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हीर रांझा 34 – कहानी का आखिरी पन्ना

राजा से विदा लेकर हीर रांझा घर लौट चले। रास्ते में रांझा ने हीर से कहा, ‘खुदा और पीरों ने तुमसे मुझे मिला ही दिया।’ हीर ने जवाब दिया, ‘मैं इस हालत में तुम्हारे साथ घर लौटूंगी तो लोग मुझे बदचलन कहेंगे। वे कहेंगे कि मैंने अपने पिता और ससुर का घर उजाड़ा है। फिर हम दोनों का यह मेल क्या कोई खुशी लेकर आएगा? औरतें ताना देंगी कि मैं बिना शादी किए तुम्हारे साथ रह रही हूं।’

हीर रांझा के साथ अपने गांव पहुंची तो घरवालों ने दोनों का स्वागत किया। लेकिन गांव घरवाले पहले से ही दोनों से जले भुने थे इसलिए वे अंदर ही अंदर दोनों को मौत देने की योजना बनाने लगे। ऊपर से तो वह हीर रांझा के साथ बहुत अच्छे से पेश आए। दोनों को घर में लाकर प्यार से बिठाया। हाल चाल लेने लगे। लेकिन हीर रांझा अब कसाइयों के हाथ में थे।

हीर के ससुराल से एक आदमी संदेशा लेकर आया कि खेरा अपनी बहू को वापस ले जाना चाहते हैं। लेकिन हीर के घरवालों को यह कहते हुए लौटा दिया कि खेराओं से अब उनका कोई संबंध नहीं रहा और वे हीर को वापस नहीं भेज सकते।

हीर के रिश्तेदारों ने रांझा से कहा, ‘तुम अपने घर तख्त हजारा जाओ। वहां अपने भाइयों से बात कर बारात लेकर आना।’ रांझा तख्त हजारा चला गया। इधर रिश्तेदारों के साथ मिलकर हीर का चाचा कैदु हत्या की योजना बनाने में लग गया।

किसी ने हीर के कान में डाल दिया कि उसके रिश्तेदार उसे खेराओं के पास भेजने की तैयारी में लगे हैं। कैदु ने हीर को डांटते हुए कहा, ‘अगर खेरा यहां आ गए तो झगड़ा बवाल होगा। तुम्हारा पति सैदा शादी के गवाह लाएगा और तुम्हारी रांझा से हुई शादी की मनगढ़ंत कहानी की पोल खोलेगा।’

कैदु अपने अन्य रिश्तेदारों के साथ सलाह करने लगा। कैदु ने उनसे कहा, ‘भाइयों, सियालों में तो आज तक ऐसा नहीं हुआ। हम लोग अगर हीर की शादी रांझा से करेंगे तो लोग हम पर थूकेंगे। कहेंगे कि देखो, ये सियाल अपनी बेटियों की शादी किसी से करते हैं और फिर उसे किसी और को सौंप देते हैं।’

रिश्तेदारों ने कैदु की हां में हां मिलाई। वे कहने लगे कि इससे उन सबकी नाक कट जाएगी। जिंदगीभर लोग हीर की कहानी सुनाकर उनको ताना देंगे। अगर चरवाहे के साथ हीर को भेजेंगे तो उनकी भारी बदनामी होगी। सबने इस योजना पर मुहर लगाई कि हीर को जहर देकर मार दिया जाय।

योजना के अनुसार कैदु हीर के पास गया और उसके बगल मैं बैठकर कहने लगा, ‘बेटी धीरज से काम लेना। रांझा की लोगों ने हत्या कर दी। तलवार से उसके टुकड़े टुकड़े कर दिए गए।’ यह सुनते ही हीर गश खाकर गिर पड़ी। जब हीर को थोड़ा थोड़ा होश आया तो उस हालत में ही कैदु ने जहर मिला शरबत उसे पिला दिया। हीर की हालत बिगड़ने लगी। जब उसे लगा कि वह अब मर जाएगी तो वह चिल्लाने लगी, ‘रांझा को एक बार मेरे पास ले आओ। मैं उसे एक बार देख लूं।’ कैदु कहने लगा, ‘रांझा मर चुका है। अब तुम भी खामोश हो जाओ।’ रांझा का नाम लेते लेते हीर की आखिरी सांस टूट गई।

सबने मिलकर हीर को दफना दिया और रांझा के पास खबर भिजवाई। ‘तुम्हारी हीर को हम बचा नहीं पाए। बहुत कोशिश की लेकिन मौत के आगे हम सब बेबस हो गए। तुम्हारी हीर नहीं रही।’

खबर लेकर एक आदमी रांझा के पास तख्त हजारा गया। रांझा के हाथ में चिट्ठी देते हुए वह रो रहा था। रांझा ने पूछा, ‘क्या हुआ? क्यों रो रहे हो? क्या हीर को कुछ हो गया? हीर तो ठीक है न।’

चिट्ठी लाने वाले ने रांझा से कहा, ‘मौत ने तुम्हारी हीर को तुमसे छीन लिया है।’ यह सुनते ही रांझा के दिल को धक्का लगा और वहीं उसकी मौत हो गई।

इस तरह खुदा ने तो दो सच्चे प्रेमियों को मिलाया था लेकिन दुनियावालों ने उनकी हत्या कर दी। आज तक प्रेमियों के साथ दुनिया के लोग ऐसा ही जुल्म करते आ रहे हैं और न जाने इसका कब अंत होगा।

हलांकि इस दुनिया में सबको एक न एक दिन मरना है। सभी बचपन से बुढ़ापा तक जिंदगी जीते हैं और मर जाते हैं लेकिन हीर रांझा की मौत साधारण मौतें नहीं थीं। दुनिया खत्म हो जाएगी लेकिन हीर रांझा के सच्चे प्रेम की यह दर्दभरी कहानी हमेशा जिंदा रहेगी।

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हीर रांझा 25 – ससुराल में उदास हीर, दर दर भटका रांझा

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धोखे से शादी कराने के बाद हीर को अब डोली में बैठने के लिए मजबूर किया गया। खेरा उसे सियाल से रंगपुर उसी तरह ले चले जैसे चोर पशुओं को चुरा कर ले जाता है। डोली में बैठी हीर रांझा के लिए रोए जा रही थी, ‘मेरे रांझा, आज खेरा के लोग तुम्हारी अमानत को लूटकर ले जा रहे हैं। सियालों की जो तुमने अब तक सेवा की उसके बदले तुम्हें यह सिला मिला। अब तुमसे दूर जा रही हूं तो तुम्हारी देखभाल कौन करेगा? तुम दुखी और अकेले होकर भटकते फिरोगे। ओ रांझा, जमीं आसमा हमारा दुश्न हो चुका है और मौत देने पर तुला है।’

इस तरह रांझा से जुदा होकर हीर विलाप किए जा रही थी। हीर को पालकी में लेकर लौटती बारात जंगल तक पहुंची तो सभी कुछ खाने पीने सुस्ताने के लिए वहीं रुक गए। लोग शिकार पर जाने की भी तैयारी करने लगे। रांझा भी हीर की बारात का पीछा करते हुए जंगल में ही था। उसका दिल दर्द से फटा जा रहा था।

शिकार को लोगों ने जंगल में ही आग में भूना और खाते हुए सभी जश्न मनाने लगे। इस बीच मौका देखकर हीर ने रांझा को पालकी के पास बुलाया और गले से लगा लिया। किसी की नजर दोनों पर पड़ गई और उसने जाकर सबको बताया। सभी रांझा को पकड़ने के लिए लपके लेकिन हीर ने सबको रोक दिया। उसने कहा कि रांझा को उसने किसी काम से बुलाया था और किसी ने उसे हाथ लगाया तो वह जहर खा लेगी। खेरा वाले चुप रह गए।

बारात जंगल से चली और रंगपुर पहुंची। वहां दुल्हन के स्वागत के लिए महिलाएं पहले से इंतजार कर रही थीं। गीत गाते हुए लड़कियों ने पालकी का पर्दा हटाया। हीर को घर के अंदर ले जाया गया। सास और ननद हीर के बगल में आकर बैठी। लोग उपहार देने आने लगे। इतनी खूबसूरत बहू लाने के लिए सास को बधाइयां मिलने लगीं।

रांझा भी रंगपुर पहुंचा। हीर और रांझा के दिल में कैसा हंगामा मचा था इसे सिर्फ वही दोनों जान रहे थे। रांझा चुपके से हीर के पास पहुंचा लेकिन हीर ने इसका विरोध किया। हीर ने कहा कि किस्मत उन दोनों के साथ नहीं है और वह रांझा के लिए कुछ नहीं कर सकती। इस पर रांझा हीर को उलाहना देने लगा। कहने लगा कि हीर ने पहले उसको प्यार के लिए बढ़ावा दिया और अब वह उसे छोड़ रही है। इस पर हीर उसे समझाने लगी कि दोनों का प्यार हमेशा रहेगा।

हीर ने रांझा से वादा किया कि वह कभी सैदा की नहीं हो सकेगी। अगर कभी वह उसके पास आया तो वह मुंह फेर लेगी। ‘सुनो रांझा, मैं तुमसे मिलती रहूंगी। मेरे पास एक योजना है। मैं तुमको जब जब बुलाऊंगी, तुम फकीर के वेश में मुझसे मिलने आना। तुम फकीर बनकर इसी गांव में रहो। तुम मुझे देख पाओगे और मैं तुमको। देखो, अगर तुम इस जगह से जाओगे तो मैं मर जाऊंगी।’

रंगपुर की महिलाओं ने जब हीर को उदास रहते देखा तो वह बहुत नाराज हुईं। दुल्हन के आने की खुशी में किए जा रहे रीतियों में भी हीर कोई खुशी नहीं दिखा रही थी। हीर की आंखों से आंसू टपकते रहते थे। इधर काजी चूचक को बता रहा था, ‘तुम्हारी खुशनसीबी कि सारी मुसीबतें एक साथ टल गईं। हीर ससुराल चली गई। सियाल में भी अब शांति है। रंगपुर भी चहक रहा है। और रांझा पर अब कोई ध्यान नहीं देता।’

तख्त हजारा में रांझा के भाइयों और भौजाइयों को जब उसकी कहानी के बारे में पता चला तो वे उस पर हंस रहे थे। उन्होंने बुलावा भेजा, ‘रांझा, घर लौट जाओ। दुनिया की कोई लड़की वफादार नहीं होती। खेराओं ने उस फूल को तोड़ लिया जिसे तुमने बाघ सिंहों से भरे जंगल में खिलाया था। जिसकी रक्षा में तुम इतने दिन लगे रहे और अब भटक रहे हो। हम तुम्हारी खुशी के लिए सब कुछ करेंगे। आ जाओ।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘जब पतझड़ आता है तो गाने वाली चिड़िया आशा पर जिंदा रहती है कि बहार फिर आएगी। जब बाग सूख जाता है तो बुलबुल जंगल में भटकती फिरती है कि कहीं उसके लिए कोई फूल जरूर खिला होगा। सच्चा प्यार करने वाले कभी हार नहीं मानते।’ भौजाइयों को जब रांझा का संदेशा मिला तो वह समझ गईं कि वह अब कभी वापस नहीं लौटेगा।

रांझा फकीर बन गया। उसने कान छिदवा लिए और कसम खायी कि या तो वह हीर को कैद से निकालेगा या मिट जाएगा। उधर, ससुराल में हीर ने गहना श्रृंगार त्याग दिया था। वह ठीक से खाना भी नहीं खाती थी और हमेशा रांझा को यादकर रातों को जागती रहती थी।

हीर की ननद का नाम था सेहती। वह हीर से कहती, ‘भाभी, किसने काला जादू कर दिया है तुम पर। तुम दिन पर दिन कमजोर होती जा रही हो। तुम्हारी खूबसूरती मुरझाती जा रही है। तुम सूखी टहनी बन गई हो और बदन की हड्डियां निकल आई हैं। इतनी उदास क्यों रहती हो तुम? मुझे अपना कष्ट बताओ। हो सकता है, मैं तुम्हारी मदद कर सकूं।’ तब हीर ने ननद सेहती को रांझा से इश्क और धोखे से हुई शादी की सारी कहानी बताई। सेहती ने हीर के दर्द को समझा। उसने कहा, ‘मेरा भी एक प्रेमी है। मुराद बख्श नाम है उसका। ऊंट की देखभाल करता है। हम दोनों मिलकर तुम्हारे लिए जो कर सकते हैं, करेंगे।’

अब तक हीर ने सैदा को पास नहीं आने दिया था। एक रात सैदा बहुत खुश होता हुआ हीर के बिस्तर पर गया। लेकिन हीर ने उसे झिड़क दिया। सैदा नहीं माना। वह हीर से जबरदस्ती करने पर उतारू हुआ। तब हीर पांचों पीरों को बुलाने के लिए प्रार्थना करने लगीं। तभी वहां पीर प्रकट हुए तो हीर ने कहा, ‘मुझे बचा लीजिए, मैं रांझा के सिवा किसी और की नहीं हो सकती।’ पीरों ने सैदा के हाथ पैर बांध दिए। सैदा गिड़गिड़ाकर माफी मांगने लगा। ‘मुझसे भूल हो गई। मुझे माफ कर दीजिए।’

हीर दूसरे दिन नहाने के बाद सिर झुकाए उदास बैठी थी। अचानक सोचती सोचती वह जाने कहां खो गई। वह पीरों का ध्यान करने लगी। पीर उसके ध्यान को देखकर रह नहीं पाए और फिर उसके पास आए। उन्होंने पूछा, ‘बेटी, उठो, कौन सा दुख तुमको खाए जा रहा है।’

हीर बोली, ‘आपने रांझा से मुझे मिलवाया। उसका प्यार दिलाया। मैं रांझा की याद में पागल हो रही हूं। खत्म होती जा रही हूं। खुदा ने आपको इश्क का मददगार बनाया है।’ इस पर पीरों के दिल में हीर के लिए करुणा उमड़ पड़ी और उन्होंने हीर से कहा, ‘उदास मत हो। वह तुमसे जल्दी ही मिलने आएगा। यही खुदा की इच्छा है।’ कहानी आगे पढ़ें।

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हीर रांझा 22 – पिटाई से बौखलाया कैदु ने रची दोनों के खिलाफ साजिश

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हीर की सहेलियों ने आकर उसे कैदु की शैतानियों के बारे में बताया। ‘तुम्हारा दुष्ट चाचा गांव के बड़े बुजुर्गों को तुम्हारे खिलाफ भड़का रहा है। तुम्हारे और रांझा के प्रेम का बाजार में ढोल पीट रहा है। हम मिलकर उसे ऐसा सबक सिखाएंगे कि जिंदगीभर याद रखेगा।’ हीर राजी हो गई और सहेलियों संग सलाह करने लगीं। कैदु को सबक सिखाने की योजना बन गई।

हीर और सहेलियां कैदु को घेरने का अवसर तलाशने लगीं। इंतजार करते करते आखिर वह वक्त भी आ ही गया। सबने कैदु को उसके ही घर में ऐसे पकड़ा जैसे धोबी गधे को पकड़ता है। सबने कैदु को ऐसे पीटना शुरू किया जैसे लोहार लोहे को पीटता है। उन्होंने उसके बाल खींचे और मुंह पर कालिख मल दिया।

कैदु उस चोर की तरह चिल्लाता रहा जो सिपाही के हाथ लग गया हो और सिपाही उसे जमकर पीट रहा हो। सबने मिलकर उसकी झोपड़ी को जला दिया। झोपड़ी से उठती आग की लपटें हीर और उसकी सहेलियों के लिए विजय पताका की तरह लहरा रही थीं। उस रोशनी में उनके सूरतें और भी चमक उठीं।

उधर फटे कपड़ों में मार खाया कैदु बड़ों की सभा में रो रोकर गुहार लगाने लगा, ‘मुझे इंसाफ चाहिए। इंसाफ दो मुझे। उन लोगों ने मेरी झोपड़ी जला दी। मेरे बर्तन तोड़ दिए। मुझे मारा। मैं पूरी दुनिया के सामने सबकी शिकायत रखूंगा। काजी से इंसाफ मांगूंगा।’

कैदु की बात सुन हीर का पिता चूचक गुस्से में आकर उससे बोला, ‘भाग जाओ यहां से दुष्ट, तुम ठगों के सरदार हो। तुम पहले लोगों को तंग करते हो और फिर पंचायत करने चले आते हो। तुम लड़कियों को परेशान करते हो इसलिए तुम्हारे साथ ऐसा हुआ।’

वहां लड़कियों को बुलाकर पूछा गया कि उन्होंने कैदु को क्यों मारा? क्या उसने कुछ बुरा किया था? लड़कियों ने कहा, ‘यह बदमाश हमारे गालों को छूता है और हमारी बाहें मरोड़ता है। हम कहां जाते आते हैं, इसकी जासूसी करके हमारा ऐसे पीछा करता है जैसे गाय के पीछे सांढ़ जाता हो।’

इसके बाद मिल्की की मां से हीर और उनकी सहेलियां कहने लगीं, ‘कैदु पागल कुत्ते जैसा है। इसे हम दूर क्यों नहीं भगा देते? हमें उससे डर लगता है। वह हमारे साथ बुरा बर्ताव करता है और आपलोग उससे प्यार से बातें करते हो। हमें बार बार जिसकी वजह से बड़ों की सभा में आना पड़ता है, ऐसे दुष्ट झगड़ालू आदमी के प्रति आपलोग दयालु क्यों बन रहे हैं? यह तो इंसाफ नहीं है।’

कैदु फिर और जोर से रोने चिल्लाने लगा और इंसाफ की मांग करता रहा। सभा में लोगों ने कैदु को शांत होने को कहा। उनका मानना था कि कैदु के साथ लड़कियां कुछ ज्यादा ही कठोरता से पेश आई हैं। उन्होंने लड़कियों को डांटा और कैदु से वादा किया कि उसका घर फिर से बना दिया जाएगा। उसके बर्तन सहित अन्य नुकसान की भी भरपाई कर दी जाएगी।

लेकिन कैदु को इस फैसले से संतोष नहीं हुआ। वह कहने लगा, ‘आप लोगों ने अपनी बेटियों की तरफदारी की है और मुझे ऐसी तुच्छ सांत्वना दे रहे हो। ये तो अंधे राजा और दमन करने वाले अधिकारियों के राज्य जैसा इंसाफ है।’

इस पर हीर का पिता चूचक बोल पड़ा, ‘हमारे गांव  के बड़े बुजुर्ग नीच नहीं हैं। उन्हें ईश्वर का खौफ है। हम कभी नाइंसाफी नहीं करते। शैतान से हमें नफरत है। तुम्हारी कहानी की सच्चाई पर आंखों से देखने पर ही यकीन किया जा सकता है। अगर वह सच्ची निकली तो हीर को काट कर फेक देंगे और रांझे को गांव से निकाल देंगे।’

कैदु मन ही मन कहने लगा, ‘मैं तो उस हीर को भांग की तरह पीस दूंगा और उस रांझे के बालों से रस्सियां बनाऊंगा।’ फिर वह बोला, ‘हां चूचक, अगर तुमने खुद अपनी आंखों से देखने के बाद अगर अपनी बेटी को कुछ नहीं कहा तो तुम इस सभा में बैठे सभी लोगों को झूठा साबित करोगे।’

वहां से जाने के बाद कैदु जंगल में हीर रांझा को एक साथ पकड़ने की योजना बनाने लगा। वह रांझा पर नजर रखने लगा। दूसरे दिन रांझा सुबह जब पशुओं को लेकर जंगल की ओर चला तो कैदु भी झाड़ियों के पीछे छिपकर उसका पीछा करता रहा। दो पहर बाद हीर अपनी सहेलियों के साथ जंगल आईं। जंगल सियाल की लड़कियों की खूबसूरती से चहकने लगा। कुछ देर खेलने के बाद सहेलियां घर लौट गईं लेकिन हीर रांझे के साथ नर्म घास पर लेटी बातें करती रहीं।

मौका पाकर झाड़ियों के पीछे छिपा कैदु तुरंत वहां से तेजी से दौड़ता हुआ गांव पहुंचा और बड़ों के पास जाकर कहने लगा, ‘चलो, खुद अपनी आंखों से देख लो, जंगल में क्या तमाशा चल रहा है।’ कहानी आगे पढ़ें

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हीर रांझा – 13 – रांझे पर मर मिटी हीर

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हीर ने कहा, ‘मैं तुम्हारी खिदमत में हमेशा रहूंगी, रांझे और मेरी दासियां तुम्हारा हुक्म बजाएंगी। चार आंखों और होठों के मिलन के लिए जंगल से बेहतर और कौन जगह हो सकता है? इश्क की मंजिल तो दो प्रेमियों का मिलन है। खुदा ने मुझे आशिक के रूप में तुमको दिया है और मैं रिश्ते-नाते-दुनिया सबको भूल चुकी हूं।’

रांझा ने जवाब दिया, ‘हीर, तुम तो अपनी सखियों के साथ मौज करोगी और मैं तुम्हारी हवेली में उदास अकेला भटकता रहूंगा। कोई मुझ पर ध्यान नहीं देगा। मुझसे छल मत करो। अगर तुम सच्ची हो तो अपनी बात याद रखना। अजनबी को सहारा देकर एक दिन मुंह मत फेर लेना।’

हीर ने जवाब दिया, ‘मैं कसम खाती हूं रांझे कि अगर मैंने तुमको धोखा दिया तो खुदा मुझसे मेरे मां-बाप छीन ले। तुम्हारे बगैर मैं खाने की तरफ नजर तक नहीं उठाऊंगी। मैं अपना प्यार तुम्हारे सिवा और किसी को नहीं दूंगी। अगर मैं तुम्हारे सिवा और किसी को अपना पति चुनूं तो मैं अंधी हो जाऊं।’

रांझा ने फिर कहा, ‘हीर, इश्क का रास्ता बहुत मुश्किल है। मेरा दिल उलझन में है। इश्क तलवार से भी ज्यादा खौफनाक है, जहरीले सांप के विष से भी ज्यादा जहरीला है। मुझसे वादा करो कि तुम सच्ची हो तो।’

हीर रांझा को सच्चे प्यार का यकीं दिलाकर अपने पिता चूचक के पास ले आई। पिता के सामने हीर रांझा के ठीक बगल में खड़ी हुई।

हीर पिता से बोली- मेरे अब्बू, आपके खातिर मेरी जान भी चली जाए तो कम है। आपकी छांव में रहकर मैं इतनी खुश जिंदगी जी रही हूं। मैंने आपके लिए एक चरवाहा खोजा है जो हमारे भैंसों की देखभाल कर सकता है। कहानी आगे पढ़ें-

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