shaan love story

डर यही है कि उसको पाने की कोशिश में अपने परिवार को न खो दूं- शान की लव स्टोरी

मैं शान हूं। इलाहाबाद से हूं, सऊदी अरब में नौकरी करता हूं। 23 मार्च 2013 में एक मैरिज हॉल में गया, वहां पर सब लोग खाने में बिजी थी। मैं लोगों को खिला रहा था कि वहां दूर एक लड़की खड़ी थी जो लाइट ग्रीन ड्रेस में बहुत खूबसूरत लग रही थी। मेरी नजर थोड़ी-थोड़ी देर में उसकी तरफ जाती। कुछ देर बाद वो वहां से चली गई और मैं उसको खोजने लगा।

मैं उसको दुबारा देखने के लिए परेशान होने लगा। मैंने किसी तरह से उसका नंबर पता किया और उसको कॉल लगाया। पहली बार तो मैंने रॉन्ग नंबर कहकर कॉल काट दिया लेकिन दूसरे दिन फिर कॉल किया और कहा कि तुमसे बात करना चाहता हूं तो इस बार उसने कॉल काट दिया।
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मैं मायूस हो गय, फिर मैंने एसएमएस करना चालू कर दिया। जो बात मैं कॉल पर नहीं बोल पाया था, वो बात लिखकर बोल दिया। फिर मेरे मैसेज का रिप्लाई भी आने लगा। उसे भी बात करना अच्छा लगने लगा क्योंकि मैंने दोस्ती का हाथ बढ़ाया था। एक ही हफ्ते गुजरे थे कि दोस्ती इतनी गहरी हो गई कि बिना बात किए रह नहीं पाते थे।

ये दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता ही नहीं चला क्योंकि हम दोनों एक दूसरे की बहुत ज्यादा केयर करने लगे थे। बातें करते-करते कब रात हो जाती थी, पता ही नहीं चलता था। फिर उसने कहा कि कभी मुझे भूल तो नहीं जाओगे। मैंने ये वादा किया कि जिंदगीभर साथ निभाऊंगा।

हमारा प्यार बहुत आगे जा चुका था। मैं दुबई में रहता हूं तो वहां से तीन महीने की छुट्टी लेकर आया। मैं जब जाने लगा तो वो बहुत रोई पर मैंने कहा कि जल्दी वापस आकर तुम्हारा हाथ मांगूंगा। मैं जब जा रहा था तो ऐसा लग रहा था कि मैं जिस्म तो ले जा रहा हूं पर जान यहीं छोड़कर जा रहा हूं।

सऊदी पहुंचने के बाद रोजाना हमारी बातें होने लगी। हम बहुत खुश थे पर हमें ये नहीं पता था कि इन खुशियों को आग लग सकती है क्योंकि हमारा कास्ट एक नहीं था। एक साल गुजरे थे कि उसकी मम्मी ने उसे बात करते देख लिया और पूछा तो उसने सब बता दिया। इधर मैंने भी अपने घरवालों को उसकी तस्वीर दिखा दी थी।

फिर वो मेरे घर पर भी बात करने लगी थी। बहुत खुश थी पर उसके घरवाले हमारे रिश्ते से खुश नहीं थे। उसकी मां ने बहुत समझाया पर वो नहीं मानी। फिर मैंने भी उसकी मां को समझाया तो उनका जवाब था कि बेटा ये शादी नहीं हो सकती क्योंकि इसके पापा नहीं मानेंगे, तुम अपनी शादी कहीं और कर लो, तुमको इससे भी अच्छी लड़की मिल जाएगी।

मैंने कहा कि मम्मी मुझे अब अच्छी की तलाश नहीं है, फिर मम्मी ने कहा कि इसकी पढ़ाई चल रही है अभी, बहुत टाइम है इसकी शादी में। मैंने कहा कि मैं वेट करुंगा। फिर मम्मी कुछ नहीं बोली, वो भी चाहती थी पर अपने पापा से डरती थी। कुछ दिन बाद उसके भाई को पता चल गया जो घर से बहुत दूर रहता था।

भाई ने उसको बहुत डांटा और धमकी दी कि ये शादी नहीं हो सकती और वो डर से चुपचाप सुनती रही। मेरे पास कॉल करके बस रोती रही कि हम मिले ही क्यों थे जब मिल नहीं सकते। मैंने कहा कि बस वक्त का इंतजार करो, सब ठीक हो जाएगा। आज दो साल गुजरने वाले हैं, मैं कुछ ही दिनों में दुबारा उसके करीब जाऊंगा, उसे देखने की खुशी तो मैं बता नहीं सकता।

बहुत सारे सपने हैं, बस उसी के बारे में सोचता रहता हूं पर एक कोने में डर ने अपना घर बना लिया है कि अगर हम नहीं मिले तो क्या होगा, क्या उसके बगैर जी पाएंगे एक पल भी।अगर पता चल जाए कि हम एक नहीं हो सकते तो शायद एक पल भी काटना मुश्किल हो जाएगा। बस दिन रात दुआओं में उसे ही मांगता हूं कि उसके साथ जितने सपने सजाए हैं, उन सपनों को पूरा करना है। अगर वो ना मिल सकी तो खुद की जिंदगी से नफरत हो जाएगी।

डर बस इसी बात का है कि उसके घरवाले नहीं माने तो क्या होगा क्योंकि हम कोई गलत कदम नहीं उठाना चाहते हैं। सिर्फ अपनी ही खुशी हम नहीं चाहते। हम अपनी फैमिली की भी खुशी चाहते हैं। अपनी वजह से उनका सिर शर्म से नहीं झुकाना चाहते। रिश्तों को जोड़ना है, तोड़ना नहीं क्योंकि वो मुझे, मैं उसे तो पा लूंगा, पर सबको खो दूंगा, जिसने पाला पोसा बड़ा किया वो मां बाप और जिसके साथ खेला कूदा, वो भाई बहन। सब रिश्तों को कैसे तोड़ कर जा सकते है सिर्फ अपनी खुशी के लिए- ये हम दोनों का फैसला है। नहीं तो शादी कर लेना इतना मुश्किल नहीं था।

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