महीने अच्छे से बात की और हमारे बीच की प्रॉब्लम सॉल्व हो गयी। फिर एक दिन उन्होंने मुझसे बोला कि दिव्या तुम अपने पापा-मम्मी को भेज दो, मै सबको बैठा कर बात करा देता हूं। मुझे भी लगा कि ये ठीक है। मैंने अपने पापा-मम्मी भैया, दीदी, जीजाजी को भेज दिया। लेकिन जब वो लोग गये तो मेरे पति बात करने भी नहीं आए और उनके भैया ने मेरे घर वालों को बोला कि आप सब निकलो यहां से। उन्होंने हमारे परिवार को अपमानित करने के लिए बुलाया था। बस उसके बाद हमारी बात नहीं हुई। इसके बाद मैंने पति से तलाक लेने का फैसला लिया।
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अब मेरा डाइवोर्स केस चल रहा है लेकिन वो कहते हैं कि वो मुझसे प्यार करते हैं और मेरे साथ रहना चाहते हैं। लेकिन वो मुझे ये भी कहते हैं कि तुम ईगो में ये सब कर रही हो। जबकि झगड़ा उन्होंने शुरू किया था। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मै क्या करूं। मुझे इसी 18 मई से पहले फैसला लेना है क्योंकि उस दिन कोर्ट में मुझे अपना डिसीजन देना है।

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