poem for love

Love poem by rajeev

भूख लगती है तो पहले पूछता हूं
उस तस्वीर से, तुमने खाया कि नहीं

मैं और तुम्हारी तस्वीर का ये मंजर
कितना अजीब है देखो जानेमन
तुम मेरे बहुत करीब वजूद में हो मगर
फिर भी अधूरा सा महसूस करता हूं
एक दर्द का अहसास हमेशा करता हूं

तेरी तस्वीर दिल में और तुम सामने होगी
तभी ये इश्क और जिंदगी मुकम्मल होगी।

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