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शायरी – दोनों जुदा-जुदा हैं, जमाने को खबर है

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एक टुकड़ा इधर है, एक टुकड़ा उधर है
दोनों जुदा-जुदा हैं, जमाने को खबर है

आशिक है आफताब सा दीपक बना हुआ
माहताब सा माशूक ही उसका दिलबर है

छूती है घटाओं को ये सर्द हवा जब
सावन के दर्द में भीग जाता शहर है

हर राह जमाने की जाती है बाजार में
हर शख्स की इसलिए दौलत पे नजर है

आफताब – सूरज
माहताब – चांद

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – थे करीब हम-तुम लेकिन बंदिशें थी बेहिसाब

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क्यूं है सर्द-सर्द चांद, क्यूं है जलता आफताब
क्यूं हैं ये खामोश तन्हा, कौन दे इसका जवाब

कुछ दिनों तक लिख न पाया मैं कोई भी गजल
उन दिनों मैं भूल गया करना जख्मों का हिसाब

तेरी यादों संग बैठा अपने चमन की वीरानी में
उजाड़कर ले गयी ये दुनिया मेरे बगीचे का गुलाब

फासला दो-चार कदम का तय न कर पाए कभी
थे करीब हम-तुम लेकिन बंदिशें थी बेहिसाब

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari