Tag Archives: उजाला शायरी

शायरी – इश्क के सागर में वो दूर गई इतनी

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तेरी सूरत का चिराग जो बुझा जीवन से
मुद्दतों तक आईने में कोई चेहरा न दिखा

इश्क के सागर में वो दूर गई इतनी
कि कश्ती को फिर अपना किनारा न दिखा

इन अंधेरों में अब सुकूं नहीं मिलता
मगर इसके सिवा कोई सहारा न दिखा

मैंने चांद को तलाशा बहुत आस्मा में
मगर अमावस में मुझको उजाला न दिखा

©RajeevSingh

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शायरी – तेरे दिल में भी आंसुओं के परिंदे होंगे

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दर्दे दिल के इन रातों का सबेरा न हो
तेरी बेवफाई के उजालों में अंधेरा न हो

एक बार इश्क किया जिंदगी में हमने
कोशिश किया ये गलती दोबारा न हो

तेरे दिल में भी आंसुओं के परिंदे होंगे
किसी सैयाद का वहां पे बसेरा न हो

एक मुसाफिर बार-बार दुआ करता है
किसी शहर में कोई उसका सहारा न हो

सैयाद- परिंदों का शिकारी

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – ऐ दिल मुझे भी जला ले, जला ले

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बरसते नहीं हैं हुस्न के उजाले
चाहे तू कितना ही आंसू बहा ले

सब कुछ तो तुमने जला ही दिया है
ऐ दिल मुझे भी जला ले, जला ले

उल्फत की आग बुझी है दिल में
जब जी में आए चिंगारी उड़ा ले

कफन ओढ़कर आया तेरे दर पे
सीने से नहीं तो कांधे से लगा ले

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – शीशे के खिलौनों से खेला नहीं जाता

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शीशे के खिलौनों से खेला नहीं जाता
रेतों के घरौंदों को तोड़ा नहीं जाता

जलते हुए दिलों की निशानी जो दे गया
कुछ ऐसे चिरागों को बुझाया नहीं जाता

बनती हुई तस्वीर तेरी चांद बन गई
अब मेरे तसव्वुर का उजाला नहीं जाता

अपनों ने उसे इतना मजबूर कर दिया
कि घर में सुकून से अब जिया नहीं जाता

तसव्वुर –  खयाल

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – किस तरह मैं अपने ही दिल को बेवफा लिखूं

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कौन से लफ्ज़ में मैं दर्द की सदा लिखूं
किस तरह मैं अपने ही दिल को बेवफा लिखूं

इन अंधेरों की खामोशी में है रूह मेरी
और उजालों में दिखे जिस्म को जनाजा लिखूं

साज के रोते हुए सुर मुझे कुछ कहते हैं
इन सुरों को मैं किसी नज्म का आईना लिखूं

सात रंगों को लिखता हूं मैं इंद्रधनुष
सैकड़ों जख्म की रंगत को आशना लिखूं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – जी नहीं लगता आशियां में तेरे बिन शाम ढले

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छू गई वो चांदनी काली घटा में छुप गई
इश्क की शमा जलाकर वो शहर में खो गई

हर अंधेरे में उजाला आस बनकर रहता है
तेरे आने की हर आहट जुगनू बनकर बुझ गई

जी नहीं लगता आशियां में तेरे बिन शाम ढले
रातों के इन रहगुजरों पे जिंदगी तन्हा रह गई

आईना दिल की दास्तां को रोज ही दुहराता है
एक कयामत संवर के उसमें, उसका दिल तोड़ गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari