Tag Archives: इल्जाम शायरी

शायरी – कातिल से मोहब्बत कर बैठे

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खुद ही से अदावत कर बैठे
कातिल से मोहब्बत कर बैठे

वही अपना न रहा इस शहर में
जिनके लिए हम सबसे लड़ बैठे

उनके चर्चे जब हरसू होने लगे
सारे इल्जाम मेरे सर वो धर बैठे

खोजें जीने का कोई और ठिकाना
मिलने लगे हैं ताने अब घर बैठे

अदावत –  दुश्मनी
हरसू – हर तरफ

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – इश्क का अच्छा इम्तहान रहा

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रातभर रास्ता सुनसान रहा
पर तेरे आने का इम्कान रहा

कोरा कागज ही जमा कर आया
इश्क का अच्छा इम्तहान रहा

छीनने वालों को ही छोड़ दिया
आशिकों पर ये इल्जाम रहा

मैं तो जीता रहा गुनाहों में
तेरी कैद पाने का अरमान रहा


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मैं पराया सही पर आज भी तू मेरी है

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कोई इंसाफ न होना था, न होगा कभी
जुर्म ये माफ न होना था, न होगा कभी

मेरे इजहार से पहले तू जुदा हो गई
तुमपे इल्जाम जो लगना था, न होगा कभी

देख ले आज भी तेरे ही भरम बाकी हैं
मेरे जैसा तेरा दीवाना, न होगा कभी

मैं पराया सही पर आज भी तू मेरी है
आखिरी रिश्ता टूट जाए, न होगा कभी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मेरी उल्फत को बेवफाई का ही नाम दे दो

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और कुछ न सही, मुझको ये इल्जाम दे दो
मेरी उल्फत को बेवफाई का ही नाम दे दो

जख्म और दर्द तुझे पाकर मिट सा गया
जानेवाले मुझे रोने का सामान दे दो

हम गुजरे हैं तेरी आरजू की गलियों से
मेरे ख्वाबों को टूट जाने का अरमान दे दो

बेखबर तू है तो मैं होश में क्यूं रहता हूं
ऐ मेरे दिल, मुझे मौत का फरमान दे दो

©RajeevSingh # love shayari