Tag Archives: इश्किया शायरी

शायरी – तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई

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तेरे आने से मैं अपना चमन भूल गई
जो निभाना था घर से, वो वचन भूल गई

सात जनमों की भला कौन खबर रखे
तेरी दहलीज पे जब मैं ये जनम भूल गई

क्या जमाना भी करेगा हमसे शिकवा
जब जमाने के कीए सारे सितम भूल गई

दीवानी होकर तेरे पास चली आई हूं
तुमको देखा तो दिल की लगन भूल गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तेरी जुल्फ में लगा सकूं, वो कली न मैं खिला सकूं

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तेरी जुल्फ में लगा सकूं, वो कली न मैं खिला सकूं
बेबस खिजां में बैठा हूं, वो बहार भी न मैं ला सकूं

सावन की एक फुहार से मैंने मांग ली कुछ बूंद भी
जिसे आंख में तो भर लिया, उसे अब न मैं गिरा सकूं

कहा भी क्या समझा नहीं, देखा भी क्या सोचा नहीं
यूं खो गया मैं खुद में ही कि कहीं भी न मैं जा सकूं

सर पे जब सदियां गिरी, मैं फलक में जाके धंस गया
अब चांद के मानिंद मैं जमीं पे भी न आ सकूं

फलक- आसमान

खिजां- पतझड़

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – आह ये मुरझाया गुलाब जाने कब खिलेगा

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आह ये मुरझाया गुलाब जाने कब खिलेगा
कब इसमें लाल रंग का खूने-इश्क बहेगा
तोड़ा है जमाने ने जिस शाख से इसको
जाने कब उन बाहों का फिर साथ मिलेगा

फरियाद कर सका न वो, खामोश रह गया
लेकिन टूटकर भी इतना जोश रह गया
महकता रहा, सजता रहा वह महफिलों में
फिर एक दिन सूखकर मायूस रह गया

आशियां में पड़ा है किसी गुलदान में
या बिकने को रखा है किसी दुकान में
कातिल हो गई उनकी ही उंगलियां
ये गुलाब खिला था यहां जिसके मकान में

©RajeevSingh # गुलाब शायरी

शायरी – बस तेरा प्यार मांगने तेरे पास मैं आया हूं

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तेरे आंचल को आंखों से लगा लूं जरा
हाले-दिल तुमको सुनाकर मैं रो लूं जरा

मेरे दिल में एक दरिया है मुहब्बत का
तेरे आंचल की जमीं पर उसे बहा दूं जरा

बस तेरा प्यार मांगने तेरे पास मैं आया हूं
अपने दामन को तेरे दर पे फैला लूं जरा

अब तो मरना भी है बस तेरे ही दर पे
अपने आंचल को मेरा कफन बना दो जरा

©RajeevSingh

शायरी – मेरे जज़्बात के हर कतरे में तुम बहने की अदाएँ सीख गए

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हम रोने का हुनर सीख गए
तुम आकर आँसू में भींज गए
मेरे जज़्बात के हर कतरे में
तुम बहने की अदाएँ सीख गए

फिजा की बिखरी यादों में
फूलों में सँवरे काँटों में
कायनात के दर्द की सोहबत में
हम जीना-मरना सीख गए

शाम की धुंधली राहों पर
गम की अँधेरी रातों पर
ख्वाब के टूटे शीशों पर
मुस्कुरा के चलना सीख गए

जख़्म के पहलू में सोकर
नग़मों को कागज पे लिखकर
अपनों के प्यार से दूर होकर
हम जीवन जीना सीख गए

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – हो सकता है तेरे दिल में मेरे खातिर जगह न हो

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हो सकता है तेरे दिल में मेरे खातिर जगह न हो
हो सकता है इसके पीछे, किसी तरह की वजह न हो

लो गुनाह कुबूल किया, फिर आशिक कहता है कि
दुनिया तेरी कचहरी में मेरे इश्क पे जिरह न हो

रात में शाम का बादल ही चांद का कातिल बनता है
सोचता हूं कि तेरे बिन अब इन रातों की सुबह न हो

तू है गैर के घर में और मैं हो गया जग से पराया
इश्क की दुनिया में किसी का अंजाम मेरी तरह न हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – निगाहों में महबूब की तस्वीर तो बन जाने दो

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शाम तो ढल गई अब तो शमा जल जाने दो
ऐ खुदा चांद को घर से तो निकल जाने दो

कोई धरती पे नहीं जिसे देखूं मैं जी भरके
निगाहों में महबूब की तस्वीर तो बन जाने दो

तेरी खामोशी सहेजूंगी मैं जुदा रहकर
अपनी आवाज को तुम मुझमें तो खो जाने दो

अपनी मिट्टी से बनाऊंगी मैं मूरत तेरी
मेरे इस रूह को एक दीद तो मिल जाने दो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – इतने तन्हा हो चुके हैं इस दुनिया में

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आज दुख है, कल भी दुख का दिन होगा
इश्क में फकत ऐसा ही मौसम होगा

खूं ये जलता ही रहेगा मरते दम तक
दो आंखों में बहता हुआ तेरा गम होगा

इतने तन्हा हो चुके हैं इस दुनिया में
मेरी मैयत पे शायद ही मातम होगा

दर्द ही दर्द हर तरफ हैं डसने के लिए
क्या खबर थी कि ये दिल बेरहम होगा

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – इस बदनसीब के इश्क में तुझे डूबकर भी क्या मिला

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मुझे टूटकर क्या मिला, तुझे रूठकर भी क्या मिला
जब बेवफा ही नसीब हो तब रोकर भी क्या मिला

अब आग से हम दूर हैं पर खाक के तो पास हैं
ठंढ़ी हुई है चिता मेरी, मुझे जलकर भी क्या मिला

मेरे साथ गर्दिश में रहे, मेरे संग-संग रोते रहे
इस बदनसीब के इश्क में तुझे डूबकर भी क्या मिला

ये जिगर लहू से भर गया जब जख्म भी रिसने लगे
मेरे आंसुओं को रोककर इस नजर को भी क्या मिला

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – आज इतना ही दर्द है कि मैं रो न सकूं

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आज इतना ही धुआं है कि मैं जल न सकूं
आज इतना ही दर्द है कि मैं रो न सकूं

अबके बरसात में इक बूंद भी हासिल न हुआ
इतना प्यासा हूं कि पानी को भी छू न सकूं

तेरे रिश्तों ने बुलाया है तुझे घर की तरफ
अब तो शायद तेरे दर पे कभी आ न सकूं

फिर तू ही ले आना कभी फूलों की चादर
तेरी यादों के दरीचे पे मैं अब सो न सकूं

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – तेरे जैसा कोई भी गजल हो न सका

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मेरी तन्हाई में किसी का दखल हो न सका
मेरी किस्मत में कभी भी बदल हो न सका

यूं तो लिखी हैं हमने तुझपे ही सैकड़ों गजलें
पर तेरे जैसा कोई भी गजल हो न सका

मैं भी एक आशियां में बंद हूं दुनिया की तरह
तेरे बिन कैद में सुकूं से बसर हो न सका

इतनी बेचैनी है कि रूह निकल न जाए कहीं
हिज्र में मौत से भी मेरा मिलन हो न सका

(हिज्र- जुदाई)

शायरी – दर्द बेजुबां हो तो दिल क्या कहे

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दर्द बेजुबां हो तो ये दिल क्या कहे
आह खामोश हो तो ये लब क्या कहे

आरजू का हर एक अश्क आंखों में था
उसने देखा नहीं तो पलक क्या कहे

चाहतें मंद हैं बुझती लौ की तरह
रोशनी ही नहीं तो दीपक क्या कहे

कोई नहीं यहां अपना मेहरबां सा कोई
तन्हाई में अब मुझसे शब क्या कहे

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – जख्म जब-जब दिल में मेरे इश्क में जल उठा

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आईना देखा तो मेरा एक अलग ही रूप था
कल तलक जो अक्स था, आज वो इक दाग था

बस मेरी तू आरजू थी, चूड़ होकर रह गई
मैं भी शायद जिंदगी का एक टूटा ख्वाब था

मिट्टी का हर दर्द तो फूल बनकर खिल गया
मेरे सीने में भी गम का एक हसीन गुलाब था

जख्म जब-जब दिल में मेरे इश्क में जल उठा
आंख से पानी बहे, उस पानी में भी आग था

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari