Tag Archives: गुल शायरी

शायरी – है कौन सा ये शहर, जहां कोई न हमसफर

#100 दर्द शायरी

है कौन सा ये शहर, जहां कोई न हमसफर

बस्तियों में गुल खिले हैं, पर खुशबू है बेअसर

सुबहो शाम उदास है, रात रोती कराह कर

धूप निकलता शोला सा, चांदनी थोड़ी मुरझा कर

  1. तेरे इश्क में दीवाना मरता नहीं कभी
  2. माना कि तेरे हुस्न के काबिल नहीं हूं मैं
  3. कोई इल्ज़ाम न लेगी वो अपने सर पे
  4. आह और दर्द बस तेरा तलबगार हुआ
  5. तू न आई तो अधूरी है जिंदगी की गजल
Advertisements

शायरी – कांटों ने ही अब तक हमको जीना है सिखाया

love shayari hindi shayari

खामोशियों की बस्ती में जिसने घर हो बनाया
उसने दर्द के गुलों से तन्हा कमरे को सजाया

सफर के रहगुजर से यही कहते चले अक्सर
कांटों ने ही अब तक हमको जीना है सिखाया

जिसकी हस्ती में वफा का नामोनिशां नहीं था
उसके लिए ही जाने क्यों दिल औ जां लुटाया

पेड़ों के पत्तों को है शायद गर्दिश से मुहब्बत
जो टूटकर पतझड़ के लिए खुद को मिटाया

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – कांटों के इस चमन में हम घायल गिर पड़े

love shayari hindi shayari

सावन के मौसम में घटाएं उमड़ पड़े
किश्तों में आसमान से बादल गिर पड़े

हमको नहीं खबर कि रहगुजर है कैसा
जाने क्या हुआ कि तेरे कूचे में चल पड़े

काबू नहीं है अब मुझे जेहनो-जिगर पे
मुझसे बिना पूछे मेरे आंसू निकल पड़े

अपना ये गुलिस्तां है जिसमें गुल ही नहीं है
कांटों के इस चमन में हम घायल गिर पड़े

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – वरना किनारों से ही दिल लगाते रहे हैं हम

love shyari next

देखें कि जमाने में क्या गुल खिलाते हैं हम
अब तक तो दर्द को ही उगाते रहे हैं हम

कश्ती के मरासिम से दरिया में आ गए
वरना किनारों से ही दिल लगाते रहे हैं हम

मुहब्बत की आग में जो जलके खाक हो चुके
उनमें भी कुछ धुएं को जगाते रहे हैं हम

नहीं जानता बेवफाओं से क्या रिश्ता हमारा
अब तक तो उनसे फासले बनाते रहे हैं हम

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

prev shayari next shayari