Tag Archives: इबादत शायरी

शायरी – उसके सिवा क्या पाने को था

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जीने का मजा उसी ने है दी
मरने की सजा उसी ने है दी

उसके सिवा क्या पाने को था
खोने की दुआ उसी ने है दी

खयालों से उठते हुए दर्द को
बढ़ने की दवा उसी ने है दी

देखकर जिसे मैं इबादत करूं
आंखों में खुदा उसी ने है दी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – मुझे दर्द की तलाश में तुम मिल ही गए

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मुझे दर्द की तलाश में तुम मिल ही गए
मेरे तन्हा सी राह में तुम मिल ही गए

चांद निकला है प्यास की दो दरिया में
इन निगाहों के आईने में तुम मिल ही गए

हर खामोशी में किसी गम का फसाना है
हिज्र की हर दास्तां में तुम मिल ही गए

अक्सर इबादतों में तेरा नाम लेता हूं
मेरे मसजूद की सूरत में तुम मिल ही गए

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शायरी – तेरे इश्क में दीवाना मरता नहीं कभी

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रोता हुआ चिराग बुझता नहीं कभी
तेरे इश्क में दीवाना मरता नहीं कभी

इस मयकशी से दर्द बढ़ता नहीं अगर
साकी तेरे मैखाने में आता नहीं कभी

तेरे हुस्न की इबादत में गुजरी है जिंदगी
इक तेरे सिवा और सोचा नहीं कभी

शब ने मुझे सौगात दिया है गजल की
मैं चांद की खातिर सोया नहीं कभी


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शायरी – ओ मुझे तन्हा छोड़ के जाने वाले, आखिरी दास्तां सुनते जाओ

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ओ तन्हा छोड़ के जाने वाले आखिरी दास्तां सुनते जाओ
तू खुदा तो नहीं था मगर उम्र गुजरी तेरी इबादत करते

इस दिल को समझाऊंगी कि तुमको याद न किया करे कभी
ऐ दिल, फूल गले ना लगाए तो कांटों को नहीं चूमा करते

आजकल में कहीं मिल जाओ तो तुम बस इतना ही करते
मेरी टूटी-उलझी राहों को सीधा कर गांठ लगाया करते

अगर सौ बार जनम लूं धरती पे बस यही ख्वाहिश है मेरी
काश! हर जनम में तुम ही मेरी मैयत को जरा कांधा देते

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शायरी – सबकी तरह बेदर्द थे हम जब इश्क से बेगाने थे

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मैं परिंदा भी नहीं और हूं आस्मा भी नहीं
लेकिन मेरा दिल इन दोनों से कम भी नहीं

मेरा सबकुछ लुट गया, मैं वो खुशनसीब हूं
आज दुनिया में कुछ खोने का गम भी नहीं

मुफलिसी मेरा खुदा है, फाकामस्ती इबादत है
जिंदगी के बारे में अब कोई वहम भी नहीं

सबकी तरह बेदर्द थे हम जब इश्क से बेगाने थे
जिसने दर्दे-दिल दिया, अब वो सनम भी नहीं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – कोई तू राह बता कैसे मैं बेवफाई करूँ

एक प्रेमिका अपने घर के लोगों के अहसानों तले दबकर जब उनकी मर्जी से किसी और का दामन थामने के लिए मजबूर होती है तो वो आशिक के सामने अपना दर्द बयां नहीं कर सकती कि उसके हालात कितने बुरे हैं और वो बेवफाई आखिर कैसे करे?

प्रेमिका ये महसूस करती है कि उसकी बेवफाई से उसके आशिक की जिंदगी बर्बाद हो सकती है जिसकी उसने आज तक इबादत की। वो कहती है कि मेरे लिए जो तू इतना रोता है, उन आंसुओं को देखने की सजा कैसे सहूं?

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वो कहती है कि उसकी राह में पत्थर की दरो-दीवारें हैं जिसमें वो कैद है और उसकी जंजीरों को वो तोड़ नहीं सकी इसलिए उसे जाना पड़ेगा। वो सारा इल्जाम अपने सर लेते हुए कह रही है कि मुझ पर जो अभी बीत रही है, उसे मैं किन लफ्जों में बताऊं?

ये गजल उन्हीं महबूबाओं के दर्द को आवाज देने के लिए लिखी गई है। इसमें एक प्रेमिका के दिल का वो दर्द है जिसको लेकर वो आशिक से जुदा होती है और दुनिया में उसे बेवफा कहा जाता है लेकिन क्या सच में बेवफा होती है…

इस मुहब्बत में तुमको मैं खुशी दे न सकी
कोई तू राह बता कैसे मैं बेवफाई करूँ
दर्द के शोलों को हवा दी हमने तेरे दिल में
इन गुनाहों से तोबा अब मैं कैसे करूँ

खता-ए-इश्क से बस तेरी इबादत की है
ऐसा लगता है तेरी ही शहादत दी है
तू जो रोता है इतना मेरे ख़यालों में
तेरे आँसू को देखने की सज़ा मैं कैसे सहूँ

तेरे हर जख़्म का इल्ज़ाम मेरे सर पे है
तेरे हर दाग का अहसास जिगर पे है
तेरे दामन में चुभे दर्द-ए-नश्तर की कसम
मुझपे जो बीत रही है, उसे मैं कैसे कहूँ

ऐ मेरे इश्क, मेरे हुस्न पे मरनेवाले
ओ दीवाने मेरी याद में जलनेवाले
मेरी राहों में पत्थर की दीवारें हैं
इन दीवारों के अहसानों को मैं कैसे तोड़ूँ

©RajeevSingh