Tag Archives: गुनाह शायरी

शायरी – आंसू के कतरों से तेरे लिए दुआ निकली

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मेरी आंखों से गुनाह की सजा निकली
आंसू के कतरों से तेरे लिए दुआ निकली

जो ख्यालों में बहुत सच्ची लगती थी
उसे करीब से देखा तो बेवफा निकली

जिसे पीकर मैं कभी होश में न आ सका
वो हुस्न तो एक दिलकश नशा निकली

जब लौटा उसके दर से ठोकरें खाकर
आईने में अपनी सूरत गुमशुदा निकली

मुझे मुहब्बत के समंदर में डुबोकर
जाने किधर साथ छोड़ मेरी खुदा निकली

©RajeevSingh #love shayari

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शायरी – मेरे आंसुओं को वो कभी भुला न सकी

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गुनाह ए इश्क का ऐसा गम पीया उसने
खुद खाक में मिलकर ही दम लिया उसने

पलट-पलट के मुझे देख जाने कितनी बार
हंस-हंस के आंखों को नम किया उसने

अपने ही हाथों से अपना दिल तोड़कर
घर के लोगों का दुख कम किया उसने

मेरे आंसुओं को वो कभी भुला न सकी
जिंदगीभर इस कदर ये गम लिया उसने

गुनाह ए इश्क- इश्क का गुनाह

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शायरी – हर कांटा चुन लेता तेरी जिंदगी की राहों का

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हर कांटा चुन लेता तेरी जिंदगी की राहों का
जो इनायत होती हमपे फूल सी निगाहों का

वफा का जवाब जमाने में किससे मांगे हम
तुम अगर सुन न सके सवाल मेरी आहों का

दर्द के जज़्बे दिल में दफन हो गए हैं इस कदर
कि इस कब्र में अब एक लाश है मेरे गुनाहों का

मेरा साया रोशनी में खोजता है मुझे, और मैं
अंधेरों में निशां तलाशता हूं तेरी पनाहों का

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शायरी – आप जब तक मेरे कातिल हैं

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कोई बंदा गुनाह कर जाए
हमको कोई तबाह कर जाए

कश्तियां रेगिस्तां में तरसती हैं
कोई सागर आके भर जाए

जो खुदा बनके मुझमें बसते हैं
मेरी गलियों से वो गुजर जाए

आप जब तक मेरे कातिल हैं
हर गवाही से हम मुकर जाएं

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शायरी – इश्क का अच्छा इम्तहान रहा

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रातभर रास्ता सुनसान रहा
पर तेरे आने का इम्कान रहा

कोरा कागज ही जमा कर आया
इश्क का अच्छा इम्तहान रहा

छीनने वालों को ही छोड़ दिया
आशिकों पर ये इल्जाम रहा

मैं तो जीता रहा गुनाहों में
तेरी कैद पाने का अरमान रहा


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शायरी – है इश्क एक गुनाह तो ये गुनाह कर लिया

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है इश्क एक गुनाह तो ये गुनाह कर लिया
तेरे दर्द से इस दिल को तबाह कर लिया

गम बहुत हैं जिंदगी में इसलिए जानेमन
खामोशी से ही प्यार बेपनाह कर लिया

मेरी नजर में हर जगह तुम ही बसी हो
जर्रे-जर्रे को इस मंजर का गवाह कर लिया

गुलाब के कांटों से भी रिश्ता रहा अपना
गुलशन में रहके सबसे यूं निबाह कर लिया

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – देखिए आप नजरें चुराए जा रहे हैं

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आप खुद गुनाह किए जा रहे हैं
और मुझको सजा दिए जा रहे हैं

हम परेशां है आपकी नजर के लिए
देखिए आप नजरें चुराए जा रहे हैं

आपके दर्द में गजल लिख रहे हैं
इस कदर आप मुझमें समाए जा रहे हैं

अंधेरों में ऐसा लगता है मुझको
कि मुझे छूकर आपके साए जा रहे हैं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – हमने तुमसे इश्क ये बेपनाह क्यूं किया

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हमने बार-बार ऐसा गुनाह क्यूं किया
तुमसे इस कदर इश्क बेपनाह क्यूं किया

अपनी तलाश में मैं बहुत दूर तक गया
अपनी मंजिलों को खुद ही तबाह क्यूं किया

आंखे खुली हैं जबसे, हूं दर्द में ऐ महबूब
मुझे नींद से जगाके तूने आगाह क्यूं किया

बेखुद सा हूं तेरे इश्क में आजकल सनम
हर जर्रे को इस बात का गवाह क्यूं किया

©RajeevSingh

शायरी – कोई तू राह बता कैसे मैं बेवफाई करूँ

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इस मुहब्बत में तुमको मैं खुशी दे न सकी
कोई तू राह बता कैसे मैं बेवफाई करूँ
दर्द के शोलों को हवा दी हमने तेरे दिल में
इन गुनाहों से तोबा अब मैं कैसे करूँ

खता-ए-इश्क से बस तेरी इबादत की है
ऐसा लगता है तेरी ही शहादत दी है
तू जो रोता है इतना मेरे ख़यालों में
तेरे आँसू को देखने की सज़ा मैं कैसे सहूँ

तेरे हर जख़्म का इल्ज़ाम मेरे सर पे है
तेरे हर दाग का अहसास जिगर पे है
तेरे दामन में चुभे दर्द-ए-नश्तर की कसम
मुझपे जो बीत रही है, उसे मैं कैसे कहूँ

ऐ मेरे इश्क, मेरे हुस्न पे मरनेवाले
ओ दीवाने मेरी याद में जलनेवाले
मेरी राहों में पत्थर की दीवारें हैं
इन दीवारों के अहसानों को मैं कैसे तोड़ूँ

©RajeevSingh

शायरी – जो सुन ना सकी मेरी खामोश सदा

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ना बंदिशों में है, न मकानों में है
मेरा अंजाम बस आज़ाद पनाहों में है

दिल आँसू भी बहाए तो कोई बात नहीं
हँसी तो बेवफाओं के गुनाहों में है

जो सुन ना सकी मेरी खामोश सदा
वो नाजनीन मेरे दिल की दरगाहों में है

हम तो मुफ़लिस ही रहे मुसलसल
दोजख तो आज भी सैरगाहों में है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – उस नाज पे, उस हुस्न पे जांनिसार हों हर जनम में हम

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कभी दिल्लगी कभी संगदिली, कितने सितम तुमने किए
कभी की वफा, कभी थी खफा, कितने करम तुमने किए

उस हुस्न के दीदार पे जांनिसार हों हर जनम में हम
जो रूह बनके जुदा हुई, इस जनम में जां उसने लिए

ये इश्क का इंसाफ है, कि तेरी हर खता मुआफ है
इस गुनाह को कुबूल कर खुद को सजा हमने दिए

ये चांद भी तेरे नूर का एक मिसाल है इस जहां में
हम रातभर यूं ही जागकर तुझे देखकर जीते गए

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – बुने हैं दर्द के धागों से इश्क की चादर

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जला रहा हूं ये दिल, कोई दीया तो मिले
हुए हैं खाक मगर हाय कहीं धुआं तो मिले

बुने हैं दर्द के धागों से इश्क की चादर
इसे बिछाऊंगा पर तेरा आशियां तो मिले

सजा रहा हूं कांटों को अपने गुलशन में
मेरे चमन को दीदार-ए-बहारां तो मिले

सजा-ए-मौत न मिल पाई इस मुजरिम को
मगर गुनाह की कोई दास्तां तो मिले

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – दर्द से काम लिया तो हम बदनाम हुए

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दिल गुनाहों से हुआ पाक, बड़ा ताज्जुब है
दो निगाहों से हुआ चाक, बड़ा ताज्जुब है

दर्द से काम लिया तो हम बदनाम हुए
और तुमने भी दिए दाग, बड़ा ताज्जुब है

हम तो मिलने ही गए थे महबूब के शहर
उसके दर पे मिला खाक, बड़ा ताज्जुब है

यूं तो खाते रहे जिंदगीभर धोखे पर धोखा
लेकिन संभला नहीं दिल, बड़ा ताज्जुब है

चाक – टुकड़े

©RajeevSingh