Tag Archives: खाक शायरी

शायरी – दिल के घर में चुपके से वो

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हमने ही तो आग लगाई
बेशक उसने थी सुलगाई

दिल के घर में चुपके से वो
एक दीया थी लेकर आई

जलकर खाक हुआ फिर भी
हमने उसकी जान बचाई

मरकर चला गया दीवाना
तुम देने नहीं आई विदाई

©राजीव सिंह शायरी

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शायरी – तेरी यादों में जलता रहा आज देर रात तक

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तेरी यादों में जलता रहा आज देर रात तक
ये दिल खाक बनता रहा आज देर रात तक

तेरे ख्यालों की तेज आंधियों के थपेड़ों से
गश खाकर गिरता रहा आज देर रात तक

भीगा सा अहसास था लेकिन नहीं थी खबर
आखों से कुछ गिरता रहा आज देर रात तक

दामन में समेटता रहा अपने वजूद के टुकड़े
आईने सा मैं टूटता रहा आज देर रात तक

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – तुम जबसे दामन हमसे बचाने लगे

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तुम दामन जब हमसे बचाने लगे
दुनियावालों के लब मुस्कुराने लगे

खाक में मिले तो रोया इस कदर
आंसुओं को गिरने में जमाने लगे

जेब में खुदा के सिवा कुछ न रहा
फकीरों से हम नजर आने लगे

उस जगह मैं अब टिक पाता नहीं
जो तेरी याद को सुलगाने लगे

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – इश्क में इन आंखों में अश्कों की सौगात थी

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इश्क में इन आंखों में अश्कों की सौगात थी
चार दिन की चांदनी थी फिर अंधेरी रात थी

उम्रभर के वास्ते चिंगारियां मिलीं कुछ सही
मुद्दत से मेरे दिल में जली-बुझी सी खाक थी

कदमों के फासले से ही नापेंगे धरती कब तलक
मुझे हर कदम पे एक नई जमीन की तलाश थी

आते हैं वो शब ए याद में इस चांद की तरह
मुझे जिंदगी में बस उसकी रोशनी की प्यास थी

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तेरा सुरूर जबसे निगाहों पे छा गया

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तेरा सुरूर जबसे निगाहों पे छा गया
जाना था अपने घर तो तेरे दर पे आ गया

बेहोश था जब आया तेरे मयकदे में मैं
तूने थमाया जाम तो मुझे होश आ गया

कितने करम किए हैं मुझपे मेरे खुदा
जिनके सितम से जीने का मजा आ गया

शम्मे को जलता देखकर मैं उसमें जल गया
ये जिस्म खाक था मगर मैं पाक हो गया


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तेरे दर्द का ये बयार था या आशिकी का खुमार था

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जो जल गया वो चिराग था, जो बुझ गया वो आग था
जो गल गया वो खाक था, जो बह गया वो आब था

तकदीर के मानिंद मैं बनता रहा, बिगड़ता रहा
बन गया तो गुलाम था, जो बिगड़ गया तो इंसान था

दुनिया की सजा काट के, अब जा रहा इसे छोड़ के
ये जिस्म ही कारागार था, ये रूह ही गुनहगार था

जलता हुआ शोला-ए-दिल लहक गया, बहक गया
तेरे दर्द का ये बयार था या आशिकी का खुमार था

(आब- पानी)

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – जो जवां होके महक जाए वो शबाब हुए

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जिसने मिट्टी से महक पाई वो गुलाब हुए
जो जवां होके महक जाए वो शबाब हुए

सोये पत्थर को जगाना आसां नहीं था
इसी कोशिश में तो ठोकरें बेहिसाब हुए

मेरा मंजर जो सुनहरा था, अब बेरंग हुआ
जैसे दरिया भी बिना चांद के उदास हुए

आग में हाथ जलाया तो मुझे खाक मिला
फिर हथेली पे माजी के कुछ दाग हुए

माजी – अतीत, past

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – दर्द की आग में मुझको जल जाने दे

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दर्द की आग में मुझको जल जाने दे
अब तेरे इश्क में खाक में मिल जाने दे

मेरे हर जख्म से रिसते अश्कों ने कहा
मुझको आंचल की जमीं पर बरस जाने दे

गम की हर सांस पे धड़कन रो पड़ती है
जिंदगी अब मुझे इस दुनिया से जाने दे

ये निगाहें तेरे दीदार को तरसती है
एक बार खुद को मेरे पास आ जाने दे

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – दर्द से काम लिया तो हम बदनाम हुए

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दिल गुनाहों से हुआ पाक, बड़ा ताज्जुब है
दो निगाहों से हुआ चाक, बड़ा ताज्जुब है

दर्द से काम लिया तो हम बदनाम हुए
और तुमने भी दिए दाग, बड़ा ताज्जुब है

हम तो मिलने ही गए थे महबूब के शहर
उसके दर पे मिला खाक, बड़ा ताज्जुब है

यूं तो खाते रहे जिंदगीभर धोखे पर धोखा
लेकिन संभला नहीं दिल, बड़ा ताज्जुब है

चाक – टुकड़े

©RajeevSingh