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पुलिस ने कहा, तेरा आशिक चोरी करने आया होगा, नेहा की स्टोरी

मैं नेहा दिल्ली से हूं। मुझे एक सवाल पूछना है, इंडिया के सभी पुलिस से कि अगर कहीं पर कोई वारदात होती है तो शुरू में तो पुलिस बहुत से इ़धर-उधर के सवाल करती है जैसे चुटकी में अपराधी को पकड़ लेगी लेकिन एफआईआर लिखने के बाद इतना धीरे काम करती है जैसे कोई फर्क ही नही पड़ता।

मेरे घर में चोरी हुई। रात 2:30 बजे चोर ने मेरे घर से 5 मोबाइल और 1 लैपटॉप चुराया। उसके बाद चोर ने मझे अकेला देखकर गलत फायदा उठाने की कोशिश की तो मेरी चोर से हाथापाई हुई और जब मैंने जोर से आवाज लगाई तो चोर भाग गया। बहुत मुश्किल से मैंने खुद को उससे बचाया। उसके हाथ में चाकू और ब्लेड भी था।

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फिर मैंने पापा को जगाया, गली में भी सब जाग गये। इतना सब होने के बाद पापा ने पुलिस को रात 3 बजे पुलिस को फोन लगाया तो पुलिस ने कहा कि सुबह 7 बजे पुलिस स्टेशन आ जाना और फोन काट दिया। फिर पापा ने गुस्से से दोबारा फोन लगाया तब जाकर पुलिस घर आई। घर आने के बाद जब पुलिस को मैंने सारी बात बताई तो पुलिस उल्टा मुझपर इल्जाम लगाती है कि तेरा ही कोई आशिक होगा।

बार-बार मुझ पर इल्जाम लगाकर पुलिस बोली कि तेरा ही कोई आशिक चोरी करने आया होगा। अभी भी वक्त है बता दे और जब मैंने कहा की ऐसा कुछ नहीं है, आप खुद पता करो चोर का, शायद आसपास का ही है तो कहती है बेटा, कार्रवाई करना हमारा काम है। फिर उन्होंने एफआईआर कराने को कहा। ऑनलाइन एफआईआर कराना था लेकिन उनका सर्वर काम नहीं कर रहा था इसलिये केस पूरे एक हफ्ते बाद हुआ।

उसके बाद भी पुलिस ने कुछ नहीं किया। हर कोई मुझसे यही कह रहा था कि पुलिस खुद चोरों से मिली होती है, वो कुछ नहीं करेगी, अगर हम कोई वीआईपी होते तो शायद कोई एक्शन लेती। पूरा एक महीने तक पुलिस के चक्कर काटने के बाद जब पापा ने अपने ऑफिस के बॉस के रेफरेंस से मदद ली तब जाकर पुलिस ने सभी मोबाइल और लैपटॉप का बिल मांगा। उसके बाद भी अभी तक कुछ पता नही चला।

मेरा बस यही सवाल है कि क्या क्राइम पेट्रोल और सावधान इंडिया में जो कुछ पुलिस के बारे में दिेखाया जाता है कि किस तरह से पुलिस ने अपराधी को पकड़ा, वो सब झूठ होता है क्या?? और अगर सच होता है तो इसका मतलब पुलिस वही पर अपना काम ठीक से करती है जहां मीडिया की नजर होती है ताकि अपराधी पकड़ कर मीडिया को दिखा सके, या पुलिस सिर्फ अमीर और VIP लोगों के लिये होती है?

अकसर यही कहा जाता है कि छोटी-मोटी चोरी पर पुलिस कुछ नहीं करती लेकिन जिसके घर में चोरी होती है ये तो वही जानता है कि उस पर क्या बीतती है और इसी तरह की चोरी के बाद चोर बड़ा डाका डालते हैं। अब तो पुलिस पर बिलकुल भी भरोसा नहीं रहा। एक आम इंसान का पुलिस पर भरोसा करने का मतलब रेगिस्तान में पानी ढूंढने के बराबर है। जब ऐसे पुलिस और न्याय करने वाले लोग कुछ नहीं करते हैं तब जाकर आम इंसान मजबूर हो जाता है। खुद से सबूत मिटाने के बाद कहते है कि चोर का कोई सुराग नही मिला! लानत है ऐसे पुलिस पर जो पावर होने के बावजूद कुछ नहीं करती…

पेज रीडर्स की बात

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