Tag Archives: खता शायरी

शायरी – जवानी ये कैसी खता करा बैठा

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जाने क्या सूझा, जवानी ये कैसी खता करा बैठा
कमजर्फ बेवफा की दिल्लगी से दिल लगा बैठा

बरसों में बनाई थी उसने दुनिया में जो इज्जत
उसे एक पल में कमसिन के हाथों लुटा बैठा

हसीना ने हंस हंस के जमाने में बदनामी की
वह शख्स किसी कोने में खुद को छिपा बैठा

अब रोता है वो अपनी करतूत और किस्मत पर
कि क्यों मासूम चेहरे पर कदम डगमगा बैठा

कमजर्फ – ओछा

(एक उम्रदराज इज्जतदार आशिक से प्रेरित शायरी, जिसकी कमउम्र बीवी ने उसे दुनिया में बदनाम किया। )

©RajeevSingh

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शायरी – इश्क में दिल मेरे ये तो होना ही था

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आसमां देखने में खता हो गई
चांदनी आज मुझसे खफा हो गई

मेरे कदमों ने जिसपे भरोसा किया
राह अक्सर वही बेवफा हो गई

जिंदगी ऐसे मंजर दिखाती रही
मुझमें रोने की ताकत दफा हो गई

इश्क में दिल मेरे ये तो होना ही था
एक खुशी थी जो हमसे जुदा हो गई

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – तुम हमारे लिए टूटे गुलाब लायी थी

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मैं जी रहा जिस हाल में, जी लेने दो
इस हालात में अब खुद पे रो लेने दो

बता रहे हो क्यूं अपनी मजबूरियों को
तुम मत जाओ, मुझे ही चले जाने दो

कई सदियों की खता है मुहब्बत भी
हर जनम में तुझे खोने की कसम खाने दो

तुम हमारे लिए टूटे गुलाब लायी थी
वो भी मुरझा गए, उसको बिखर जाने दो

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – अब दिल के लिए कोई पत्थर भी तो आए

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तुम किस अंधेरे में हो ऐ नूर खुदा के
शब ने तुझे पुकारा है खामोश सदा से

दामन की उलझनों में डूबे हुए हैं हम
लो दफ्न हो गए हैं खुद अपनी खता से

अब दिल के लिए कोई पत्थर भी तो आए
ऐ बेरहम तन्हाई मुझे इतनी दुआ दे

एक दर्द का वजूद है आगोश में मेरे
वो दूर रह रहा है अपनी दिलरुबा से

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – दिल थाम कर जाते हैं हम राहे-वफा से

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दिल थाम कर जाते हैं हम राहे-वफा से
खौफ लगता है हमें तेरी आंखों की खता से

जितना भी मुनासिब था हमने सहा हुजूर
अब दर्द भी लुट जाए तुम्हारी दुआ से

हम तो बुरे नहीं हैं तो अच्छे ही कहां हैं
दुश्मन से जा मिले हैं मुहब्बत के गुमां से

वो दफ्न ही कर देते आगोश में हमें लेकर
ये मौत भी बेहतर है जुदाई की सजा से

©RajeevSingh

शायरी – कांटों, फूलों, खताओं और गुनाहों में

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अभी तुमको आधा समझना बाकी है
तुमको जाना है लेकिन परखना बाकी है

जुल्मो सितम की इंतहा हमने देखी है
तुझे जी भरके अभी देखना बाकी है

कांटों, फूलों, खताओं और गुनाहों में
तेरे अक्स को निरखना बाकी है

जिंदगी ने मुझको बहुत रुलाया है
तुझे भी पल भर को हंसाना बाकी है

©RajeevSingh