Tag Archives: कुबूल शायरी

शायरी – अच्छा किया जो मुझपे ये गुलाब रख दिया

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रोते हैं वो रुखसती पे जब मैं नहीं रहा
अब पास वो बैठे हैं जब मैं नहीं रहा

अच्छा किया जो मुझपे ये गुलाब रख दिया
लो कर लिया कुबूल जब मैं नहीं रहा

जिंदा रहा तो बेरुखी देकर ही खुश रही
अब रुख वो दिखाती है जब मैं नहीं रहा

मेरे गमों की आबरू तेरे हाथ लुट गई
इज्जत से तो दफना दिया जब मैं नहीं रहा

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – हो सकता है तेरे दिल में मेरे खातिर जगह न हो

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हो सकता है तेरे दिल में मेरे खातिर जगह न हो
हो सकता है इसके पीछे, किसी तरह की वजह न हो

लो गुनाह कुबूल किया, फिर आशिक कहता है कि
दुनिया तेरी कचहरी में मेरे इश्क पे जिरह न हो

रात में शाम का बादल ही चांद का कातिल बनता है
सोचता हूं कि तेरे बिन अब इन रातों की सुबह न हो

तू है गैर के घर में और मैं हो गया जग से पराया
इश्क की दुनिया में किसी का अंजाम मेरी तरह न हो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari