Tag Archives: कतरा शायरी

कौन अपना है जो उसके सर पर हाथ रखे

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जाने किसके लिए जमाने के बाद तरसा है
उसका दिल आज रो कर बेपनाह बरसा है

कौन अपना है जो उसके सर पर हाथ रखे
अपनों से प्यार पाए हो चुका एक अरसा है

रिश्तेदारों की लड़ाई को देख देखकर अब
उसे रिश्तों के नाम से लग जाता डर सा है

मर रहा है रोज रोज घर में वो कतरा कतरा
उसकी जिंदगी में घुल रहा कुछ जहर सा है

©rajeevsingh             शायरी

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शायरी- ये इश्क की डगर है जहां

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काश ये चेहरा आईना होता
वो कभी मेरे भी सामने होता

ये इश्क की डगर है जहां
वफादारों से वफा नहीं होता

कभी पाना है, कभी खोना है
कोई दिन एक सा नहीं होता

रेत के हाथ की लकीरों में
कोई कतरा जुड़ा नहीं होता


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – खामोशियों के रिश्ते निभाना मुझे आता है

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खामोशियों के रिश्ते निभाना मुझे आता है
हर दर्द से इस दिल को लगाना मुझे आता है

जो तुम हँसो हँसता हूँ, अगर रो दो तो रोता हूँ
जो जैसा है संग उसके जीना मुझे आता है

बंजर सी जमीं पर ही कबसे जी रहा हूँ मैं
इस रेत से अपना घर बनाना मुझे आता है

दुनिया में मुहब्बत का कतरा न मिला हमको
अब दुख भरे गीतों को गाना मुझे आता है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – हर उदासी इश्क की एक फरियाद है

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कहां से अश्क के तारे निकलके आए हैं
कहां से बर्फ के आतिश पिघलके आए हैं
तेरे गाल गर्म हो रहे हैं जिस पानी से
वो किस आग का भेष बदलके आए हैं

ना मरहम लगा मेरे कलेजे पे
ये आग तेरे बदन को छू जाएगी
तब जलने लगेगी तू भी इश्क में
और मेरी तरह खाक हो जाएगी

हर खामोशी एक मुकम्मल आवाज है
हर उदासी इश्क की एक फरियाद है
इस रेत की दुनिया में प्यास का हर कतरा
तेरी आंखों में बस जाने को बेताब है

मुस्कुराते हुए जीने की तमन्ना किसे नहीं होती
रुलाने के लिए तो हर लम्हां ये जमाना बैठा है
अपने-पराए, दोस्त-दुश्मन, मेरा साया भी
सबने सबके दिल पे दर्द का फसाना लिखा है

©RajeevSingh

शायरी – अचानक तुम आ गई मेरी खुशियों की राह में

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दर्द के फूलों को तेरे कदमों पे निसार चुका मैं
तेरी इबादत की खातिर गुलशन उजाड़ चुका मैं

अचानक तुम आ गई मेरी खुशियों की राह में
उदासी को फिर अपनी सूरत पे संवार चुका मैं

तेरी मोहब्बत का आखिरी कतरा जब सूख गया
अपनी आंखों में एक समंदर को उतार चुका मैं

आशिकी में न जाने कहां से ये फितरत आ गई
जहां में हर शख्स से रिश्ते को बिगाड़ चुका मैं

©राजीव सिंह शायरी