Tag Archives: घर शायरी

shayari – मंजिल सामने थी मगर रास्ते कहीं खो गए

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मंजिल सामने थी मगर रास्ते कहीं खो गए
हम तुम अपने घरों के वास्ते कहीं खो गए

एक बार दूर हुए तो फिर कभी मिल न सके
मजबूरियों में दो दिल के रिश्ते कहीं खो गए

निगाहों में छुपा दर्द ये जमाना देख न सका
महफिल में इस तरह हम हंसते कहीं खो गए

अपनों ने इतनी उलझनों में फंसा दिया कि
सारे सपने आहिस्ते आहिस्ते कहीं खो गए

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शायरी – लोग फिर भी लूटने आ जाते हैं

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हम किसी से कुछ मांगने नहीं  जाते हैं
लोग फिर भी हमको लूटने आ जाते हैं

जब भी उनको काम निकालना होता है
वो हमको अपने घर खाने पर बुलाते हैं

अगर मैं किसी काम के लिए ना कहता हूं
वो अगले ही पल मेरे दुश्मन बन जाते हैं

बिना मतलब के होते हैं जो रिश्ते नाते
हमने पाया कि वही रिश्ते टिक पाते हैं

©rajeevsingh              love shayari

शायरी – कातिल से मोहब्बत कर बैठे

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खुद ही से अदावत कर बैठे
कातिल से मोहब्बत कर बैठे

वही अपना न रहा इस शहर में
जिनके लिए हम सबसे लड़ बैठे

उनके चर्चे जब हरसू होने लगे
सारे इल्जाम मेरे सर वो धर बैठे

खोजें जीने का कोई और ठिकाना
मिलने लगे हैं ताने अब घर बैठे

अदावत –  दुश्मनी
हरसू – हर तरफ

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – मैं अकेली जुदा हूं तुमसे

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चांद ने चुपके से कहा है
छत पे तू तन्हा खड़ा है

तुमको पाया तबसे जाना
अपना घर भी बहुत बुरा है

मैं अकेली जुदा हूं तुमसे
मेरा दिल भी टूटा पड़ा है

ये खला अब जान लेगी
दर्द से मेरा दामन भरा है

©राजीव सिंह शायरी

शायरी – कांटों ने ही अब तक हमको जीना है सिखाया

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खामोशियों की बस्ती में जिसने घर हो बनाया
उसने दर्द के गुलों से तन्हा कमरे को सजाया

सफर के रहगुजर से यही कहते चले अक्सर
कांटों ने ही अब तक हमको जीना है सिखाया

जिसकी हस्ती में वफा का नामोनिशां नहीं था
उसके लिए ही जाने क्यों दिल औ जां लुटाया

पेड़ों के पत्तों को है शायद गर्दिश से मुहब्बत
जो टूटकर पतझड़ के लिए खुद को मिटाया

©RajeevSingh # love shayari

शायरी – मुश्किल हुआ है शहर में रहना मेरा, चलना मेरा

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मुश्किल हुआ है शहर में रहना मेरा, चलना मेरा
बस कुसूर इतना है कि रहता हूं मैं तन्हा बड़ा

सुबह का जख्म खाके वो भूल गए शाम को
लेकिन हमारा आज तक कोई भी जख्म नहीं भरा

ये लोग चाहते हैं कि उनकी तरह मैं बन जाऊं
सैकड़ों की भीड़ से लड़ने को हूं तन्हा खड़ा

जाने किस उम्मीद में वो घर बसाकर रह गए
मैं भटकता हूं तो वो कहते हैं मुझको सरफिरा

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – जब जज्ब कर गए हम हर दर्द को इस दिल में

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रहने को हालांकि वो अच्छा सा घर बना गए
लेकिन सुकून पाने को दरिया किनारे आ गए

जब जज्ब कर गए हम हर दर्द को इस दिल में
फिर अश्क में ही अपनी आंखों को डूबा गए

अपने वजूद के लिए जो ताउम्र भटकते रहे
इस जिंदगी की राह से कितने ही बेवफा गए

जब तक किसी गम को मिटा पाते हम दिल से
तब तक तो सैकड़ों गम जाने कहां से आ गए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – तुम्हें देखना मेरी आदत है लेकिन

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है गम से मरासिम हमारे जिगर का
ये सारा असर है तुम्हारी नजर का

तुम्हें देखना मेरी आदत है लेकिन
रस्ता नहीं मिलता तुम्हारे ही घर का

आशियां ये हमारा जमीं पे गिराया
वो तूफां जो आया था तेरे शहर का

अगर आंख से न बहेगी दरिया
कहां जाएगा फिर सागर लहर का

मरासिम – संबंध

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari