Tag Archives: जिगर शायरी

शायरी – चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

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चल पड़ा हूँ किधर, जबसे छूटा है घर
और बिछड़ा है मेरा हसीं हमसफर
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

अपने साये से रुखसत हुआ था कभी
जब दीये बुझ गए मुफ़लिसी में सभी
अब अंधेरे में रहता हूँ आठों पहर
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

कोशिशें की बहुत, हौसले थे मगर
हो गया चाक मेरा ये नाज़ुक जिगर
फिर भी मिल न सका इश्क में रहगुज़र
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

सागर से उठे थे धुएँ की तरह
फिर हवा में उड़े पंछियों की तरह
और घटा बनके एक दिन बरसी नज़र
चल पड़ा हूँ किधर, जाने कौन शहर

©RajeevSingh #love shayari

शायरी – आ लौट के तू आ जा, पहलू उदास है

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आ लौट के तू आ जा, पहलू उदास है
बरसात में जलता दिल का चिराग है

तू तो बड़ा प्यासा है पर जानती हूँ मैं
समंदर नहीं तुमको रेतों की तलाश है

हर ओर से कयामत उठाया है जिगर ने
शायद ये मेरे खून में चढ़ता शबाब है

सावन का पपीहा भी रो-रो के थक गया
एक बूंद की खातिर वो इतना हताश है

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – इस दर्द से मैं मर गया तो मुजरिम होंगी आप ही

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सबको नजर से देखिए, हमको जिगर से देखिए
यानि कि मुझे प्यार की पहली नजर से देखिए

इस दर्द से मैं मर गया तो मुजरिम होंगी आप ही
बंदे को आप भी जरा खुदा के डर से देखिए

खुशबू कोई मिला नहीं, मन फूल सा खिला नहीं
गुजरे नहीं हैं आप भी मेरे रहगुजर से देखिए

सबसे मुझे गिला है पर आपसे तो गिला नहीं
सबके गिले भुला दें हम, मुझे इस नजर से देखिए

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – अपनी आंखों में उसे बांध कर भला मैं कैसे रखूं

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शाम तो रख लिया अब रात को मैं कैसे रखूं
इतने उदास लम्हों को एक दिल में कैसे रखूं

हाथ आए थे चंद अश्क, छिटक के भाग गए
अपनी आंखों में उसे बांध कर भला कैसे रखूं

यादों के बयार संग मेरे दिल तक चले आए हैं
इन गर्द गुबारों को इस जिगर में अब कैसे रखूं

बूंद बनकर जो मेरी आंखों से दर्द बहा ले गया
ऐसे सावन को तेरे तोहफे के लिए मैं कैसे रखूं

©RajeevSingh # love shayari #share photo shayari

शायरी – इस बदनसीब के इश्क में तुझे डूबकर भी क्या मिला

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मुझे टूटकर क्या मिला, तुझे रूठकर भी क्या मिला
जब बेवफा ही नसीब हो तब रोकर भी क्या मिला

अब आग से हम दूर हैं पर खाक के तो पास हैं
ठंढ़ी हुई है चिता मेरी, मुझे जलकर भी क्या मिला

मेरे साथ गर्दिश में रहे, मेरे संग-संग रोते रहे
इस बदनसीब के इश्क में तुझे डूबकर भी क्या मिला

ये जिगर लहू से भर गया जब जख्म भी रिसने लगे
मेरे आंसुओं को रोककर इस नजर को भी क्या मिला

©RajeevSingh #love shayari