Category Archives: लव स्टोरी

यादगार लव स्टोरी का अंत हमेशा दुखद रहा है। कुछ प्रेमी जोड़े ऐसे भी हुए जिन्होंने समाज की कुरीतियों की परवाह न करते हुए इस कदर प्रेम किया कि उनकी मौत भी एक मिसाल बन गई।

सात साल बाद फिर उसको मेरी प्रेम कहानी याद आई

फेसबुक पर मैंने अपने बेटे की फोटो डाली ही थी कि अचानक कमेंट बॉक्स में किसी ने कुछ ऐसा लिखा जिसे देखकर मैं चौंक गया। किसी निम्मी शर्मा ने लिखा – ‘बहुत खूबसूरत है तुम्हारा बेटा’। निम्मी नाम तो जाना पहचाना सा लग रहा था लेकिन दुनिया में न जाने कितनी निम्मियां हैं, पता नहीं कौन है? लेकिन निम्मी नाम से मेरा पुराना नाता था। मैंने उस दिन इस बारे में ज्यादा नहीं सोचा।

बात आई गई हो गई। लेकिन अगले दिन जब मैंने अपनी फोटो फेसबुक पर डाली तो फिर उसी का कमेंट आया- ‘कैसे हो तुम – निम्मी रानी’। उसने अपना असली नाम लिख दिया था। निम्मी रानी शादी के बाद निम्मी शर्मा हो गई थी। अचानक पुराने जख्म उभर आए। सर भारी होने लगा। दिल पर बोझ सा बढ़ने लगा। ओह ये तो वही निम्मी है लेकिन शादी के सात साल बाद अचानक इसको क्या हो गया। मैंने झट से कमेंट डिलीट किया ताकि मेरी बीवी और रिश्तेदार न देख ले। बीवी देख लेगी तो मेरा तो जीना ही मुश्किल कर देगी।

हालांकि सात साल पहले मैंने जब शादी की थी तब अपनी बीवी को निम्मी के बारे में बता दिया था। अगर न बताता तो भी वो जान ही जाती। मेरे सारे रिश्तेदार निम्मी के बारे में सबकुछ जानते हैं। वो जानते हैं कि निम्मी से दस सालों तक मैंने किस तरह टूटकर प्यार किया। मेरी निम्मी के बीच दोस्ती और झगड़ों का हर वाकया उनको मालूम है। लेकिन निम्मी ने आखिरकार किसी और शादी कर ली। उसे क्या चाहिए था ये मैं नहीं जानता। उसने मुझे क्यों छोड़ दिया, ये भी मैं नहीं जानता। मैंने उसे मनाने की लाखों बार कोशिश की लेकिन हार गया। उसने शादी कर ली तो उसके बाद मैंने भी घर बसा लिया। और चारा ही क्या था? उसके पीछे कहां तक भागता? शायद थक चुका था।

शादी के बाद मेरी दीवानगी की बातें मेरी बीवी तक बात पहुंचती, उससे पहले ही मैंने निम्मी से प्रेम की बात उसे बता डाली। ये भी यकीन दिलाने की कोशिश की कि मैं अब उससे प्यार नहीं करता लेकिन उसे यकीन नहीं हुआ। और इसका खामियाजा मैं सात साल से भुगत रहा हूं। मेरी बीवी को हमेशा शक रहता है कि कहीं मैं किसी के प्रेम में न पड़ जाऊं, कहीं फिर से निम्मी के पास न चला जाऊं। बहुत समझाता हूं मगर फिर उसके दिमाग में यही बात घूमने लगती है। निम्मी, निम्मी।

और क्या मैं निम्मी को भूल चुका हूं? इस सवाल का जवाब मेरे पास भी नहीं है। सात साल बाद अचानक फेसबुक पर निम्मी का कमेंट देख मैं सकते में आ गया। अब क्या किया जाय? ये मेरा बसाया घर उजाड़ देगी। इसने दस सालों तक मुझे तबाह ओ बरबाद किया। गुस्से में मैं सोचने लगा। सोचा कि उससे मिलूं और कहूं कि अब बरबाद करने को बचा क्या है जो फिर से मेरा हाल पूछ रही है।

इन सात सालों में निम्मी एक बेटा और एक बेटी की मां बन चुकी है। मैं भी एक बेटा बेटी का बाप। दोनों का अपना अपना घर है, अपना अपना शहर है। हां कभी हम एक शहर में रहते थे। बहुत सालों तक रहे। प्यार किया। लेकिन शादी के सात साल बाद फिर उस प्यार को याद करके मैं डर गया। सोचा उसके फेसबुक प्रोफाइल को ब्लॉक कर दूं। लेकिन कर न सका।

शायद निम्मी आज अकेली है। पति से शायद उसे प्यार नहीं मिल रहा या कुछ और वजह। मैं वजहों को खोजने के बहाने निम्मी के बारे में सोच रहा हूं। एक ठहरे हुए पानी में उसने कंकड़ मार दिया था। इस निम्मी का क्या करूं? सोचता हूं कि एक बार मिल कर समझाऊंगा। उसको बताऊंगा कि फेसबुक पर इस तरह लिखने से मेरी जिंदगी तबाह हो सकती है। उसके पति को पता चलेगा तो वो भी बरबाद हो जाएगी। और मैं किसी भी हालात में निम्मी का नुकसान नहीं चाहता। सात साल पहले जब उसने मुझे ठुकराया था तब भी यही सोचा था कि शायद इसी में उसका भला हो।

मैं ये सब सोच ही रहा था कि मेरी बीवी आकर पूछने लगी – किसी निम्मी शर्मा ने मुझे फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा है…..।

(ये कहानी नहीं…सच्ची घटना है…सिर्फ पात्रों के नाम बदल दिए गए हैं। अगर आपके पास भी कोई ऐसी घटना हो तो admin@jazbat.com पर हमें लिख भेजें।)

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हीर रांझा – 2 – रांझे के खिलाफ भाइयों की साजिश

रांझा के सभी भाई मिलकर जमीन की माप-जोख करनेवाले काज़ी के पास गए और उसे रिश्वत देकर अच्छी जमीनों को आपस में बाँट लिया। बंजर और बेकार जमीन रांझे के हिस्से में आई। यह सब देखकर रांझा के दुश्मनों की खुशी का तो ठिकाना नहीं था।

अब वे समाज में घूम-घूम कर कहने लगे कि अब रांझा को भाइयों ने जाल में अच्छा फांसा है। रांझा को भी वो अपमानित करते हुए कहते थे, “यह आदमी खेत कैसे जोत सकता है जिसके सर पर बड़े-बड़े बाल हैं लेकिन दिमाग में दही भरा है। ऐसे आदमी से कौन औरत शादी करेगी जो जिंदगी में कभी कुछ नहीं कर सकता।”

रांझा की बेइज्जती करने में भाई भी पीछे नहीं थे, वे कहते, “उसने तो औरतों की तरह चूड़ियाँ पहन रखी हैं। दिन भर बाँसुरी बजाता रहता है और रात भर गाता रहता है। अगर वह जमीन को लेकर लड़ने आता है तो आने दो। देखते हैं कि क्या कर लेता है? हम सब की ताकत के आगे वह अकेला कुछ नहीं कर सकता।”

रांझा भारी दिल लिए अपने बैलों को लेकर खेत जोतने चला लेकिन उसकी आत्मा रो रही थी और धूप की तल्ख़ी उसके दुख को और बढ़ा रही थी। खेत जोतते हुए जब थक गया तो वह छाया में जाकर लेट गया और आराम करने लगा।

उसकी भौजाई साहिबा उसके लिए खाना लेकर आई और वह अपना दर्द उससे कहने लगा, “भौजी, मुझे खेत जोतना अच्छा नहीं लग रहा। जमीन बहुत कठोर है। मेरे हाथों में फफोले और पैरों में छाले पड़ गए हैं। पिताजी जिंदा थे तो कितने अच्छे दिन थे। जाने वे कहाँ चले गए और ये बुरे दिन मुझे देखने पड़ रहे हैं।”

साहिबा ताना मारते हुए बोली, “वैसे तुम तो बस अपने पिता के ही दुलारे थे। माँ के लिए तुम शर्मसार करने वाले बेटे थे।”आगे कहानी पढ़ें

ओ हेनरी की कहानी ‘द लास्ट लीफ’ (पढ़ें हिंदी में)-1

द लास्ट लीफ (आखिरी पत्ता)
वाशिंगटन स्क्वायर के पश्चिम में एक छोटी सी बस्ती में बहुत सारे तंग रास्तों वाली उलझी हुई गलियाँ थीं जिन्हें वहाँ के लोग ‘प्लेसेस’ कहते थे। इन गलियों में अचंभित करने वाले घुमाव और कोण थे। यहाँ एक गली खुद को एक या दो जगहों पर काटती थीं। इसमें कलाकारों को बहुत बड़ी संभावना दिखी। यहाँ दुकानदार अगर पेंट्स, पेपर और कैनवास का पैसा माँगने कलाकार के पास आया तो ये गलियाँ उसे बिना पैसा पाए ही वापस लौटा देंगी।
 
इस ओल्ड ग्रीनविच विलेज में कई कलाकार आकर बसने लगे जिनको कम किराए वाले 18वीं सदी की तिकोना डच अटारियों और उत्तर की तरफ खिड़कियोँ वाले घर की तलाश रहती थी। वहीं एक बंगले के तीसरे माले पर सू और जोन्सी का स्टूडियो था। दोनों एट्थ स्ट्रीट के डेलमोनिको रेस्त्रां में मिले थे। वे एक दूसरे की कला और पूरे बदन ढँके पहनावे से इतने प्रभावित हुए कि एक ज्वाइंट स्टूडियो बना ली। वह मई का महीना था।
 
अब नवंबर आ चुका था और एक अज़नबी सर्दी ने दस्तक दी, जिसे डॉक्टर न्यूमोनिया नाम से बुलाते थे। कॉलोनी में न्यूमोनिया अपनी सर्द उंगलियों से कई लोगों को छूता चला गया। पूर्वी तरफ तो इस विनाशक रोग ने तेजी से पाँव पसारा और कई लोगों को अपना शिकार बनाया। लेकिन उलझे हुए रास्तों की भूलभुलैया जैसी गलियों वाली इस बस्ती में इसके कदम कुछ धीमे हो गए।

जोन्सी को न्यूमोनिया हो गया और वह अपने लोहे की पलंग पर पड़ी रहती थी। वह ज्यादा हिल-डुल नहीं सकती थी और कमरे की छोटी खिड़की से दिखते दूसरे घर की ईंट से बनी सूनी सी दीवार को निहारती रहती थी।

एक सुबह डॉक्टर ने सू को रूम के बाहर बुलाया। उसकी घनी भूरी भौं तनी हुई थी।
 
“उसके पास जीने के कितने चांस हैं- मैं कहूँगा दस में से एक। डॉक्टर अपने थर्मामीटर को झटककर पारा नीचे गिराते हुए बोलता जा रहा था, “और यह चांस भी तब जब वह जीना चाहेगी। लेकिन इस लड़की ने तो यह मन में बिठा लिया है कि वह कभी ठीक नहीं हो पाएगी। क्या उसके दिमाग में कुछ चल रहा है?”
 
“वह- वह किसी दिन नेपल्स की खाड़ी की पेंटिंग बनाना चाहती है।” सू ने कहा।
 
“पेंटिंग?- उफ्फ! क्या उसके दिमाग में कुछ ऐसा है जिसे वह बार-बार सोचे- जैसे कि किसी मर्द के बारे में?”डॉक्टर ने पूछा।
 
“मर्द? क्या मर्द इतने ज्यादा जरूरी हैं। नहीं डॉक्टर, ऐसा कुछ भी नहीं है।” सू बोल पड़ीं।
 
 
“ठीक है, तब तो यह उसकी मानसिक कमजोरी है। मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूँगा। लेकिन जब मेरा पेशेंट मरने की सोचने लगता है तो मैं यह मानकर चलता हूं कि मेरी दवाई का असर पचास प्रतिशत कम होगा।”
 
 
डॉक्टर के जाने के बाद सू अपने वर्क-रूम में गई और बहुत रोई। उसके बाद वह जोन्सी के रूम में गुनगुनाती हुई, अपने ड्रॉइंग बोर्ड के साथ आई।
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ओ हेनरी की कहानी ‘द लास्ट लीफ’ (पढ़ें हिंदी में)-3

सू ने बेहरमेन के कमरे में देखा कि एक कोने में खाली कैनवास पड़ा है जो पच्चीस सालों से किसी मास्टरपीस के बनने का इंतजार कर रहा है। उसने बेहरमेन को जोन्सी की कल्पनाओं के बारे में बताया कि किस तरह से वह उन टूटते पत्तों की तरह खुद को टूटती महसूस कर रही थी।

 

बूढ़ा बेहरमेन की आँखे लाल हो गई और इस तरह की बेवकूफी भरी कल्पनाओं पर वह चिल्लाकर कुछ बोलने लगा। “क्या दुनिया में कोई ऐसा बेवकूफ भी है जो पत्तों के गिरने के कारण खुद मरने के बारे में सोचता है। मैंने आज तक तो नहीं सुना। मैं तुम्हारे लिए मॉडल नहीं बनूँगा। आखिर तुमने उसके दिमाग में ऐसा ख्याल आने ही क्यों दिया?”

 

“वह बहुत बीमार और कमजोर है।”सू कहने लगी ” इसलिए वह इस तरह के ख्याल उसके दिमाग में ज्यादा आते हैं। ठीक है मिस्टर बेहरमेन, अगर आप मेरे लिए पोज़ नहीं देना चाहते, न सही। लेकिन मैं सोचती हूं कि आप भी खूसट बूढ़े हो।”

 

“तुम अन्य सामान्य औरतों की तरह हो।” बेहरमेन बोला, “किसने कहा कि मैं पोज़ नहीं दूँगा। चलो, मैं आता हूँ आधे घंटे में। ओह! मिस जोन्सी जैसी अच्छी लड़की इस जगह बीमार हो गई। किसी दिन मैं अपना मास्टरपीस बनाऊँगा और हम सब यहाँ से दूर कहीं चलेंगे।”

 

जब सू और बेहरमन सीढ़ियाँ चढ़ कर ऊपर आए तो जोन्सी सो रही थी। सू ने खिड़की का शेड गिरा दिया और बेहरमेन को दूसरे कमरे में ले गई। वहाँ से दोनों खिड़की के बाहर देखते हुए खामोशी से खड़े रहे। सर्दी की लगातार बारिश गिर रही थी जिसमें बर्फ भी मिला हुआ था। बेहरमेन उस कमरे में पोज़ देकर बैठ गया ताकि सू ड्रॉइंग बना सके। 

 

दूसरी सुबह जब सू सोकर उठी तो उसने देखा कि जोन्सी खिड़की पर गिरे शेड को एकटक देखती हुई सुस्त सी लेटी है।

“शेड को ऊपर कर दो, मैं देखना चाहती हूँ।” उसने बुदबुदाते हुए आदेश दिया।

सू ने उसके आदेश का पालन किया।

 

लेकिन ये क्या! रातभर इतनी तेज़ सर्द हवा के साथ लगातार होती बारिश को वह पत्ता झेल गया और वह अभी भी उस ईंट की दीवार पे पसरी लता से लटका था। यह आखिरी पत्ता था। अभी भी पत्ते की जड़ हरी थी। इसके किनारे का पीलापन यह दिखा रहा था कि यह मुरझा रहा था लेकिन फिर भी जमीन से बीस फीट ऊपर लता में बहादुरी के साथ लटका था।

 

“यह आखिरी पत्ता है।” जोन्सी ने कहा। “मुझे पूरा यकीन था कि यह रात में गिर जाएगा। मैंने हवा के झोंकों को सुना था। यह आज गिर जाएगा और मैं भी मर जाऊँगी।”

“डियर, डियर!” सू तकिये पर अपना चेहरा टिकाकर कहने लगी, “अगर अपने बारे में अच्छा नहीं सोच सकती तो मेरे बारे में सोचो जोन्सी। मैं कैसे जी पाऊँगी।”

 

जोन्सी ने सू के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया। यह अपने आप में किसी भी दुनिया का एक अकेला रहस्य है जब कोई आत्मा दूर जाने की सोच लेता है। मरने का ख्याल जोन्सी पर इतना हावी था कि दोस्ती का बंधन या धरती की जिंदगी बहुत पीछे छूट चुकी थी।

दिन गुजर गया और वह उस पत्ते को लता से लटकते हुए देखते रहे। उसके बाद रात हुई और उत्तर की ओर आती हवा अब भी तेज़ थी। बारिश की बूँदे खिड़कियों पर जोर से दस्तक दे रही थी।

 

जब दिन निकला तो जोन्सी ने बहुत बेदर्दी से खिड़की से शेड हटाने के लिए सू से कहा। पत्ता अभी तक लता से जुड़ा था।

जोन्सी बहुत देर तक उसे देखती रही। उसके बाद उसने सू को बुलाया जो किचन में चिकन सूप बना रही थी।

“मैं बुरी लड़की हूँ, सू।” जोन्सी कहने लगी, “कुछ ऐसी बात हुई है जिसकी वजह से यह पत्ता नहीं गिरा। शायद यह मुझे बताना चाहती है कि मैं कितनी स्वार्थी हूँ। मरने के बारे में सोचना पाप है। तुम मेरे लिए सूप और दूध लेकर आओ और- नहीं सू रूको, पहले आईना लेकर आओ और उसके बाद कुछ तकिए। मैं बैठकर देखना चाहती हूँ कि तुम कैसे किचन में काम करती हो।”

 

एक घंटे बाद जोन्सी बोल उठी, “सू, मैं किसी दिन नेपल्स की खाड़ी की पेंटिंग बनाना चाहती हूँ।”

डॉक्टर दोपहर बाद आए और जब वह जाने लगे तो सू उनके साथ बरामदे में आई।

डॉक्टर ने सू से हाथ मिलाते हुए कहा, “अपनी अच्छी सेवा से तुम जीत गई। अब मैं अपना दूसरा केस देखने जा रहा हूँ जो नीचे सीढ़ियों के पास है। उसका नाम बेहरमेन है। कोई कलाकार है। उसे भी न्यूमोनिया हो गया है। वह बूढ़ा और कमजोर है। उन पर न्यूमोनिया ने खतरनाक ढ़ंग से अटैक किया है। उनके बचने की कोई आशा नहीं है। लेकिन वह आज हॉस्पिटल जाएगा ताकि उसकी मौत कुछ आसान हो जाए।”

 

अगले दिन डॉक्टर ने सू को सूचना दी, “जोन्सी अब खतरे से बाहर है। तुम जीत गई। तुम्हारी सेवा का यह कमाल है।”

दोपहर बाद सू बिस्तर पर लेटी जोन्सी के पास गई जो शांति से ऊन का स्कार्फ बुन रही थी। सू ने अपनी बाहें उसके गले में डाल दी।

 

“मुझे तुमसे कुछ कहना है।” सू बोली, “मिस्टर बेहरमेन की मौत आज हॉस्पिटल में न्यूमोनिया से हुई। वह सिर्फ दो दिन बीमार रहे। उनकी देखभाल करने वाले ने पहले दिन पाया कि वह सीढ़ियों के पास दर्द से कराह रहे थे। उनके जूते और कपड़े सर्द बारिश में भीगे थे। कोई इसका अनुमान नहीं लगा सकता था कि उस सर्द डरावनी रात में वह कहाँ गए थे।”

 

“लोगों को उसके बाद बेहरमेन के कमरे में एक जलती हुई लालटेन मिली। एक सीढ़ी मिली जिसे अपनी जगह से खींचा गया था। कुछ इधर-उधर बिखरे ब्रश मिले। एक कलर प्लेट मिला जिसमें हरा और पीला रंग रखा हुआ था। और देखो डियर, खिड़की से बाहर उस ईंट की दीवार को, जिस पर वह पत्ता पेंट किया गया है। क्या तुमको यह बात विचित्र नहीं लगी कि इतनी हवा के बावजूद यह पत्ता हिल-डुल क्यों नहीं रहा है? आह! डार्लिंग, यह बेहरमेन का मास्टरपीस है- जब लता का आखिरी पत्ता उस रात गिरा तो उसी वक्त उन्होंने कँपाने वाली जानलेवा सर्दी में दीवार पर उस पत्ते की पेंटिंग बनाई थी।”

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ओ हेनरी की कहानी ‘द लास्ट लीफ’ (पढ़ें हिंदी में)-2

चादर ओढ़े जोन्सी चुपचाप खिड़की की तरफ देखती हुई लेटी थी। सू को लगा कि जोन्सी सोई हुई है इसलिए उसने गुनगुनाना बंद कर दिया। 

 

उसने बोर्ड पर पेन से एक मैगज़ीन स्टोरी की ड्राइंग बनानी शुरू कर दी। यंग आर्टिस्ट्स को कॅरियर बेहतर बनाने के लिए मैगज़ीन स्टोरी के लिए तस्वीरें बनानी होती थी। इसी तरह यंग ऑथर्स को साहित्य जगत में जगह बनाने के लिए मैगज़ीन स्टोरी लिखनी पड़ती थी।

 

सू तस्वीर बना रही थी कि उसे धीमी आवाज़ में कुछ बार-बार सुनाई दिया। वह तुरंत जोन्सी के पास गई। जोन्सी की आँखे खुली हुई थी और वह खिड़की के बाहर कुछ देखते हुए उल्टी गिनती गिन रही थी- बारह, ग्यारह, दस, नौ, आठ, सात…..

 

सू ने जिज्ञासा से खिड़की के बाहर देखा। आखिर जोन्सी क्या गिन रही थी? सामने एक सूना सा यार्ड था और बीस फीट दूर एक खाली सी ईंटों की दीवार। उस दीवार पर एक सूख रही लता दिख रही थी। सर्द हवा इस लता के पत्तों पर प्रहार करके अधिकांश को तोड़ चुकी थी और अब दीवार से चिपकी उसकी सूखी शाखाएँ दिख रही थी।

 

“ये क्या है, डियर?” सू ने पूछा।

 

“छह” जोन्सी ने बुदबुदाते हुए कहा। “अब वे तेजी से गिरते जा रहे हैं। तीन दिन पहले वहाँ सौ पत्ते थे। उसे गिनते-गिनते मेरा सर दर्द करने लगा था। लेकिन अब आसान है। वो देखो एक और गिरा। अब बच गए पाँच।”

 

“पाँच क्या डियर, अपनी सू को बताओ”

 

“उस लता के पत्ते। जब आखिरी पत्ता गिरेगा तो मैं भी दुनिया छोड़ चली जाउँगी। मैं यह पिछले तीन दिनों से जानती हूँ। क्या डॉक्टर ने तुमको नहीं बताया?”

 

“ओह, मैंने ऐसी बकबास पहले कभी नहीं सुनी” सू ने शिकायत के लहज़े में डाँटते हुए कहा। “उस लता के पत्तों का तुम्हारी बीमारी के ठीक होने से क्या रिश्ता है? यू नॉटी गर्ल, तुम इस लता से प्यार करती रही हो। बेवकूफ मत बनो। सुबह ही डॉक्टर ने मुझे तुम्हारे ठीक होने की संभावना के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि तुम्हारे ठीक होने के चांस दस में से एक है। अरे, हमारी जिंदगी को इतना ही चांस तो तब मिलता है जब हम न्यूयार्क में किसी स्ट्रीट कार में बैठते थे या किसी नई इमारत के बगल से गुजरते थे। अब ये सूप पी लो और मुझे ड्रॉइंग बनाने दो ताकि मैं इसे एडिटर को बेच कर तुम्हारे लिए पोर्क और वाइन ला सकूँ।”

 

“तुमको मेरे लिए वाइन लाने की जरूरत नहीं है।” जोन्सी खिड़की की तरफ टकटकी लगाकर देखते हुए बोलती जा रही थी।”एक और पत्ता गिरा। नहीं, मैं सूप भी नहीं पीना चाहती। अब सिर्फ चार पत्ते बचे। मैं अंधेरा होने से पहले आखिरी पत्ते को गिरते देखना चाहती हूँ। उसके बाद मैं भी चली जाउंगी।”

 

“जोन्सी डियर” सू उसकी तरफ थोड़ी झुकती हुई बोली, “क्या तुम अपनी आँखें बंद रखने और खिड़की की तरफ न देखने का वादा करोगी जब तक कि मैं अपना काम खत्म न कर लूँ? मुझे ये ड्रॉइंग्स कल देने हैं। मैं रौशनी चाहती हूँ इसलिए खिड़कियाँ खुली रखी हैं नहीं तो मैं शेड गिरा दूँगी।”

 

“क्या तुम दूसरे कमरे में जाकर अपना काम नहीं कर सकती?” जोन्सी ने सर्द आवाज़ में कहा।

“इससे बेहतर मैं तुम्हारे पास रहना पसंद करूँगी और मैं नहीं चाहती कि तुम उन फालतू पत्तों को देखो।”

 

“जब तुम काम खत्म कर लो तो मुझे कहना” जोन्सी ने यह कहकर आँखे बंद कर ली और गिरी हुई मूर्ति की तरह लेटी रही। “क्योंकि मैं आखिरी पत्ते को गिरते देखना चाहती हूँ। मैं इंतजार करते-करते थक चुकी हूँ। मैं हर चीज को मुक्त करके उसी तरह गिर जाना चाहती हूँ जैसे कि ये थके हुए पत्ते गिर रहे हैं।”

 

“सोने की कोशिश करो” सू बोली, “मैं बेहरमेन को बुला कर लाती हूँ। मुझे उनको बूढ़े खान मज़दूर का मॉडल बनाकर ड्रॉ करना है। मैं तुरंत लौट आऊँगी। जब तक मैं न आऊँ तब तक मत हिलना।”

बूढ़ा बेहरमेन पेंटर था जो उसी मकान के ग्राउंड फ्लोर पर रहता था। साठ साल पार कर चुका यह बूढ़ा आर्ट में अपना मुकाम बनाने में असफल रहा था। चालीस साल से लगातार वह ब्रश चला रहा था। वह एक मास्टरपीस बनाना चाहता था लेकिन अभी तक नहीं बना सका था। कई सालों से वह ज्यादा काम नहीं कर रहा था सिवाय कुछ पैसा कमाने के लिए ऐडवर्टाइजिंग या अन्य कॉमर्शियल पेंटिंग करने के। वह कम पैसे में उन यंग आर्टिस्ट्स के लिए मॉडल भी बनता था जो महंगे प्रफेशनल को नहीं ला सकते थे। वह बहुत शराब पीता था और हमेशा अपनी मास्टरपीस के बारे में बात करता रहता था। वह थोड़ा गुस्सैल स्वभाव का था और अपने ऊपर रह रहे दोनों यंग लेडी आर्टिस्ट्स का ख्याल रखता था।

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