Tag Archives: आसमान शायरी

शायरी – जिस रहगुजर पे चले दूर तक तेरी तलाश में

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दर्द ए मुहब्बत के अफसानों में खोये जा रहा हूं
जानेजां तुझे अपनी गजलों में पिरोये जा रहा हूं

मुफलिसी के आसमान में चांद तो नहीं निकलता
दिल के अंधेरों में सितारों को जलाए जा रहा हूं

दर्द की नमी को हमने आंखों में बसा लिया है
गमों की दरिया को चेहरे पे बहाए जा रहा हूं

जिस रहगुजर पे चले दूर तक तेरी तलाश में
उसी को अब अपना हमसफर बनाए जा रहा हूं

©RajeevSingh # love shayari

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शायरी – मुहब्बत में जलती हुई एक शाम देखता हूं

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बहुत देर तक अक्सर आसमान देखता हूं
मैं उस चांद में सनम का पैगाम देखता हूं

बादल गुजरता है जिधर टुकड़ों में तड़पकर
उस तरफ दूर तक तेरे अरमान देखता हूं

जगमगाते हुए हजारों सितारों की आग में
मुहब्बत में जलती हुई एक शाम देखता हूं

जब रात बिखरती है आधी रात जवां होकर
मैं हर जर्रे में उस हसीं का नाम देखता हूं

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – कांटों के इस चमन में हम घायल गिर पड़े

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सावन के मौसम में घटाएं उमड़ पड़े
किश्तों में आसमान से बादल गिर पड़े

हमको नहीं खबर कि रहगुजर है कैसा
जाने क्या हुआ कि तेरे कूचे में चल पड़े

काबू नहीं है अब मुझे जेहनो-जिगर पे
मुझसे बिना पूछे मेरे आंसू निकल पड़े

अपना ये गुलिस्तां है जिसमें गुल ही नहीं है
कांटों के इस चमन में हम घायल गिर पड़े

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – ऐ इश्क माफ करना कि मैं रोता नहीं हूं अब

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कच्ची उमर की याद थी, संजोता नहीं हूं अब
इश्क माफ करना कि मैं रोता नहीं हूंअब

कहीं हुस्न देख ली तो रास्ते बदल लिए
तन्हाई की मंजिल को मैं खोता नहीं हूं अब

बुझ गए हैं सारे मुहब्बत के वो सितारे
रात में आसमान को मैं तकता नहीं हूं अब

एक शख्स ने कहा था ‘तुम हो अभी बच्चे’
तबसे किसी से दिल से मिलता नहीं हूं अब


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – इस अदा से मेरे दिल में गुलाब खिला

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एक श्मशान से आसमान से गुजरते हुए
हमने देखा है सितारों की चिता जलते हुए

मर चुके सावन को कांधे पर ले चली है हवा
बादलें संग चल रहे हैं बहुत रोते हुए

एक दरिया में डूब गया था चांद का हुस्न
और आईना टूट गया था उसे देखते हुए

इस अदा से मेरे दिल में गुलाब खिला
मुझे अच्छे लगे ये कांटे सभी चुभते हुए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – जिस्म से उड़ चला है परिंदा न जाने कहां जाएगा

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ये बेगानी शाम बस कुछ पल की मेहमान है
रू-ब-रू मेरे कोई अपना नहीं, एक सुनसान है

हम उधर को चले जिस डगर पे मेरी तन्हाई है
उस शहर में जहां किसी शै से न मेरी पहचान है

मेरे आठों पहर में कांटे हैं बस और कुछ भी नहीं
मेरे दामन पे हरसू लिखा हुआ दर्द का नाम है

जिस्म से उड़ चला है परिंदा न जाने कहां जाएगा
आसमानों में कितनी दिशाएं हैं, सबसे वो अंजान है

(हरसू- हर ओर)

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari