jahnavi real life story

जन्म से अब तक बस दर्द ही पाया है, जाह्नवी की जिंदगी और प्यार

मैं एमपी से जाह्नवी हूं। मैंने जन्म से अब तक बस दर्द ही पाया है। बेटी क्या होती है, उसकी कीमत चुकाती आ रही हूं। बचपन क्या होता है पता ही नहीं है मुझे और जवानी को कैसे जीते हैं, ये मैं जानती ही नहीं। मेरे पापा मुझे कभी बेटी का प्यार नहीं दे पाए, उनके लिए मैं बस एक बोझ थी जिससे किसी भी तरह पीछा छुड़ाया जाए। कभी मुझे आजादी से जिंदगी जीने नहीं दिया, हमेशा मारपीट करते थे।

छोटी-छोटी चीजों के लिए मैंने खुद को तरसते हुए देखा है। किसी से थोड़ा प्यार मिले, बस यही चाहती थी। सोचती थी कि बड़ी होकर पापा की शिकायत दूर कर दूंगी पर ऐसा नहीं हुआ। छोटी ही उम्र में पापा ने मेरी शादी कर दी। मेरा पति मुझसे 9 साल बड़ा था। वहीं से मेरे बुरे दिन शुरू हो गए। मैं हमेशा सोचती थी कि ऐसा काम करुंगी कि जिसमें मेरा नाम हो, जिससे मेरे पापा को मुझ पर गर्व हो, मैं एयर होस्टेस बनना चाहती थी, सुंदर थी…बहुत सारी हॉबीज थी मेरी लेकिन जब 18 साल की उम्र में शादी हुई तो सब खत्म हो गया।

jahnavi real life story

मेरा पति मेरी जिंदगी को नर्क बनाने के लिए जिंदगी में आया। पति से उम्र में अंतर की वजह से उसने कभी मुझे समझा ही नहीं और ऊपर से वो पीता था। मुझे 18 साल की उम्र में शादी का मतलब तक पता नहीं था। उस समय मैं बी कॉम फर्स्ट ईयर में थी। मेरी पढ़ाई छूट गई और शादी के बाद मैं एक जिंदा लाश हो गई। मैं दुखभरी जिंदगी जीती गई, और मैं करती भी क्या। मेरा पति आता और अपनी हवस पूरी करता, मारता पीटता और उसको कुछ भी मतलब नहीं था। मैं दिनभर ससुराल में घरवालों के अत्याचार सहती फिर रात में उसका। मेरी जिंदगी ऐसी ही चल रही थी।

तीन महीने बाद पति थोड़ा नरम बिहेव करने लगा तो लगा कि जैसे उसको मुझसे प्यार हो रहा है लेकिन सब छलावा था। वो किसी और लड़की से प्यार करता था। उसके छोटे भाई ने भी मेरे साथ रेप की कोशिश की थी। मैंने इस बारे में ससुराल में बताया तो सुनने को मिला कि बड़े की चीज पर छोटे का हक है। मैं यह बात सुनकर डर गई और पति आए तो उनसे बोली तो उन्होंने भी घरवालों का साथ दिया। मैं यह सब देखकर हैरान थी। मैं मायके नहीं लौट सकती थी क्योंकि वहां पापा मुझे रखना नहीं चाहते थे।

मैं सदमे से भरी जिंदगी जीने लगी। ये सब होते-होते दो साल बीत गए। मैं बहुत बीमार रहने लगी। एक महीने तक एडमिट रही। जिस दिन हॉस्पिटल से घर लौटी उस दिन मम्मी भी साथ थी। उसी रात को मेरे पति ने शराब पीकर मुझे पीटने की कोशिश की और जैसे ही उसने मेरी मां पर हाथ उठाया तो मैं यह देख नहीं पाई और पता नहीं कहां से मुझमें हिम्मत आ गई। मम्मी के साथ मैं वहां निकल गई और पुलिस स्टेशन पहुंच गई। थाने में मेरे ससुराल वालों ने पैसा देकर मामले को दबा दिया। पुलिस बिक गई और मैं मां के साथ घर आ गई।

मेरा ससुराल नर्क था तो मेरा मायके उससे बुरा नर्क था। मेरे पापा ने मेरा साथ नहीं दिया। मैं खुद अपनी लड़ाई लड़ रही हूं पर मेरी लाइफ ने मुझे कोई मौका ही नहीं दिया। मैं मायके में रहते हुए फेसबुक यूज करने लगी तो यहां एक लड़के से मेरी दोस्ती हुई जिसे मैं डॉक्टर साब कहती थी। बात करते-करते एक दिन उसने प्रपोज कर दिया। मैं अकेली थी और मुझे भी प्यार की जरूरत थी तो मैं भी कहीं न कहीं चाहती थी कि मैं भी प्यार करूं लेकिन अपनी हकीकत जानकर आगे बढ़ नहीं पा रही थी।

उसने आमने-सामने मिलने की जिद की तो मैंने सोचा कि सब बता दूंगी। जब 28 अक्टूबर 2014 को वह मिलने दिल्ली से एमपी मेरे शहर आया तो मैंने उसे अपने बारे में सबकुछ बता दिया कि मैं शादीशुदा हूं। वहां मुझे पता चला कि वह भी शादीशुदा थाा और दो बच्चों का बाप था। मैंने उससे कहा कि तुम अपनी लाइफ एंज्वाई करो। वो जब लौटकर गया तो मैंने सोच लिया कि अब उससे बात नहीं करूंगी। मुझे भी एक तरफ लग रहा था कि मैं पति से बेवफाई कर रही हूं, उसे धोखा दे रही हूं।

मेरा पति से कोर्ट केस चल रहा था और उधर डॉक्टर साब ने मुझे फोन कर कहा कि पत्नी से वो तलाक ले रहा है। मैं भी प्यार के लिए तरस रही थी तो सोचा कि जो मिल रहा है उसे लेकर आगे बढ़ूं। बाद में मुझे पता चला कि डॉक्टर साब तो लड़कियों को यूज करने के लिए झूठ बोलते थे। डॉक्टर साब की पत्नी से मेरी बात हुई तो उसने कहा कि ये मुझे अपनी चचेरी बहन बताते हैं और कई लड़कियों के साथ डेट करते हैं, इसलिए तलाक की नौबत आ गई।

मेरी किस्मत ये किस मोड़ पर ले आई मुझे..बोलूं तो किसे और क्या कहूं…सब लोगों को तो लड़कियां ही गलत लगती हैं और उनको ही गंदा कहा जाता है। आज मेरी शादी को 10 साल बीत चुके हैं और मैं इंसाफ के लिए कोर्ट के चक्कर लगाते-लगाते थक चुकी पर क्या मिल रहा है मुझे। कुछ भी नहीं। मैंने तलाक का केस लगा दिया है और न्याय नहीं मिला तो अब खुद की आजादी चाहती हूं। आजादी ही सही, कुछ तो मिले जिससे मैं जी सकूं खुद के लिए, लेकिन अब मेरे पति को मेरी याद आ रही है और मुझे फोन कर कहता है कि आ जाओ लेकिन उसकी लड़कियों के प्रति सोच आज भी वैसी ही है और पैसों का घमंड भी उतना ही है।

30 साल की हो गई हूं। 2007 से 2017 के बीच सहते-सहते अब मानसिक रूप से पागल हो रही हूं। ऐसा लगता है कि पागल हो चुकी हूं। बिना बात के गुस्सा आता है, ऊपर से किसी का साथ नहीं, प्यार नहीं। कहां किस किससे लड़ूं और कब तक अकेले रहूं। 30 सालों की जिंदगी को मैं किसी तरह से आप सबसे कह पाई हूं, मुझे बस एक अच्छी सी सलाह की जरूरत है। मेरा एक और सवाल है लोगों से कि..हमें लड़की होने की सजा आखिर कब तक मिलती रहेगी?

Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published.

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.