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एक औरत के प्रेम-पत्र – 6 – प्रिय तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो

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मेरे दोस्त: क्या तुम सोचते हो कि खत में तुमको दोस्त लिखना बहुत सर्द सी शुरुआत है? मैं ऐसा नहीं सोचती।

क्या दोस्ती सच्चे प्यार की पहली मंजिल नहीं होती? मैं नहीं जानती कि मर्द किस तरह प्यार में पड़ते हैं लेकिन खुद के बारे में इतना कह सकती हूं कि मैं तुम्हारे प्यार में नहीं पड़ती अगर पहले तुमसे दोस्ती न हुई होती।

ओह, मेरे प्रिय, और उसके बाद, मैं तुमसे दोस्ती के ऐसे धागे से बंध गई हूं जिसका कोई ओर-छोर नहीं है।

मैंने सुना है कि मर्द ऐसा कहते हैं कि औरतों के साथ दोस्ती के रिश्ते में सच्चाई और गहराई की कमी होती है। जो ऐसा बोलते हैं, उनके बारे में मैं ऐसा सोचती हूं कि उनको कभी किसी औरत की सच्ची दोस्ती नहीं मिली है।

मैं अपनी जाति की प्रशंसक हूं क्योंकि मैं उसके अकेलेपन के कुछ रहस्यों को जानती हूं जिसे तुम मर्द नहीं जानते। एक समय मैंने यह भी जाना कि तुम्हारी दोस्ती मेरी जिदंगी के लिए सबसे गहरी चीज है।

इसलिए क्या यह कहना सही नहीं होगा कि औरत दोस्ती के रिश्ते में मर्दों से कहीं ज्यादा खो जाती है क्योंकि मर्दों के मुकाबले यह उसके लिए बहुत मायने रखती है और उसकी जिंदगी को दूर तक छूती हुई गुजरती है?

लेकिन मर्दों में दोस्ती की कितनी ही क्षमता हो, यह उसके मन को नहीं भर सकती। एक मर्द हमेशा दोस्ती से आगे एक ऐसी औरत को पाना चाहता है जो उसके जीवन को पूर्णता दे, उसके रूह और जिस्म को वह सब कुछ दे जो उसको चाहिए। सिर्फ दोस्ती किसी मर्द को संतुष्ट नहीं कर सकती। वह कुछ चीजों पर अपना अधिकार मानकर चलता है और जीवन में दोस्ती से कहीं ज्यादा पाने का दावा करता है।

लेकिन एक औरत के लिए एक समय ऐसा आता है जब प्यार में दोस्ती ही सब कुछ हो जाती है। किसी की दोस्त बनने की  तीव्र इच्छा ही ऐसी औरतों के रूह को छूकर गुजरती है और दोस्ती को ही प्यार में ज्यादा तवज्जो देती है।

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एक औरत के प्रेम पत्र – 4 – तुम्हारे प्यार के लिए जी रही हूं!

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प्रिय: कोरे कागज को एकटक देखते हुए मैं तुम्हारे बारे में सोचती रही हूं कि मेरे दिल की जो हालत है, क्या उसका हू ब हू बयां यह खत वहां कर पाएगा जब तुम इसे पढ़ रहे होगे।

फिलहाल मैं यही महसूस कर रही हूं कि मैं इसलिए जी रही हूं क्योंकि तुम मुझे प्यार करते हो और अगर ऐसा नहीं होता तो मेरा जीवन उसी तरह खत्म हो जाता जैसे कलम से स्याही।

अभी तक, मेरे प्रिय, अभी तक! ऐसा कुछ हम दोनों के बीच शुरू नहीं हुआ और हमने कुछ ऐसा नहीं किया जो प्यार में होता है।

मैं फिलहाल यह नहीं कहूँगी कि हमारा प्यार सावन के महीने में पहुंच गया है। मुझे तो ऐसा लगता है बहुत दिनों से यह बसंत महीने में ही रुका हुआ है।

हर अगले दिन पिछले दिन से ज्यादा शिद्दत से मैं तुम्हारे प्यार से बंधती जा रही हूं। इसलिए हर दिन अब एक सा नहीं होता। मेरे लिए आने वाला कल बीते हुए से ज्यादा खुशनुमा होता है।

तुम मेरे हो, मेरे अपने! लेकिन यह उतना सच नहीं है जितना कि मैं तुम्हारी हूं। ऐसा मैं इसलिए कह रही हूं क्योंकि अपना दिल और रूह तुमपे लुटाने के बाद अब मेरे वश में नहीं कि मैं किसी भी चीज को अपने अधिकार में रख सकूं। मेरे अंदर मेरी पहचान खो सी गई है।

मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो चुकी हूं। ये सब कहना हो सकता है कि बेकार की बातें हों लेकिन मैं और क्या कह सकती हूं अगर मुझे कोई बात कहनी हो तो?

क्या मैं कभी सच में तुम्हारे आकाश का सितारा बन पाऊंगी, जैसा कि तुम कहते हो मेरे आशिक।

प्रिय, मेरे लिए एक सितारा तुम हो जाओ और मैं तुम्हारे लिए एक सितारा बन जाती हूँ। जब कभी हम दोनों अलग रहें तो ऐसा हो कि आसमान में हम दोनों के सितारे एक-दूसरे को तलाशते रहें। स्वर्ग के किसी मोड़ पर जाकर वे मिल जाएं और वे साथ-साथ चलते रहें।

बिना किसी अंधविश्वास के मैं यह कह सकती हूँ कि मुझे इन सितारों में एक खूबसूरत जिंदगी दिखती है। क्या तुमने कभी इन आसमानी चीजों में खुद को तलाशा है?

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एक औरत के प्रेम पत्र – 2 – तुम मेरे कितने करीब हो!

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प्रिय, तुम्हारे नाम ने आज सुबह मुझे गहरी नींद से जगा दिया। मैंने पाया कि ख्वाब से निकलकर जब तक मैं बाहर आ पाती उससे पहले ही मेरे लब तुम्हारे नाम का गीत गुनगुना रहे थे।

मैं सोचने लगी कि जब मेरी रूह शांत पड़ी थी तब यह कौन दगाबाज़ था जो मेरे अंदर अबूझ सी बातें बोल रहा था। पिछली रात मैंने ख्वाब में देखा कि तुम एक बहुत बड़े पेड़ थे जिसके साये में मैं थी और आँधी हम दोनों को उड़ा ले गई।

इसके बाद क्या हुआ, मैं सब भूल चुकी हूं। इतना काफी था जिसकी वजह से नींद खुलते ही मैं काफी खुश थी।

वे सारे ख्वाब अब उसी तरह से बुझे-बुझे लग रहे हैं जैसे कि सुबह में अचानक दरवाजा खोलते ही सूरज का उजाला घर के अंदर जलती मोमबत्ती की रोशनी का अस्तित्व मिटा देता है। अब वह मोमबत्ती दीवारों को रोशन नहीं करती क्योंकि दिन की रोशनी उसके ऊपर हावी हो जाती है। उसी तरह, मैंने ख्वाब में क्या देखा, वह  सब भूल गई हूं क्योंकि दिन के उजाले में समाकर तुम आए और उन यादों को मिटा गए।

ओह! तुम कैसे हो? जग गए? बिस्तर से उठ गए? सुबह कुछ खाया कि नहीं? मैं तुमसे हजार बार पूछती हूं। तुम मेरे बारे में ही सोच रहे हो, मैं जानती हूँ। लेकिन क्या सोच रहे हो?

मैं अपने बारे में ऐसे सवालों को सोचकर खुश हो रही हूं। अगर मैं जान सकती कि कल जो कुछ भी मैंने अपने प्यार का इजहार करते हुए कहा उसे सोचकर आज तुम मुस्कुरा रहे हो तो मैं अपने बारे में सोचकर खुशी के मारे रोने लगूंगी।

एक तुम ही हो जो मुझे अपने बारे में सोचने पर मजबूर करते हो। तुम्हारी वजह से ही आज मैं अपनी तलाश कर रही हूं। पहले मुझे खुद पर अधिकार था और इसे मैं अपनी सबसे महान चीज समझती थी लेकिन तुम्हारे वश में आने के बाद वह भावना जाने कहां चली गई और मैं एक राज को जानने के लिए रोती रह गई जो मेरा नहीं था।

क्या मैं कभी जान पाऊंगी कि तुमने मुझसे इश्क क्यों किया? यह मेरी सूफियाना उलझन है लेकिन यह किसी संदेह से उपजा सवाल नहीं है। तुम मुझसे इश्क करते हो। क्यों करते हो, यह मैं कभी जान पाऊंगी?

तुमने भी अपने बारे में मुझसे यही सवाल पूछा था और इसका कोई जवाब तुमको नहीं मिला था क्योंकि मैं पूरी की पूरी तुम्हारी हो चुकी थी। मैं इस सवाल का जवाब तभी सोच पाती जब मैं अपनी सांसों को रोक पाती। अगर मैं अपने सांसों को एक पल के लिए रोक लेती और तुम्हारे बगैर दुनिया को देखने की कोशिश करती तो मेरे पैरों तले की जमीन खिसक जाती और किसी सुनसान-वीरान जगह में गिर जाती।

लेकिन, उसके बाद जैसे ही मैं डर के मारे सांस लेती तो मेरे सितारे मुझे बाहों में भर लेते और आसमान में चमककर तुम्हारा चेहरा मुझे दिखाते। ओ हसीन सितारे, मैं तुम्हारे साये में ही तो पैदा हुई थी, तुम मेरे साथ घूमते रहे और बचपन से मेरे बारे में खामोशी से भविष्यवाणियां करते रहे लेकिन मैं नहीं समझती थी कि उन बातों का मतलब क्या था- तुम्हारी चमक में मेरे आशिक का नाम छुपा हुआ था।

बचपन में कभी-कभी बिना किसी कारण के मैं बहुत खुश रहती थी। मुझे उस समय पंख लग गए थे। कभी कोई खेत परियों का देश बन जाता था और मैं इसमें से गुजरती थी। मैं सोचती हूँ कि धरती के इन जादुई पलों को तुमने भी जरूर जीया होगा। तुम्हें भी घास पर चलते हुए हवाओं की हल्की छुअन का अहसास हुआ होगा या बारिश के बाद और भी खिले-खिले दिखने वाले खुशबूदार फूलों के साये में तुम खड़े हुए होगे।

याद है एक बार मैंने तुमसे पूछा था कि तुम कहां-कहां रहकर जवां हुए। ऐसा मैंने इसलिए पूछा था कि क्योंकि मुझे लगता था कि शायद हम कहीं पहले भी मिले थे, लेकिन हम कहाँ मिले थे इसे मैं अपनी जवानी की खुशी को समेटते हुए याद नहीं कर पा रही थी।

मैं देख सकती हूं कि दूर कहीं कुछ रहस्य हमारा इंतजार कर रहा है। यह रहस्य कुछ ऐसा है जिसके बारे में मैं पहले अनुमान नहीं लगा सकती थी- तुम्हारे साथ उम्र बिताकर बूढ़े होने की खुशी।

क्या वह वक्त उस शाम की तरह ही खुशनुमा नहीं होगा जब हम दोनों एक दूसरे का हाथ थामे बैठे हुए थे और सूरज ढलते ही हमारे सर पर सितारे आकर चमकने लगे थे। उन पलों के जीवन में बीते दिनों की जाने कितनी यादें खिंचकर चली आई थी। क्या बुढ़ापे में भी हमारी मुहब्बत वैसी का वैसी ही नहीं रहेगी-सितारों से भरी यादों वाली जगह जैसी?

तुम्हार प्रेम-पत्र मेरे पास पड़ा है जब मैं यह सब लिख रही हूं। तुम इतने कम लफ्जों में सब कुछ कैसे कह देते हो!

कल तुम आओगे। मैं और क्या चाहूँगी- कल और उसके साथ आने वाली सौगातों के सिवा? तुम मेरे दिल में हो, मेरे प्रिय। दुनिया की और कोई भी चीज मेरे इतने करीब नहीं हो सकती, जितने तुम हो।

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