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शायरी – छुपते हैं बेवफा जब मुस्कुराहटों के पीछे

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अंधेरी तन्हाई में हम तबसे बुझ रहे हैं
गैरों के घर में जबसे शम्मे जल रहे हैं

छुपते हैं बेवफा जब मुस्कुराहटों के पीछे
देखिए किस अदा से दो होठ हिल रहे हैं

गिरते हैं ठोकरों से और चोट भी खाते हैं
पथरीले रास्तों पे हम फिर भी चल रहे हैं

कमसिन सी एक पुरवाई बन गई है आंधी
ये किसकी आह है जो मौसम बदल रहे हैं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

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शायरी – तुम थी मिली उस मोड़ पे, जिस मोड़ पे कोई न था

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अपने भी सारे गैर थे, गैरों में अपना कोई न था
तुम थी मिली उस मोड़ पे, जिस मोड़ पे कोई न था

तेरे वजह से गीत के सुर-ताल को मैं पा सका
पहले तो बस लफ्ज थे पर लय उनमें कोई न था

तुम मशाल हो अंधेरे में तो रोशनी मेरे दिल में है
सारे चिराग बुझ गए, तेरे सिवा और कोई न था

मैं आज तुमसे दूर हूं, तुमपे गजल मैं लिख रहा
तुम जब जुदा हुए थे तब मेरा हमसफर कोई न था


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari