दुनिया से जाते-जाते भी उसने मेरी खुशी चाही, दिल का दर्द जगा देने वाली सच्ची प्रेम कहानी

मैं दिल्ली से रोहन हूं। मनीषा और मैं, दोनों साथ ही पढ़ते थे। आठवीं के बाद मैंने फील किया कि हम दोनों की बॉन्डिंग सही है। हम एक दूसरे की बहुत हेल्प करते थे। स्टडी करने में हेल्प करते करते एक दूसरे की काफी केयर करने लगे। हम दोनों 12वीं पास कर गए। उस समय फोन जैसी चीज नहीं थी तो दोस्ती की चिट्ठियां लिखा करते थे।

एक दिन मैंने उसे बुलाया और अपने मन में चल रही सारी बातें बता दीं। वो सिर्फ मुस्कुराई और चली गई। इसके बाद हम दोनों एक दूसरे को लव लेटर्स लिखने लगे। तब तक फोन भी आ गया। ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर चल रहा था लेकिन उसका सीपीएमटी क्लियर हो गया तो डॉक्टर बनने चली गई। हमारी बातें फोन पर होती रहीं। पॉकेट मनी के पैसे बचाकर कभी-कभी उससे मिलने भी चला जाता था।

rohan love story

हम दोनों एक-दूसरे की बातें मानते थे। हमने ये तय किया कि पढ़ाई के बाद हम शादी कर लेंगे। यही फैसला कर हम दोनों रिश्ते को आगे ले जा रहे थे। उसका एमबीबीएस चल रहा था और मैं एमबीए की पढ़ाई कर रहा था। हमने सोचा कि पहले जॉब खोजेंगे फिर शादी करेंगे और इसके लिए कम से कम डेढ़ साल रुकना बेहतर समझा। इसी बीच मेरा एक्सीडेंट हो गया और मैं पैरालाइसिस का शिकार हो गया।

मैं अपाहिज हो गया। अपने पैरों से चल नहीं सकता था फिर भी मेरा प्यार कम नहीं हुआ और उसका भी नहीं। मेरा करियर पूरी तरह से तबाह हो गया था। मैं ठीक हो जाऊं इसके लिए उसने बहुत मन्नतें मांगीं लेकिन मैं ठीक नहीं हो पाया। इस बीच खबर आई कि उसकी शादी फिक्स हो गई है। उसकी मां ने मुझे फोन कर कहा कि इसे ले जाओ वरना ये मर जाएगी। उसके पापा को हमारे रिश्ते के बारे में मालूम था लेकिन वो तैयार नहीं थे। उसकी शादी जबर्दस्ती की जा रही थी। लड़का यूएसए में इंजीनियर था।

मैं भी सोचने लगा कि मैं उसके लिए क्या कर सकता हूं, लाचार हूं, सिवाय प्यार के उसे कुछ भी दे पाने में सक्षम नहीं और सिर्फ प्यार से घर नहीं चलता है। उसके बारे में सोचकर लगा कि मेरे साथ उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। वो मेरा साथ चाहती थी और कहती थी कि मैं तुम्हारा ट्रीटमेंट खुद कराऊंगी, अच्छे से अच्छे डॉक्टर से कंसल्ट करूंगी फिर भी मैं शादी के लिए राजी नहीं हुआ। वो बहुत रोती थी। उसने कहा कि हम भागकर शादी कर लेंगे फिर मैंने उसे समझाया कि देखो, मेरे साथ रहकर तुम्हारी जिंदगी खराब होगी, मैं कभी खुश नहीं रख पाऊंगा।

मैंने उससे कहा कि उस प्यार का क्या मतलब कि जिंदगीभर तुमको मेरा बोझ उठाना पड़े और मैं ये बिल्कुल नहीं चाहता हूं। फिर उसे दुनिया समाज का वास्ता दिया कि अब अगर ना बोलोगी तो तुम्हारे मम्मी पापा को लोग क्या कहेंगे, उनकी रिस्पेक्ट है इतनी, उसका क्या होगा? फिर भी वो नहीं मानी तो मैंने कहा कि तुम अगर शादी नहीं करोगी तो मैं खुद को गोली मार लूंगा, मुझे सारी तकलीफों से छुट्टी मिल जाएगी। इसके बाद वो राजी हुई।

शादी के पांच दिन बाद वो यूएसए चली गई। सातवें दिन उसने अमेरिका से मुझे रात में लगभग 2 बजे फोन किया। मैं एक पल के लिए तो उसकी आवाज सुनकर खुश हुआ लेकिन उससे कहा कि आगे से कभी फोन मत करना। उधर से उसने कहा कि मैंने नहीं, मेरे पति ने फोन कराया है, लो ये बात करेंगे। उधर से उसके पति ने इधर-उधर की बात की और कहने लगा कि तुमने इसके साथ फिजिकल रिलेशन तो नहीं बनाया।

मैंने उसके पति से कहा, कैसे इंसान हो तुम, ये सब कभी दिमाग में चला ही नहीं, हम तो शादी करना चाहते थे। फिर उधर से उसके पति ने कहा कि मर्द हो न तुम। मैंने कहा, हां हूं लेकिन कुछ भी होता तो वो शादी के बाद ही होता। इसके बाद उसने फोन रख दिया। बाद में पता चला कि वो मेरे बारे में जानने के बाद मनीषा को वर्जिनिटी टेस्ट के लिए डॉक्टर के पास ले गया था। तीन महीने बाद पता चला कि उसका पति ड्रग्स लेता था।

उसका पति पैसे वाले घर से था और बिगड़ैल औलाद था। उसकी इंजीनियरिंग की डिग्री भी कंप्लीट नहीं हुई थी कि उसके घरवालों ने उसकी शादी झूठ बोलकर करा दी। यह सब देख-देखकर मनीषा ऊब चुकी थी। उसने इंडिया आने का फैसला किया। उसने वहां पुलिस की हेल्प ली और तो उसका पति कहने लगा कि चलो, मैं नशा छोड़ दूंगा, मैं भी तुम्हारे साथ इंडिया चलूंगा। मनीषा ने पुलिस कंप्लेंट वापस ली और पति के साथ इंडिया आ गई।

यहां एक सप्ताह बाद उसका पति फिर उसके साथ बुरा बर्ताव करने लगा। उसे घर में बंद रखने लगा। जानवरों सा सलूक करता था। फिर पता चला कि वो प्रेग्नेंट थी, उसके डैडी उसे घर ले आए थे। उससे मेरी बात नहीं हो पाती थी। इस बीच मेरे पैरों में थोड़ी-थोड़ी जान लौटी थी और मैं कोशिश करके चलने लगा था। उसने फोन किया तो मेरी उससे बात हुई। पता चला कि उसको बेटी हुई है। उसके ससुराल वाले उसको राजी कर वापस ले गए और वहां कुछ दिन बाद फिर उस पर जुल्म शुरू हो गए।

मनीषा के मां-बाप कुछ नहीं बोल पाते थे। फिर उसने एक दिन मुझे कॉल किया और कहा कि मिलना चाहती हूं। मैं उससे मिलने चला गया। काफी समय बाद उसे देखा तो वो बिल्कुल बदल गई थी। उसके चेहरे पर कोई रौनक नहीं बची थी। मैं उसे देखकर रो पड़ा। उसने जाते-जाते कहा कि अब तुमसे कभी नहीं मिल पाऊंगी। उसको लंग कैंसर हो गया था। हॉस्पिटल से ही फिर उसका कॉल आया था। वो बोली, ‘कहा था न कि तुम्हारे बिना ये जिंदगी मुझे रास नहीं आएगी, अपना ख्याल रखना, जिंदगी में आगे बढ़ जाना, जैसे मैं बढ़ी।’

खबर आई कि वो नहीं रही। मैं बहुत रोया, चिल्लाया। मेरी मां बहन ने किसी तरह मुझे संभाला। सब बोलते हैं कि शादी कर लो और मेरे पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं होता। अगर मैं शादी कर भी लेता हूं तो उसकी जगह किसी और को नहीं दे सकता और फिर अगर नहीं दे सकता तो किसी और की जिंदगी मैं क्यों बर्बाद करूं? या फिर समझौता करने को ही जिंदगी कहते हैं तो क्या करूं, कुछ समझ में नहीं आता।

मैं खुद भी कमाता हूं। मेरा बिजनेस है। फैमिली शादी के लिए प्रेशर डाल रही है। जितने भी आसपास के लोग हैं, उनका भी यही सवाल रहता है कि शादी कब कर रहे हो, उन्हें कैसे बताऊं और कैसे समझाऊं कि मैं क्या चाहता हूं?

मैं अभी 29 साल का हूं। 19 महीने पहले मनीषा इस दुनिया से चली गई। तबसे रोज उसकी रिकॉर्डेड आवाज सुनकर ही सोने की कोशिश करता हूं। नींद आंखों से दूर ही रहती है। गुस्सा भी बहुत आता है। मैं लोगों के मैरिज फोबिया का जवाब नहीं दे पाता, इन चीजों से मैं कैसे बाहर आऊं? घरवालों और लोगों के सवालों का क्या जवाब दूं और क्या शादी करना ठीक रहेगा?

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