Tag Archives: कश्ती शायरी

shayari – अजनबी रिश्तों की कोई निशानी नहीं जानी

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जवानी की महफिल शायरी इमेज

अजनबी रिश्तों की कोई निशानी नहीं जानी
अपने ही घर में किसी की कहानी नहीं जानी

दो पल साथ हों, किसी के पास वक्त कहां था
अपनों ने फिर अपनों की परेशानी नहीं जानी

जवानी की इन महफिलों में गुम होकर हमने
कभी बुजुर्गों की जिंदगी की वीरानी नहीं जानी

अक्लवाले ही बच जाएंगे इस दुनिया में शायद
यहां तो बच्चों ने बचपन की नादानी नहीं जानी

अश्को को छुपाने की मुश्किल कोशिश में वो
रो लेने से जीने में होती है आसानी नहीं जानी

©rajeevsingh                                     shayari

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शायरी – मुझे खबर न हुई कि वो रोता है बहुत

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चुप रहके ही जिंदगी का गम खाता रहा
हमसे हर बात वो जालिम छुपाता रहा

मुझे खबर न हुई कि वो रोता है बहुत
जब भी मिला वो मुझको यूं हंसाता रहा

सर्द आंखों में जाने वो कितने दुख लिए
आग को अपने दिल में ही दबाता रहा

कितना अजीब था वो मेरा नादां नाखुदा
अपनी कश्ती को जो रेत पर चलाता रहा

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – जुल्म करती है जब मुझपे तन्हाई

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बेवफा हो गया है दर्द मुझी से
दूर का रिश्ता हो गया खुशी से

एक बादल का टुकड़ा उड़ता था
हमने बरसते देखा उसे बेबसी से

कोई कश्ती जब किनारे लगती है
वो ठहरती है कितनी खामोशी से

जुल्म करती है जब मुझपे तन्हाई
कत्ल करता हूं अपनी बेखुदी से

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – एक गुमसुम सी फूल के खातिर मैं कांटों पे सोया

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प्यासी निगाहें बरस गई, बरसी निगाहें तरस गई
सावन की आई बारिश में कितनी नदियां टूट गई

मेरे सागर में एक कश्ती तूफानों से डरती थी
सैलाबों से लड़ते-लड़ते वो भी एक दिन डूब गई

एक गुमसुम सी फूल के खातिर मैं कांटों पे सोया
लेकिन वो खुद से रूठी थी, हमसे भी रूठ गई

बाली उमर में बुझता चिरागां शम्मे को दर-दर ढूंढे
वो बुझा उसकी गली में, जब वो शम्मा बुझ गई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari