Tag Archives: खिजां शायरी

शायरी – मैं दर्द की थी चाँदनी, वो उदास सा एक चाँद था

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वो खुद से यूं खफा हुआ, मेरी जिंदगी से चला गया
नाकामियों के हर्फ से एक खत मिला लिखा हुआ

जो बहार से दगा करे वो खिजां से क्या वफा करे
बेदर्द इस तकदीर को मेरे इश्क से भी गिला हुआ

मेरे ख्वाब पूरे होने से पहले ही वो जगा गया
दिल तोड़के जो है गया उसे क्या खबर मेरा क्या हुआ

मैं दर्द की थी चांदनी, वो उदास सा एक चांद था
जब मैं जमीं पे गिरी वो फलक पे था गिरा हुआ

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – तू वफा पे दाग दे गया, बेवफा हुआ तो क्या हुआ

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मुझसे जुदा-जुदा हुआ, तो क्या हुआ, तो क्या हुआ
एक चकोर था इस खिजां में, वो उड़ गया तो क्या हुआ

मसले हुए एक फूल से किसी बुत की बन्दगी न हो
मैं जमीं पे गिरी रह गई, वो कुचल गया तो क्या हुआ

मैं शाम से ही उदास हूं कि चांद की कुछ खबर मिले
मैं घटा को चीर न सकी, वो छुपा रहा तो क्या हुआ

तेरी सादगी जब तक रही, चुनरी मेरी मैली न थी
तू वफा पे दाग दे गया, बेवफा हुआ तो क्या हुआ

खिजां – पतझड़

©rajeevsingh       love shayari

शायरी – सावन भी गुजर जाएगा, आंसू भी बिखर जाएगा

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सावन भी गुजर जाएगा, आंसू भी बिखर जाएगा
एक बार जो तू आ जाए, पतझड़ भी संवर जाएगा

मेरे इश्क का चकोर तो चंदा से जुदा हो गया
अब तो वो इस खिजां में रोकर ही मर जाएगा

दिल के इन नश्तरों में दुख भी हैं, सुख भी हैं
कभी खिलेंगे गुलाब तो कभी पेड़ उजड़ जाएगा

मुझको मेरी तन्हाई देती है ये दिलासा
ये दिल न लगा उनसे जो लौटकर फिर जाएगा

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शायरी – हर गजल एक दास्तां है, मेरे इश्क का बयां है

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हर गजल एक दास्तां है, मेरे इश्क का बयां है
मेरा ये खामोश दिल दर्द का एक आशियां है

अपनी प्यासी सरहदों के पार तेरा शहर मिला
क्या खबर थी अपने घर में तू गैरों की सामां है

साहिलों पे चलनेवाले तूफानों से डर गए
इश्क का सागर सदियों से बेवफा से परेशां है

फूलों की बस्ती में आखिर कांटों का क्या काम था
ऐ खुदा तेरे गुलशन में आ जाती क्यूं खिजां है

खिजां- पतझड़

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शायरी – जलते हुए खिजां में ये सावन कहां से आया

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इतनी तो गनीमत है कि जीता हूं, न मरता हूं
इतनी ही जरूरत है कि तुझे याद मैं करता हूं

नस-नस में मेरे बह रही है दर्द की दरिया
अब खून किसी का भी पीने से मैं डरता हूं

जलते हुए खिजां में ये सावन कहां से आया
प्यासी सी जमीं पे मैं बरसात में रहता हूं

अब ऐसी फकीरी है, क्या खोना है क्या पाना
जो रहगुजर सूनी हो, उस ओर ही चलता हूं

(खिजां- पतझड़)

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