Tag Archives: इश्किया गजलें

शायरी – तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई

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तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई
जो निभाना था घर से, वो वचन भूल गई

सात जनमों की भला कौन खबर रखे
तेरी दहलीज पे जब मैं ये जनम भूल गई

क्या जमाना भी करेगा हमसे शिकवा
जब जमाने के कीए सारे सितम भूल गई

दीवानी होकर तेरे पास चली आई हूं
तुमको देखा तो दिल की लगन भूल गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – बस तेरा प्यार मांगने तेरे पास मैं आया हूं

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तेरे आंचल को आंखों से लगा लूं जरा
हाले-दिल तुमको सुनाकर मैं रो लूं जरा

मेरे दिल में एक दरिया है मुहब्बत का
तेरे आंचल की जमीं पर उसे बहा दूं जरा

बस तेरा प्यार मांगने तेरे पास मैं आया हूं
अपने दामन को तेरे दर पे फैला लूं जरा

अब तो मरना भी है बस तेरे ही दर पे
अपने आंचल को मेरा कफन बना दो जरा

©RajeevSingh

शायरी – इस बदनसीब के इश्क में तुझे डूबकर भी क्या मिला

इश्क की टूटन में दो दिल टूटते हैं। एक रूठता है तो दूसरा टूटता है। ऐसे में कौन किसको बेवफा कहे? दुनिया की दीवारें नसीब बनकर आती हैं और जुदाई दे जाती हैं। हर इश्क का अंजाम जुदाई क्यों हैं, ये कैसा नसीब है जो हमेशा बदनसीब है।

इश्क में दो वजूद जल जाते हैं। एक दूसरे से दूर होकर तब तक जलते रहते हैं जब तक दिल में खाक नहीं बच जाता। उस खाक में इश्क फकीर हो जाता है। मोहब्बत की चिता जब जलकर ठंडी होती है यही अहसास होता है कि बचे राख में कुछ है नहीं, बस एक जिंदगी है जो खाली-खाली सी है, तन्हा सी है। दोनों एक-दूसरे से पूछते हैं कि बताओ इश्क में जलकर आखिर दोनों को क्या मिला?

उसकी मोहब्बत शायरी इमेज

जब से इश्क हुआ दोनों दर्द में ही रहे। जमाने से दूर किसी कोने में सुबकते रहे। आशिक अपने महबूब से पूछता है कि बताओ तुमने एक बदनसीब से इश्क क्यों कर लिया? इश्क शायद खुशनसीब नहीं होता, खुशनसीब से नहीं होता..इश्क हमेशा दर्द से होता है जो खुद ही बदनसीब होता है।

इश्क का दर्द जब गहरा होता है तो जिगर के आंसू लहू बन जाते हैं। दिल छलनी होता है तो जख्म से आंसू भी सुर्ख हो जाते हैं लेकिन इन लहू को आंखें बाहर छलकने नहीं देती हैं। इश्क के आंसुओं को रोकनेवाली नजर को भी भला क्या मिल जाता है? शायद दर्द का एक सागर…

यह गजल दो दिलों की जुदाई के अहसासों को समेटे हुए है….

मुझे टूटकर क्या मिला, तुझे रूठकर भी क्या मिला
जब बेवफा ही नसीब हो तब रोकर भी क्या मिला

अब आग से हम दूर हैं पर खाक के तो पास हैं
ठंडी हुई है चिता मेरी, मुझे जलकर भी क्या मिला

मेरे साथ गर्दिश में रहे, मेरे संग-संग रोते रहे
इस बदनसीब के इश्क में तुझे डूबकर भी क्या मिला

ये जिगर लहू से भर गया जब जख्म भी रिसने लगे
मेरे आंसुओं को रोककर इस नजर को भी क्या मिला

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – तेरे जैसा कोई भी गजल हो न सका

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मेरी तन्हाई में किसी का दखल हो न सका
मेरी किस्मत में कभी भी बदल हो न सका

यूं तो लिखी हैं हमने तुझपे ही सैकड़ों गजलें
पर तेरे जैसा कोई भी गजल हो न सका

मैं भी एक आशियां में बंद हूं दुनिया की तरह
तेरे बिन कैद में सुकूं से बसर हो न सका

इतनी बेचैनी है कि रूह निकल न जाए कहीं
हिज्र में मौत से भी मेरा मिलन हो न सका

(हिज्र- जुदाई)

शायरी – उस नाज पे, उस हुस्न पे जांनिसार हों हर जनम में हम

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कभी दिल्लगी कभी संगदिली, कितने सितम तुमने किए
कभी की वफा, कभी थी खफा, कितने करम तुमने किए

उस हुस्न के दीदार पे जांनिसार हों हर जनम में हम
जो रूह बनके जुदा हुई, इस जनम में जां उसने लिए

ये इश्क का इंसाफ है, कि तेरी हर खता मुआफ है
इस गुनाह को कुबूल कर खुद को सजा हमने दिए

ये चांद भी तेरे नूर का एक मिसाल है इस जहां में
हम रातभर यूं ही जागकर तुझे देखकर जीते गए

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – जिस्म से उड़ चला है परिंदा न जाने कहां जाएगा

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ये बेगानी शाम बस कुछ पल की मेहमान है
रू-ब-रू मेरे कोई अपना नहीं, एक सुनसान है

हम उधर को चले जिस डगर पे मेरी तन्हाई है
उस शहर में जहां किसी शै से न मेरी पहचान है

मेरे आठों पहर में कांटे हैं बस और कुछ भी नहीं
मेरे दामन पे हरसू लिखा हुआ दर्द का नाम है

जिस्म से उड़ चला है परिंदा न जाने कहां जाएगा
आसमानों में कितनी दिशाएं हैं, सबसे वो अंजान है

(हरसू- हर ओर)

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari