Tag Archives: कशमकश शायरी

शायरी – सांसों की कशमकश में कितने शहर बदल चुके

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ऐ जिंदगी तेरे इश्क में पागल भी हम हो चुके
कांटों से नहीं, हम यहां फूलों से घायल हो चुके

अपने हमें समझाते रहे दुनिया की वो रवायतें
हम समझ न पाए तो अपने घर से निकल चुके

मोम सा जलते रहे हम चांद की खातिर रातभर
बुझ गए हैं आज हम जो पूरी तरह पिघल चुके

एक जगह रुकने से अब घुटता है क्यों दम मेरा
सांसों की कशमकश में कितने शहर बदल चुके

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – तुझे भी अपना कोई जख्म हम दिखा न सके

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वो तकलीफ जो दुनिया को हम बता न सके
तुझे भी अपना कोई जख्म हम दिखा न सके

जहां हर ओर बेवफाई के फूल ही खिलते हों
उस चमन में वफा के कांटों को बचा न सके

अजीब कशमकश में फंसी जिंदगी किधर जाए
अपने याद आते रहे ओर तुमको भुला न सके

अंजामे मोहब्बत बुरा ही होगा, ऐसा लगता है
रोज दिखती हो मगर गले से तुझे लगा न सके

©RajeevSingh

शायरी – नादान हसरतें आपके दिल और हमारे दिल में

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भूल से भी जिंदगी को नाराज न कीजिए कभी
लीजिए आ गई नशे में घुली रात अभी
नादान हसरतें आपके दिल और हमारे दिल में
फिर दूरियों में न गुजर जाए रात अभी

सूर्ख चादर सा फैला है गुलाबों की जमीं
ख्वाबों की महक से फिजा रोशन है अभी
शब पे छायी है हर तरफ मदहोश हवाएं
नींद से बढ़के जगने का हसीन पहर है अभी

कशमकश होती ही रहती है सदा दिल में आपके
सीधे-सीधे मेरी बातों को मान लीजिए अभी
खर्च कर दें आज हम अपनी सारी ख्वाहिशें
बंदिशों की दीवार गिराने का मौसम है अभी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – इस दर्द के सागर में दिल कैसे सलामत हो

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कब जाने मरासिम हो, कब जाने मुहब्बत हो
इस आस में जीते हैं, एक दिन तो कयामत हो

किसका कदम बढ़ेगा, किसके रहगुजर पर
मंजिल तो दो तरफ हैं, दोनों में कशमकश हो

एक रंज सा होता है, सीने के सफीने में
इस दर्द के सागर में दिल कैसे सलामत हो

परवाज़ आसमां में उस चांद को छू लेता
गर उसके ही वश में मिलने की किस्मत हो

(मरासिम- रिश्ता, संबंध)
(सफीना- नाव)

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari