शादी तय हो गई लेकिन लड़कीवाले दोनों को बात ही नहीं करने दे रहे

बड़े सरकारी अफसर बने मेरे एक मित्र की शादी हाल में तय हुई है। उनके लिए रिश्ते तो कई आए। कई लड़कियां सरकारी जॉब करती थीं लेकिन मित्र ने सोचा कि मैं तो कमाता ही हूं इसलिए पढ़ी-लिखी लड़की से ही शादी कर लूं तो उन्होंने एमएससी बीएड कर चुकी लड़की की फोटो देखकर घरवालों को हां कह दिया।

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व्यावहारिक लेन-देन यानी दहेज की रुपए देने के बाद लड़के-लड़की की शादी की डेट फिक्स कर दी गई। अब जब सबकुछ तय हो गया तब जाकर लड़के के मन में लड़की से बात करने की इच्छा जागी। लड़की के भाई से कहा, मुझे बात करनी है। लड़की के भाई ने साफ मना कर दिया, कहा कि हमारे यहां ऐसे खराब संस्कार नहीं हैं कि बेटी शादी से पहले होने वाले पति से बात करे।

अब जब मित्र ने यह बात सुनी तो उनको बुरी लगी कि जमाना कहां से कहां आ गया और इनको संस्कार की पड़ी है। शादी फिक्स होने के बाद भी बात नहीं करने दी जा रही। इसके बाद दोस्तों और रिश्तेदारों ने भी पूछना शुरू किया कि लड़की से बात हो रही कि नहीं। जब उनको पता चला तो कहने लगे कि कैसे पिछड़े घर में शादी तय कर ली, जहां अभी तक ये हाल है।

मित्र ने मुझसे पूछा कि मैं क्या करूं, लड़की से कैसे बात हो तो मैंने भी हाथ खड़े कर दिए क्योंकि मुझे भी कुछ सूझा नहीं। अब सोचिए आज भी इतने पढ़े-लिखे लोग अपनी शादी का फैसला खुद नहीं कर पा रहे हैं और शादी से पहले न ही इनको एक-दूसरे से बात करने दिया जा रहा है जबकि लड़का बड़ा अफसर है और लड़की उच्च शिक्षा प्राप्त…

शादी के लिए लड़की ने ये सोचकर हां किया होगा कि चलो, लड़का अफसर है तो काबिल है। लड़के ने फोटो और पढ़ाई देखकर हां की होगी। लेकिन समाज के इतने एंपावर्ड यानी सशक्त हुए लड़के-लड़की में इतनी ताकत नहीं कि वो शादी फिक्स होने के बाद दो बात कर लें…क्योंकि घरवालों को डर है कि बात के दौरान कहीं किसी बात को लेकर शादी टूट न जाए।

हमारे मित्र के लिए आपके पास कोई सुझाव हो या कोई रास्ता हो तो प्लीज शेयर करें।

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