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शायरी – ये खामोश दर्द, ये खामोश आह

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ये बंजर सी जमीं, ये बंजर आस्मा
ये बंजर सा शमा, ये बंजर दास्तां

काली सी घटा, काली सी हवा
है काले वक्त पे कुदरत के निशां

ये खामोश दर्द, ये खामोश आह
है खामोश इश्क, बेबस है जुबां

एक कली खिली मगर टूट गई
उसे लग गई शहर की आंधियां


©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – वहीं मिल जाएगी एक दरिया उसे रोती हुई

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अभी बरसात है, कभी रुकती कभी गिरती हुई
और एक शाम है भीगी हुई सी ढलती हुई

कौन जाने कि ये घटाएं कहां तक जाएंगी
जाने किस मोड़ पे बेवफा होगी हवा चलती हुई

जिस जगह कोई तलाशेगा वजूद अपना
वहीं मिल जाएगी एक दरिया उसे रोती हुई

ये फलक कितने मुसाफिरों का आशियाना है
फिर भी चिंगारियां हैं उसके दामन में जलती हुई

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

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चल पड़ा हूँ किधर, जबसे छूटा है घर
और बिछड़ा है मेरा हसीं हमसफर
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

अपने साये से रुखसत हुआ था कभी
जब दीये बुझ गए मुफ़लिसी में सभी
अब अंधेरे में रहता हूँ आठों पहर
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

कोशिशें की बहुत, हौसले थे मगर
हो गया चाक मेरा ये नाज़ुक जिगर
फिर भी मिल न सका इश्क में रहगुज़र
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

सागर से उठे थे धुएँ की तरह
फिर हवा में उड़े पंछियों की तरह
और घटा बनके एक दिन बरसी नज़र
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – तू वफा पे दाग दे गया, बेवफा हुआ तो क्या हुआ

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मुझसे जुदा-जुदा हुआ, तो क्या हुआ, तो क्या हुआ
एक चकोर था इस खिजां में, वो उड़ गया तो क्या हुआ

मसले हुए एक फूल से किसी बुत की बन्दगी न हो
मैं जमीं पे गिरी रह गई, वो कुचल गया तो क्या हुआ

मैं शाम से ही उदास हूं कि चांद की कुछ खबर मिले
मैं घटा को चीर न सकी, वो छुपा रहा तो क्या हुआ

तेरी सादगी जब तक रही, चुनरी मेरी मैली न थी
तू वफा पे दाग दे गया, बेवफा हुआ तो क्या हुआ

खिजां – पतझड़

©rajeevsingh       love shayari