Tag Archives: गुनहगार शायरी

शायरी – मौत यूं भी तेरे हाथों लिखी है जालिम

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जानेजां हूं मैं अब तेरा गुनहगार सही
ले तू खंजर और कर दे आर-पार सही

मौत यूं भी तेरे हाथों लिखी है जालिम
जो लिखी है उसे तू पढ़ ले एक बार सही

सामने तुम जो रहोगी तो मर न पाऊंगा
चाहे खंजर ये चुभाओगी कई बार सही

जानता हूं कि ये सजा भी न दे पाओगी
आ भी जाऊं तेरे दर पे मैं बार-बार सही

©RajeevSingh #love shayari

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शायरी – आह और दर्द बस तेरा तलबगार हुआ

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आह और दर्द बस तेरा तलबगार हुआ
आंख पत्थर हुई, अश्क आबशार हुआ

अमावस में बस जुदाई के सितारे हैं
चांद के बिन फलक भी दागदार हुआ

मेरी पलकों का झपकना बड़ा मुश्किल है
ऐसा तबसे है जबसे तेरा दीदार हुआ

सो रहे हैं इन मकानों के बाशिन्दे सभी
मैं जगा रहके बस्ती का गुनहगार हुआ

आबशार – झरना
फलक – आकाश


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तेरे दर्द का ये बयार था या आशिकी का खुमार था

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जो जल गया वो चिराग था, जो बुझ गया वो आग था
जो गल गया वो खाक था, जो बह गया वो आब था

तकदीर के मानिंद मैं बनता रहा, बिगड़ता रहा
बन गया तो गुलाम था, जो बिगड़ गया तो इंसान था

दुनिया की सजा काट के, अब जा रहा इसे छोड़ के
ये जिस्म ही कारागार था, ये रूह ही गुनहगार था

जलता हुआ शोला-ए-दिल लहक गया, बहक गया
तेरे दर्द का ये बयार था या आशिकी का खुमार था

(आब- पानी)

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari